चंडीगढ़/मुंबई, 23 फरवरी 2026: IDFC फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा में 590 करोड़ रुपये का एक बड़ा धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। इस मामले का असर मुंबई के शेयर मार्केट तक देखने को मिला। पूरा मार्केट हिल गया और बैंक के इन्वेस्टर्स को करोड़ों का नुकसान हुआ है।
IDFC FIRST BANK घोटाला कैसे हुआ
यह घोटाला तब उजागर हुआ जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना बैंक खाता बंद करने और बैलेंस ट्रांसफर करने का अनुरोध किया। बैंक के रिकॉर्ड और सरकारी विभाग के आंकड़ों के बीच जब मिलान किया गया, तो करीब 590 करोड़ रुपये का भारी अंतर पाया गया। प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह कोई डिजिटल सेंधमारी नहीं थी। बैंक की चंडीगढ़ शाखा के कुछ कर्मचारियों ने बाहरी लोगों के साथ मिलकर इस साजिश को अंजाम दिया। आरोपियों ने फर्जी चेक के जरिए फिजिकल ट्रांजैक्शन किए और सिस्टम से पैसा गायब कर दिया। बैंक का दावा है कि उनके मुख्य बैंकिंग सिस्टम में कोई खराबी नहीं है।
मुख्यमंत्री का सख्त रुख और प्रशासनिक कार्रवाई
इस घटना ने हरियाणा की राजनीति और प्रशासन को झकझोर कर रख दिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में घोषणा की है कि "एक-एक रुपया ब्याज सहित वसूला जाएगा" और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
• सरकार ने इस मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को सौंप दी है।
• तत्काल प्रभाव से हरियाणा सरकार ने IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक से सभी सरकारी लेनदेन रोक दिए हैं।
• अब भविष्य में सभी सरकारी खाते केवल राष्ट्रीयकृत (Nationalized) बैंकों में ही खोले जाएंगे।
शेयर बाजार में कोहराम और निवेशकों की चिंता
इस खबर के सार्वजनिक होते ही सोमवार, 23 फरवरी को शेयर बाजार में IDFC फर्स्ट बैंक के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। बैंक का शेयर 20% तक टूट गया और कारोबार के दौरान इसमें लोअर सर्किट भी लगा।
ब्रोकरेज फर्म यूबीएस (UBS) और मॉर्गन स्टैनली का अनुमान है कि इस घोटाले का असर बैंक के वित्त वर्ष 2026 के प्री-टैक्स प्रॉफिट पर लगभग 20-22% तक पड़ सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बैंक की नेटवर्थ पर इसका असर केवल 0.9% से 1% के बीच ही होगा।
RBI का आश्वासन: "कोई सिस्टमिक खतरा नहीं"
इस बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्थिति को संभालते हुए बयान दिया है कि बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक "आइसोलेटेड घटना" है और इसे कोई सिस्टमिक समस्या नहीं माना जाना चाहिए। गवर्नर के अनुसार, भारतीय बैंकों की कैपिटल एडिक्वेसी 17% है, जो नियामक आवश्यकताओं से काफी अधिक है।
बैंक द्वारा उठाए गए कदम:
1. मामले में संदिग्ध चार कर्मचारियों को तुरंत निलंबित कर दिया गया है।
2. गहराई से जांच के लिए KPMG को इंडिपेंडेंट फॉरेंसिक ऑडिट के लिए नियुक्त किया गया है।
3. बैंक ने पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
बैंक के एमडी और सीईओ वी. वैद्यनाथन ने आश्वासन दिया है कि ग्राहकों और बैंक के सामान्य कामकाज पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। फिलहाल सभी की नजरें फॉरेंसिक रिपोर्ट और एसीबी की जांच पर टिकी हैं।
IDFC First Bank Chandigarh Case: Key Questions and Detailed Answers
यहाँ IDFC फर्स्ट बैंक में हुए हालिया घटनाक्रम और 590 करोड़ रुपये के घोटाले से संबंधित कुछ संभावित प्रश्न (FAQs) और उनके उत्तर दिए गए हैं, जो खाताधारकों और आम लोगों के मन में हो सकते हैं:
