भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर के कई SDMs की नौकरी खतरे में

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 17 मार्च 2026
: CAG ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर में 11 अनुभागों में पिछले 6 साल में पदस्थ रहे सभी एसडीएम के खिलाफ भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा किया है। CAG ने बताया कि किस प्रकार SDMs ने पद का दुरुपयोग किया और निर्धारित नियमों का उल्लंघन किया। 

भोपाल के कोलार में मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा लैंड यूज घोटाला

कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि एसडीएम द्वारा 5 शहरों में वर्ष 2018 से 2023 के दौरान लैंड यूज परिवर्तन के 10 हजार से ज्यादा अनुमतियां दी गई थीं। कैग ने 535 मामलों की जांच की। इसमें पाया कि अनुविभागीय अधिकारियों ने 191 मामलों में 92.26 हेक्टेयर से ज्यादा लैंड यूज परिवर्तन की अनुमति जारी की। यह अनुमतियां भोपाल शहर के कोलार, ग्वालियर के झांसी रोड, मुरार, इंदौर के बिचौली हप्सी जैसे तेजी से विकसित होने वाले क्षेत्रों में की गई हैं। सर्वाधिक अनुमतियां भोपाल के कोलार क्षेत्र में दी गई हैं। इन सभी शहरों में विकास योजना के दायरे की कृषि भूमि में अवैध तरीके से परिवर्तित कर कॉलोनी की अनुमति दे दी। विकास योजना क्षेत्र में लैंड यूज परिवर्तन का अधिकार टीएनसीपी के अधिकारियों है।

सरकार ने स्वीकार किया है कि अधिकारियों ने अनुमतियां गलत तरीके से जारी की है। विकास क्षेत्र में लैंड यूज परिवर्तन का अधिकार अनुविभागीय अधिकारियों को नहीं है।

कहां कितनी कॉलोनी गड़बड़ 

सरकार ने स्वीकार किया है कि अधिकारियों ने अनुमतियां गलत तरीके से जारी की है। विकास क्षेत्र में लैंड यूज परिवर्तन का अधिकार अनुविभागीय अधिकारियों को नहीं है। CAG रिपोर्ट में बताया गया कि, किस शहर के किस क्षेत्र में लंड यूज के कितने मामले गलत हैं:- 
  • 73 मामले भोपाल के हुजूर में। 
  • 35 मामले भोपाल के कोलार में। 
  • 18 मामले जोनी इंदौर में। 
  • 14 मामले झांसी रोड ग्वालियर में। 
  • 14 मामले कोठी महल उज्जैन में। 
  • 12 मामले आधार ताल जबलपुर में।
  • 11 मामले बिचोली हैप्सी इंदौर में। 
  • 09 मामले उज्जैन नगर में। 
  • 05 मामले मुरार ग्वालियर में। 

अब जबकि सरकार ने स्वीकार कर लिया है कि SDMs ने अनुमतियां गलत तरीके से जारी की है। विकास क्षेत्र में लैंड यूज परिवर्तन का अधिकार अनुविभागीय अधिकारियों को नहीं है। फिर सरकार को इस मामले की जांच भी करनी होगी और यह पता लगाना होगा कि साल 2018 से 2023 तक उपरोक्त पांच शहरों के 11 अनुभागों में राज्य प्रशासनिक सेवा के कौन-कौन से अधिकारी सदस्य से जिन्होंने गड़बड़ की। उन सबके खिलाफ कार्रवाई भी करनी होगी।
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