FAQs, सरकारी और प्राइवेट कर्मचारियों के लिए नए कानून से संबंधित पूछे गए प्रश्नों के उत्तर

Updesh Awasthee
नई दिल्ली, 5 फरवरी 2026
: केंद्र सरकार ने देश के श्रम क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए चार नई श्रम संहिताओं (Labour Codes) को पूरी तरह से लागू कर दिया है। ये संहिताएं 21 नवंबर 2025 से प्रभावी हो चुकी हैं, जिनका उद्देश्य संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों को मिलने वाली सुरक्षा को और अधिक मजबूत करना है। राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने इन सुधारों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की। इस रिपोर्ट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं: 

1. Universalization of wages and social security

• अब सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी और वेतन के समय पर भुगतान को एक वैधानिक अधिकार बना दिया गया है।
• सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाते हुए इसमें गिग (gig) और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी शामिल किया गया है।
• कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) का कवरेज अब 10 या अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों के लिए अनिवार्य होगा। वहीं, 10 से कम कर्मचारियों वाले संस्थान स्वैच्छिक आधार पर इसे अपना सकते हैं। यदि कोई संस्थान खतरनाक प्रक्रियाओं में शामिल है, तो वहां एक कर्मचारी होने पर भी यह कवरेज अनिवार्य है।
• कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के प्रावधान अब उन सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होंगे जहां 20 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं।

2. Special provisions for the unorganized sector

• असंगठित श्रमिकों, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए कल्याणकारी योजनाएं बनाने हेतु एक विशेष 'सोशल सिक्योरिटी फंड' (Social Security Fund) की स्थापना की जाएगी।

3. Safety and health at work

• सभी श्रमिकों के लिए सुरक्षित और स्वस्थ कार्य परिस्थितियों का प्रावधान किया गया है।
• अब सभी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र (Appointment Letters) देना और उनकी वार्षिक स्वास्थ्य जांच (Annual Health Check-up) कराना अनिवार्य होगा।

4. Equal opportunities for women

• नए कानूनों के तहत महिलाओं को सभी प्रकार के कार्यों और प्रतिष्ठानों में काम करने की अनुमति दी गई है। वे रात में भी काम कर सकेंगी, बशर्ते उनकी सहमति ली गई हो और उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों।

5. Relief for migrant workers and laid-off employees

• अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिक की परिभाषा को व्यापक बनाया गया है, जिसमें अब ठेकेदार के माध्यम से आने वाले और स्वयं पलायन करने वाले (Self-migrated) श्रमिक भी शामिल हैं। उन्हें अब वार्षिक एकमुश्त यात्रा भत्ता और लाभों की पोर्टेबिलिटी की सुविधा मिलेगी।
• छंटनी किए गए श्रमिकों के कौशल विकास के लिए 'वर्कर्स री-स्किलिंग फंड' (Workers’ Re-Skilling Fund) का प्रावधान भी किया गया है।
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