प्रिय Shivraj Singh Chouhan जी, हो सकता है Narendra Modi जी ने 207 बार "किसान" का नाम लिया हो! लेकिन, यह तो कोई भी "रट्टू-तोता" भी कर सकता है! मुद्दा है, यदि "नाम" लिया, तो "काम" क्या किया? इसीलिए, आज मैं 207 नहीं, सिर्फ 07 बुनियादी सवाल पूछ रहा हूं! यदि दम है, तो जवाब देकर जरूर बताएं!!
01 - MSP की कानूनी गारंटी : किसान संगठन स्वामीनाथन आयोग के C2+50% फॉर्मूले के तहत MSP की कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं, क्योंकि घोषित MSP पर सभी फसलों की खरीद सुनिश्चित नहीं होती!
02 - खेती की बढ़ती लागत : पिछले दशक में डीजल, खाद, कीटनाशक और बीज की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जिसके कारण खेती में होने वाला निवेश तो बढ़ा है लेकिन उस अनुपात में फसलों के दाम नहीं बढ़े हैं!
03 - तीन विवादित कृषि कानून और गतिरोध : 2020 में लाए गए 03 कानूनों को किसानों ने "मंडी व्यवस्था खत्म करने" एवं "कॉर्पोरेट खेती" को बढ़ावा देने वाला माना! आंदोलन हुआ तो सरकार को कानून वापस लेने पड़े!
04 - आय दोगुनी करने का झूठ : 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का संकल्प लिया, लेकिन किसानों की आर्थिक स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया! किसान पहले से ज्यादा कर्ज में डूबने लगे!
05 - बढ़ता कर्ज : मप्र सहित पूरे देश में छोटे किसान आज भी ऊंची ब्याज दरों पर साहूकारों से कर्ज लेते हैं! कृषि में हुए नुकसान के कारण कर्ज चुका न पाने की स्थिति में आत्महत्या जैसी त्रासदियों शिकार हो जाते हैं!
06 - जलवायु परिवर्तन और अनिश्चित मौसम : पिछले कुछ वर्षों में 'हीटवेव' एवं बेमौसम बारिश ने गेहूं, सरसों और कपास जैसी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया! PMFBY होने के बावजूद मुआवजा मिलने में देरी हुई!
07 - अस्थिर सरकारी नीतियां : सरकार द्वारा अचानक लगाए जाने वाले निर्यात प्रतिबंध (जैसे प्याज, चावल और गेहूं पर) किसान को वैश्विक बाजार के ऊंचे दामों का लाभ लेने से रोकते हैं, मुनाफा भी सीमित हो जाता है!
प्रिय @ChouhanShivraj जी,
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) March 19, 2026
हो सकता है @narendramodi जी ने 207 बार "किसान" का नाम लिया हो! लेकिन, यह तो कोई भी "रट्टू-तोता" भी कर सकता है! मुद्दा है, यदि "नाम" लिया, तो "काम" क्या किया?
इसीलिए, आज मैं 207 नहीं,
सिर्फ 07 बुनियादी सवाल पूछ रहा हूं!
यदि दम है, तो जवाब देकर जरूर… pic.twitter.com/tzTzostOxW
अस्वीकरण: खुला खत एक ओपन प्लेटफॉर्म है। यहाँ मध्य प्रदेश के सभी जागरूक नागरिक सरकारी नीतियों की समीक्षा करते हैं, सुझाव देते हैं, और समस्याओं की जानकारी देते हैं। पत्र लेखक के विचार उसके निजी हैं। यदि आपके पास भी कुछ ऐसा है, जो मध्य प्रदेश के हित में हो, तो कृपया लिख भेजें। हमारा ई-मेल पता है: editorbhopalsamachar@gmail.com

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