आज मैं आपको एक ऐसे प्रोडक्ट के बारे में बताने जा रहा हूं, जिसने सन 2015 में मार्केट पकड़ लिया था। अमेरिका और कनाडा में भरपूर खरीदा जा रहा है। आपके लिए गुड न्यूज़ है कि चीन के बाद भारत में भी जबरदस्त बिक्री हो रही है। अभी यह प्रोडक्ट जिला स्तर पर उपलब्ध नहीं है। आप कंपनी से खरीद कर लोकल मार्केट में ट्रेडिंग करो या फिर कंपनी की डीलरशिप ले लो। दोनों कंडीशन में, एक बात पक्की है कि आप मालामाल हो जाओगे। कुछ लोग चाय की दुकान खोलने के लिए 25 लाख खर्च कर देते हैं जबकि इस प्रोडक्ट के बिजनेस में सिर्फ 5 से 15 लाख का इन्वेस्टमेंट है।
फाइबर सरिया की कहानी
फाइबर सरिया (FRP Rebar) 1970–80 के दशक में बनाया गया जब अमेरिका और कनाडा में ब्रिज और मरीन स्ट्रक्चर में स्टील के सरिया जंग खाकर खराब होने लग गए थे। इंजीनियरों ने “non-corrosive reinforcement” की जरूरत महसूस की और 1990 से इस दिशा में रिसर्च और प्रयोग शुरू हुए। साल 2000 से 2015 तक अमेरिका और कनाडा में ब्रिज, टनल एवं हाईवे में इसका उपयोग शुरू किया गया। 2015 के बाद “Smart Infrastructure” और “Long-life construction” के कारण फाइबर सरिया ने दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया और आज यह Steel Replacement Technology बन चुकी है।
आज की तारीख में फाइबर सरिया का उपयोग 50 से ज्यादा देशों में हो रहा है। सबसे ज्यादा 25% अमेरिका में, इसके बाद 20% चीन में और तीसरे नंबर पर भारत का नाम आता है। भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर में ग्लोबल मार्केट का 10% फाइबर सरिया उपयोग किया जा रहा है।
ग्लोबल मार्केट साइज की बात करें तो 2024 में लगभग दो बिलियन डॉलर का कारोबार हुआ। तब से यह लगातार प्रतिवर्ष लगभग 13% की रफ्तार से बढ़ रहा है। खास तौर पर चीन और भारत में सबसे ज्यादा उपयोग किया जा रहा है और 2034 तक मार्केट साइज 3 गुना हो जाने की संभावना है।
भारत में फाइबर सरिया का मार्केट
2015 में जब अमेरिका और कनाडा में इसका सफल प्रयोग हो गया तो भारत में फाइबर सरिया का उपयोग करना शुरू किया गया। 2020 के बाद सरकार के NHAI, Metro, Coastal projects में फाइबर सरिया का उपयोग तेजी से शुरू हो गया। भारत में फाइबर सरिया का उपयोग ब्रिज बनाने में, फ्लावर बनाने में, एक्सप्रेसवे और मेट्रो ट्रेन के टनल बनाने में प्रमुख रूप से किया जा रहा है। इसके अलावा पोर्ट, जेट्टी, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट एवं डैम बनाने में भी फाइबर सरिया का उपयोग प्रमुखता से किया जाने लगा है।
फाइबर सरिया के फायदे
सबसे बड़ा फायदा तो यही है कि इसमें जंग नहीं लगता। दूसरा बिजली का करंट नहीं पकड़ता। तीसरा इसकी कोई मैग्नेटिक फील्ड नहीं बनती। चौथ यह स्टील का सरिया की तुलना में 70% हल्का होता है और पांचवा इसकी उम्र लगभग 100 साल होती है जो स्टील के सरिया (लगभग 30 साल) से काफी ज्यादा है। फायदे वाली बात यह भी है कि इसकी मेंटिनेस कॉस्ट स्टील का सरिया की तुलना में 60% तक कम होती है।
लोकल में फाइबर सरिया का बिजनेस कैसे कर सकते हैं
- यदि आप प्रोडक्शन यूनिट लगाना चाहते हैं तो लगभग 3 करोड़ का इन्वेस्टमेंट है।
- यदि आप रीजनल डिस्ट्रीब्यूशन शुरू करना चाहते हैं तो लगभग 40 लाख का इन्वेस्टमेंट है।
- सबसे आसान है कंपनी से माल खरीद कर लोकल मार्केट में बेच दीजिए। 5 लाख से शुरू कर सकते हैं और 15 लाख में तो बढ़िया काम हो जाएगा।
माल बेचने के लिए सबसे पहले आपको सरकारी प्रोजेक्ट्स पर फोकस करना होगा। भारत के लगभग हर जिले में छोटे-बड़े डैम, ब्रिज और फ्लाईओवर बना रहे हैं। भारत के हर शहर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट है। भारत के हर शहर में पानी की टंकी बन रही है। फाइबर का सरिया हर उस कंस्ट्रक्शन में लगाना चाहिए जहां पर पानी का संपर्क होता हो अथवा लगातार कंपन होता हो। जैसे फ्लाईओवर ब्रिज के ऊपर से लगातार ट्रैफिक गुजरता है। कंपन होता रहता है। वाइब्रेशन के कारण लोहे का सरिया लगातार कमजोर पड़ जाता है लेकिन फाइबर का सरिया टिका रहता है।
घरों में बनने वाली पानी की टंकी, बड़ी मशीनों के प्लेटफार्म, आरसीसी रोड, नगर निगम और नगर पालिका अथवा बिल्डर द्वारा बनाई जाने वाली कॉलोनी की बड़ी पानी की टंकी, स्विमिंग पूल, पानी को रोकने के लिए जहां कहीं भी दीवार बनानी है। यहां तक कि बिजली के बड़े ट्रांसफार्मर के लिए जो प्लेटफार्म बनाए जाते हैं। ऐसे सभी स्थानों पर फाइबर का सरिया उपयोग किया जाना चाहिए।
क्योंकि भारत के सभी बड़े सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में फाइबर सरिया का उपयोग शुरू हो गया है इसलिए आपका लोकल प्रशासन, फाइबर सरिया के उपयोग के लिए मना नहीं कर पाएगा। मार्केट बन चुका है, माहौल भी बनने लगा है, अब केवल उपलब्धता की जरूरत है। जो व्यक्ति अपने मार्केट में फाइबर सरिया उपलब्ध करवा देगा, वही मार्केट का बादशाह बन जाएगा।
कृपया अपना कोई माइंडसेट क्रिएट मत कीजिए। ऐसे लोगों से सलाह मशवरा भी मत कीजिए जिनको इसके बारे में कोई जानकारी ही नहीं है। बेहतर होगा कि, इंटरनेट और AI के माध्यम से आप खुद जानकारी कलेक्ट करें। अपने सवालों के जवाब पूछें और फिर NAHI अथवा मेट्रो प्रोजेक्ट पर काम करने वाले किसी ठेकेदार से बात करें। इसका एक्सपीरियंस आपके काम आएगा। Notice: This is a copyright-protected news article. Unauthorized copying of any part will lead to legal action under the Copyright Act. — Author.

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