भोपाल समाचार, 18 अप्रैल 2026: मध्य प्रदेश में सरकारी शिक्षकों की विशेष पात्रता परीक्षा के खिलाफ आज राजधानी भोपाल में औपचारिक प्रदर्शन हुआ। इसमें लगभग 50000 शिक्षक शामिल हुए जबकि एक लाख से अधिक शिक्षकों के शामिल होने की उम्मीद थी परंतु मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने न केवल शिक्षकों की मांग मान ली बल्कि सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल भी कर दी। इसके बाद प्रदर्शन की औपचारिकता पूरी की गई। एसडीएम को ज्ञापन देकर आंदोलन की समाप्ति की घोषणा कर दी गई।
जगदीश यादव ने पढ़ाई के लिए समय मांगा
संयुक्त मोर्चे के संयोजक जगदीश यादव ने कहा कि अगर सरकार परीक्षा लेना ही चाहती है तो शिक्षकों को पढ़ाई के लिए समय दिया जाए और उन्हें जनगणना जैसे कामों में न लगाया जाए। संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने साफ कहा कि पहले से नौकरी कर रहे शिक्षकों को दोबारा शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET देने के लिए मजबूर करना गलत है। उनका कहना है कि नियुक्ति के समय सभी जरूरी योग्यता पूरी की गई थी, ऐसे में 20 से 25 साल की सेवा के बाद नई शर्तें थोपना न्यायसंगत नहीं है।
शिक्षा कर्मी और संविदा शिक्षक सबसे ज्यादा चिंता में
शिक्षकों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश से 90 से 95 प्रतिशत तक शिक्षक प्रभावित हुए हैं। खासकर वे शिक्षक जो पहले अध्यापक थे और बाद में शिक्षक संवर्ग में शामिल हुए। इन शिक्षकों ने कम वेतन से नौकरी शुरू की थी और आज भी पेंशन, ग्रेच्युटी और सेवा अवधि की गणना जैसे अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सबसे ज्यादा चिंता उनके चेहरे पर देखी गई जो शिक्षाकर्मी या संविदा शिक्षक के रूप में भर्ती हुए थे। बाद में आंदोलन करके नियमित हुए।
संयुक्त मोर्चा को इतनी भी उम्मीद नहीं थी, पंडाल छोटा पड़ गया
शिक्षकों के संयुक्त मोर्चा ने 18 अप्रैल को अनुरोध यात्रा का ऐलान तो कर दिया था परंतु शायद उनको भी उम्मीद नहीं थी कि इतनी बड़ी संख्या में शिक्षक राजधानी तक पहुंच जाएंगे। इसलिए उन्होंने छोटे से पंडाल की व्यवस्था की थी जिसमें अधिकतम 10000 लोग खड़े हो सकते थे। जबकि एक समय में 25000 से अधिक शिक्षक मैदान में देखे गए। शिक्षकों की संख्या इतनी अधिक थी कि, पुलिस को पार्किंग के लिए काफी दूर बैरिकेडिंग करनी पड़ी। इसके कारण शिक्षकों को लंबी पदयात्रा भी करनी पड़ी।

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