मध्य प्रदेश के एक सनसनीखेज हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

Updesh Awasthee
नई दिल्ली, 11 मार्च, 2026
: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मध्य प्रदेश के एक सनसनीखेज हत्याकांड, डबलू आदि बनाम मध्य प्रदेश राज्य, में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है जो आने वाले समय में कई मामलों में न्याय दृष्टांत के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने स्पष्ट किया कि 'गैरकानूनी सभा' का हिस्सा होने पर प्रत्येक सदस्य हत्या के लिए समान रूप से जिम्मेदार होता है, भले ही उसने स्वयं गोली न चलाई हो।

मामले की पूरी कहानी: बस से उतरे और गोलियां बरसा दीं

यह घटना 3 जून, 2000 की सुबह करीब 8:15 बजे की है। ग्वालियर के पास तिहुली बस स्टैंड पर वाटरशेड समिति के अध्यक्ष बालकिशन अपने गांव जाने के लिए बस का इंतजार कर रहे थे। तभी एक बस वहां रुकी और उसमें से छह सशस्त्र व्यक्ति, विक्रम (मुख्य आरोपी), डबलू (A-1), कमलेश (A-2), गोविंद सिंह (A-3), विनोद उर्फ अजय (A-4) और प्रताप उर्फ प्रताप नारायण (A-5) हथियारों के साथ नीचे उतरे।

मुख्य आरोपी विक्रम ने एक ट्रैक्टर-ट्रॉली के पीछे से पहली गोली चलाई, जो बालकिशन के बाएं हाथ में लगी। अपनी जान बचाने के लिए बालकिशन गांव की ओर भागे, लेकिन सभी आरोपियों ने उनका पीछा किया और लगातार फायरिंग की। घायल बालकिशन ने रतन लाल (PW-6) के घर में शरण ली, लेकिन आरोपियों ने वहां घुसकर उन्हें आंगन में घसीटा और बिल्कुल करीब (Point-blank range) से उनके सिर पर गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

हत्या के पीछे की वजह: राजनीतिक रंजिश

जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी विक्रम और मृतक बालकिशन के परिवारों के बीच 1994 के पंचायत चुनाव के समय से ही गहरी राजनीतिक दुश्मनी थी। उस चुनाव में बालकिशन की पत्नी ने विक्रम की पत्नी को हरा दिया था, जिसका बदला लेने के लिए इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया।

अपीलकर्ताओं (दोषियों) के तर्क: 

दोषियों के वकील, श्री एस. महेंद्रन और श्री प्रफुल्ल कुमार बेहरा ने तर्क दिया कि:
घटना के दूसरे हिस्से (घर के अंदर हत्या) का कोई विश्वसनीय चश्मदीद गवाह नहीं है।
गवाह मृतक के करीबी रिश्तेदार हैं, इसलिए उनकी बातों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
इन अपीलकर्ताओं के पास से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ और न ही मेडिकल रिपोर्ट इनके शामिल होने की पुष्टि करती है।
जांच में धारा 157 और 174 CrPC की अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।

राज्य सरकार (मध्य प्रदेश) के तर्क: 

राज्य के वकील श्री श्रेयश यू. ललित ने बचाव में कहा कि:
सभी आरोपी एक साथ हथियारों के साथ बस से उतरे थे, जो उनके 'समान उद्देश्य' (Common Object) को साबित करता है।
मेडिकल रिपोर्ट और शरीर से बरामद 40 छर्रों से साबित होता है कि बालकिशन पर कई हथियारों से हमला किया गया था।
राजनीतिक रंजिश हत्या का स्पष्ट मकसद (Motive) थी।

न्यायालय की विशेष टिप्पणी और फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 149 की व्याख्या करते हुए कहा कि जब कोई अपराध किसी गैरकानूनी सभा के सामान्य उद्देश्य को पूरा करने के लिए किया जाता है, तो उस सभा का प्रत्येक सदस्य इसके लिए उत्तरदायी होता है। न्यायालय ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि, सभा के हर सदस्य के लिए कोई विशिष्ट हिंसक कार्य करना जरूरी नहीं है; उसका हथियारों के साथ वहां मौजूद होना ही सजा के लिए पर्याप्त है।

साक्ष्य और प्रक्रिया: 

न्यायालय ने माना कि गवाहों का मृतक का रिश्तेदार होना उनकी गवाही को खारिज करने का आधार नहीं है। साथ ही, पुलिस की जांच में छोटी-मोटी कमियां पूरी अभियोजन कहानी को गलत साबित नहीं करतीं।

Supreme Court Delivers Historic Verdict in Sensational Murder Case from Madhya Pradesh

अंतिम फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने Special Case No. 12/2001 के तहत निचली अदालत और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को सही ठहराया। न्यायालय ने सभी अपीलें खारिज कर दीं और जमानत पर बाहर चल रहे दोषियों को तत्काल आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया। मुख्य आरोपी विक्रम अभी भी फरार है।
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