भोपाल, 23 मार्च 2026: इसमें कोई डिबेट नहीं किया एम्स भोपाल में कई कठिन बीमारियों का बड़ी आसानी से इलाज हो जाता है लेकिन यहां भी ओवर कॉन्फिडेंस, वर्कलोड और कंसंट्रेशन की गड़बड़ी के मामले सामने आने लगे हैं। एक व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि स्टाफ नर्स ने उनके बच्चे को गलत इंजेक्शन लगा दिया। रोकने के बाद भी नहीं सुना। इंजेक्शन के कारण उनके बच्चे की मौत हो गई।
इंजेक्शन लगा रही नर्स को तीन बार टोक था
श्री सिद्धार्थ यादव ने अपने 3 वर्षीय बेटे सार्थक यादव को एम्स भोपाल में इलाज के लिए भर्ती करवाया था। सार्थक ब्लड कैंसर से पीड़ित था। सिद्धार्थ यादव ने रोते हुए बताया कि उन्होंने ड्यूटी पर तैनात नर्स को तीन बार टोकते हुए इंजेक्शन लगाने से मना किया था, लेकिन उनकी बात अनसुनी कर दी गई। पिता का आरोप है कि जो इंजेक्शन नस में नहीं लगना चाहिए था, उसे सीधे नस में दे दिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि अस्पताल के ही कुछ डॉक्टरों ने अनौपचारिक बातचीत में स्वीकार किया है कि गलत डोज ही मौत की वजह बना है। पीड़ित पिता की मांग है कि दोषी नर्स को तुरंत बर्खास्त कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित
एम्स प्रबंधन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है। यह कमेटी जांच करेगी कि क्या वाकई बच्चे को गलत इंजेक्शन दिया गया या फिर मौत की वजह ओवरडोज या बीमारी की गंभीर अवस्था थी। फिलहाल, अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी।

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