भोपाल, 20 फरवरी 2026: नेतागिरी के कारण स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों के विरुद्ध सेवाएं देने वाले अतिथि शिक्षकों को प्रताड़ित करने का एक और विकल्प क्रिएट किया गया है। लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल ने आदेश क्रमांक 467 दिनांक 20 फरवरी 2026 के माध्यम से एक नई व्यवस्था स्थापित की है। जिसके तहत अतिथि शिक्षकों को पोर्टल से रिलीव किया जाएगा। सबसे पहले आदेश पढ़ते हैं फिर उसका पोस्टमार्टम करेंगे:-
लोक शिक्षण संचालनालय, मध्यप्रदेश का आदेश क्रमांक 467
लोक शिक्षण संचालनालय, मध्यप्रदेश गौतम नगर भोपाल के अपर संचालक द्वारा समस्त जिला शिक्षा अधिकारी, समस्त विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, समस्त संकुल प्राचार्य हाई/ हायर सेकेण्डरी स्कूल एवं समस्त शाला प्रभारी शासकीय विद्यालय के नाम जारी किए गए आदेश में लिखा है, शैक्षणिक सत्र 2025-26 में शासकीय विद्यालयों में रिक्त पदों के विरुद्ध शैक्षणिक व्यवस्था के सुचारू रूप से संचालन हेतु अतिथि शिक्षकों को पोर्टल 3.0 के माध्यम से आमंत्रित करने के निर्देश है। यह संज्ञान में आया है कि शाला प्रभारी अतिथि शिक्षक की लंबी अनुपस्थिति के उपरांत भी उन्हे कार्यमुक्त नही कर रहे है।
अनुपस्थित अतिथि शिक्षक को कार्यमुक्त न करना गंभीर अनियमितता
उल्लेखनीय है, कि नियमित शिक्षक के रिक्त पद एवं शिक्षकों के अवकाश पर जाने से पठन-पाठन प्रभावित न हो इस हेतु अतिथि शिक्षक की व्यवस्था की जाती है। प्राचार्यों द्वारा अतिथि शिक्षकों की लंबी अनुपस्थिति पर संबंधित को कार्यमुक्त न करना गंभीर अनियमितता है।
एक सप्ताह से अधिक अनुपस्थित शिक्षक को पोर्टल से रिलीव करें
उक्त परिपेक्ष्य मे निर्देशित किया जाता है, कि विद्यालय मे पोर्टल के माध्यम से उपस्थित कराए गये अतिथि शिक्षक यदि एक सप्ताह से अधिक विद्यालय से अनुपस्थित रहते है, तो ऐसे अतिथि शिक्षक को तत्काल शाला प्रभारी पोर्टल से रिलीव करने की कार्यवाही करें, कार्यवाही न करने की स्थिति में उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाएगा।
आदेश का पोस्टमार्टम
- मध्य प्रदेश में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति कई प्रकार की परिस्थितियों में की जाती है।
- प्रभारी मंत्री को खुश करने के लिए DEO/DPC के आदेश अनुसार।
- स्थानीय विधायक के प्रेशर में BEO/BRCC के आदेश अनुसार।
- शिक्षक की पावरफुल व्यक्ति के यहां प्रतिनियुक्ति होने पर।
- शिक्षक के परमानेंट रिक्त पद के विरुद्ध। (यदि किसी शिक्षक का पद 3 साल से अधिक तक रिक्त है तो उसे परमानेंट रिक्त पद कहा जाएगा ना?)।
ऊपर के चार पॉइंट्स ऐसे हैं जिनके कारण शाला प्रभारी क्या, लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त भी अतिथि शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकते। और आखिरी पॉइंट ऐसा है, जब अतिथि शिक्षक ही शाला की मजबूरी होते हैं। यदि उनको निकाल दिया तो स्कूल की पढ़ाई और तमाम व्यवस्थाएं ठप हो जाएंगी।
नीचे से लेकर ऊपर तक नेताओं के दबाव में चलने वाले स्कूल शिक्षा विभाग में केवल अतिथि शिक्षक है, जो सबसे बड़ी संख्या में कक्षाओं में सेवाएं दे रहे हैं। यदि उनको इसी तरह से ही प्रताड़ित किया जाता रहा और अच्छा पढ़ाने वाले अतिथि शिक्षकों ने कोई विकल्प ढूंढ लिया तो बोर्ड परीक्षाओं का रिजल्ट संभालना मुश्किल हो जाएगा।

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