भोपाल के इस मंदिर में देवी, माता नहीं बिटिया है, चढ़ावे में नए वस्त्र, श्रृंगार और सैंडल भी लेती है

Updesh Awasthee
भोपाल, 22 मार्च 2026
: आस्था तर्क और विज्ञान का नहीं बल्कि विश्वास का विषय होता है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कोलार क्षेत्र में एक पहाड़ी पर, ऐसा देवी मंदिर स्थापित है जहां पर देवी, माता नहीं बल्कि बिटिया के रूप में विराजमान है और चढ़ावे में वह सब कुछ स्वीकार करती है जो आप अपनी बिटिया को देते हैं। 

18 साल पहले इसी मंदिर में माता पार्वती का कन्यादान हुआ था

राजधानी भोपाल के कोलार क्षेत्र की एक पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर मां सिद्धदात्री को समर्पित है, जिसे स्थानीय लोग “जीजीबाई मंदिर” के नाम से जानते हैं। इस मंदिर की शुरुआत करीब 18 साल पहले हुई थी, जब अशोकनगर से आए ओम प्रकाश महाराज ने यहां देवी की प्रतिमा स्थापित कर शिव-पार्वती विवाह की परंपरा निभाई और स्वयं कन्यादान किया। तभी से वे मां सिद्धदात्री को अपनी बेटी की तरह मानकर सेवा-पूजा करते हैं।

मनोकामना पूरी हो जाए तो फिर जीजीबाई की इच्छा अनुसार चढ़ावा चढ़ना पड़ता है

यहां की सबसे खास बात यह है कि श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने पर देवी को नई चप्पल चढ़ाते हैं। इसके अलावा गर्मियों में चश्मा, टोपी और घड़ी जैसी वस्तुएं भी अर्पित की जाती हैं। मंदिर में देवी की सेवा एक बेटी की तरह की जाती है, उनके लिए नए वस्त्र, श्रृंगार और अन्य सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जाता है।

ओम प्रकाश महाराज बताते हैं कि कई बार ऐसा महसूस होता है कि देवी वर्तमान वस्त्रों से संतुष्ट नहीं हैं, ऐसे में कुछ ही घंटों में उनके कपड़े बदल दिए जाते हैं। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 125 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जिसके बाद वे इस अनोखी आस्था और परंपरा का अनुभव कर पाते हैं।
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