IDFC फर्स्ट बैंक घोटाला: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. क्या मेरा पैसा बैंक में सुरक्षित है? हाँ, आपका पैसा सुरक्षित है। बैंक के एमडी और सीईओ वी. वैद्यनाथन ने स्पष्ट किया है कि यह एक "आइसोलेटेड घटना" (एक अलग घटना) है जो केवल एक विशेष शाखा में हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर ने भी भरोसा दिलाया है कि बैंकिंग सिस्टम में कोई "सिस्टमिक समस्या" नहीं है और बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी (17% कैपिटल एडिक्वेसी) मौजूद है।
2. यह घोटाला किन खातों के साथ हुआ है? यह घोटाला मुख्य रूप से हरियाणा सरकार के कुछ विभागों के विशेष खातों से संबंधित है, जो बैंक की चंडीगढ़ शाखा में थे। बैंक के अनुसार, इसका व्यापक ग्राहक आधार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।
3. क्या बैंक के डिजिटल सिस्टम या ऐप में कोई सेंधमारी हुई है? नहीं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह कोई डिजिटल फ्रॉड नहीं था। घोटाले को फर्जी चेक और फिजिकल ट्रांजैक्शन के जरिए अंजाम दिया गया था। बैंक ने स्पष्ट किया है कि उनके मुख्य बैंकिंग सिस्टम में कोई तकनीकी खराबी या एरर नहीं है।
4. इस घोटाले का पता कैसे चला? इस मामले का खुलासा तब हुआ जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना बैंक खाता बंद करने और बैलेंस ट्रांसफर करने का अनुरोध किया। जब बैंक ने मिलान किया, तो रिकॉर्ड में मौजूद राशि और सिस्टम में मौजूद राशि के बीच लगभग 590 करोड़ रुपये का अंतर पाया गया।
5. दोषियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है?
• बैंक ने चंडीगढ़ शाखा के चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है।
• मामले की स्वतंत्र जांच के लिए KPMG को फॉरेंसिक ऑडिट का जिम्मा सौंपा गया है।
• पुलिस में औपचारिक शिकायत (FIR) दर्ज कराई गई है और हरियाणा सरकार ने जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को सौंप दी है।
6. क्या इस घोटाले से बैंक बंद हो जाएगा या दिवालिया हो जाएगा? बिल्कुल नहीं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह 590 करोड़ रुपये की राशि बैंक की कुल नेटवर्थ का केवल 0.9% से 1% है। बैंक का परिचालन प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है और उसके पास पूंजी की कोई कमी नहीं है।
7. हरियाणा सरकार ने क्या कड़ा कदम उठाया है? हरियाणा सरकार ने तत्काल प्रभाव से IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक से सभी सरकारी लेनदेन और जमा रोक दिए हैं। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि भविष्य में सभी सरकारी खाते केवल राष्ट्रीयकृत (Nationalized) बैंकों में ही खोले जाएंगे।
8. बैंक के शेयरों में भारी गिरावट क्यों आई? घोटाले की खबर सार्वजनिक होने के बाद निवेशकों में चिंता फैल गई, जिससे स्टॉक एक ही दिन में 16% से 20% तक गिर गया। ब्रोकरेज फर्मों का अनुमान है कि इससे वित्त वर्ष 2026 के मुनाफे पर करीब 20-22% का असर पड़ सकता है, जिसके कारण बाजार में घबराहट देखी गई।
9. क्या मुझे अपनी एफडी (FD) या बचत खाता दूसरे बैंक में ट्रांसफर कर लेना चाहिए? बैंक और नियामक (RBI) दोनों ने पुष्टि की है कि यह एक शाखा-विशिष्ट धोखाधड़ी है न कि पूरे बैंक की विफलता। बैंक का सामान्य कामकाज और ग्राहकों को दी जाने वाली सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी।
10. आगे क्या उम्मीद की जा सकती है? बैंक अब अन्य बैंकों के लिंक्ड खातों से रिकवरी (वसूली) करने की कोशिश कर रहा है। फॉरेंसिक ऑडिट की रिपोर्ट आने के बाद ही घोटाले की पूरी कार्यप्रणाली और इसमें शामिल सभी लोगों का खुलासा हो पाएगा।

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