भोपाल समाचार, 1 फरवरी 2026: हाई कोर्ट ऑफ़ मध्य प्रदेश की इंदौर बेंच के विद्वान न्यायाधीश जस्टिस विनय सराफ ने मध्य प्रदेश शासन को निर्देश दिए हैं कि वह कर्मचारियों की सेवा से संबंधित विवादों के निपटारे के लिए In-house dispute resolution system बनाए। ताकि हाईकोर्ट में कर्मचारी संबंधी मामलों की जो फाइलों के भंडार भर गए हैं उनमें थोड़ी कमी आ सके।
वर्तमान में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के विभिन्न बेंच में कर्मचारियों से संबंधित सामान्य विवादों के 50000 से अधिक मामले पेंडिंग है। इनमें ज्यादातर मामले ट्रांसफर, प्रमोशन, इंक्रीमेंट और सीनियरिटी डिसाइड करने से संबंधित है। सभी विवाद हाई कोर्ट में इसलिए आ जाते हैं क्योंकि डिपार्टमेंट के हेड और कर्मचारियों के बीच विवाद होने की स्थिति में शासन स्तर पर कोई मध्यस्थ की स्थिति ही नहीं है। जस्टिस सराफ ने मंडला के वन रक्षकों की वरिष्ठता से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए, इस नवीन व्यवस्था के निर्देश दिए और अपने न्यायालय को आदेशित किया कि वह इस आदेश की प्रति मुख्य सचिव (Chief Secretary) भेजना सुनिश्चित करें।
अदालतों में आ गई है सर्विस मामलों की बाढ़
सुनवाई के दौरान जस्टिस सराफ ने चिंता जताते हुए कहा कि हाई कोर्ट में इन दिनों सर्विस मामलों की बाढ़ आ गई है। उन्होंने कहा, "अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच सीधे संवाद की कमी के कारण छोटे-छोटे विवाद भी कोर्ट तक पहुंच रहे हैं। यह सरकार पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ाता है और कर्मचारियों को मानसिक पीड़ा देता है।" कोर्ट का मानना है कि आपसी संवाद और विभागीय स्तर पर सशक्त प्रणाली से अधिकांश केसों का समाधान बिना मुकदमेबाजी के संभव है।

