भोपाल समाचार, 5 फरवरी 2026: मध्य प्रदेश के नीमच जिले में काम करने वाली आंगनवाड़ी में कार्यरत कंचन बाई मेघवाल की शहादत को मुख्यमंत्री के माध्यम से सम्मान मिला है। डॉ मोहन यादव ने कहा कि कंचन ने 20 बच्चों को बचाने के संघर्ष में अपनी जान दे दी। अब उनके बच्चों की जिम्मेदारी सरकार की है। हम उनके पालन पोषण में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
मध्य प्रदेश सरकार कंचन के परिवार के साथ है, मुख्यमंत्री ने कहा
डॉक्टर मोहन यादव ने अपने स्टेटमेंट में कहा है कि, नीमच जिले के ग्राम रानपुर में मधुमक्खियों के डंक से आंगनवाड़ी में कार्यरत बहन कंचन बाई मेघवाल जी का असमय निधन अत्यंत दुखद व हृदयविदारक है। प्रदेश सरकार इस दुःख की घड़ी में उनके परिवार के साथ है। इस घटना में मानवीय आधार पर मैंने कंचन बहन के परिवार को ₹4 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिये हैं। उनके बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी राज्य सरकार उठाएगी।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शहीद कंचनबाई मेघवाल की कहानी
यह दिल दहला देने वाली कहानी है, एक महिला की वीरता का प्रमाण है, जिसने करीब 20 बच्चों की जान बचाते हुए अपनी जान दे दी। कंचनबाई आर्मी में नहीं थी लेकिन उसका बलिदान किसी सिपाही से काम नहीं है। कंचन बाई मेघवाल मध्य प्रदेश के नीमच जिले के रानपुर गांव में आंगनवाड़ी केंद्र में रसोईया (Cook) के रूप में कार्यरत थीं। वे जय माता दी स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष भी थीं और गाँव में बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन तैयार करती थीं। उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। उनके पति शिवलाल गंभीर रूप से पैरालिसिस (लकवे) से प्रभावित हैं और काम नहीं कर पाते। कंचन बाई ही घर की एकमात्र कमाई थीं।
मधुमक्खियों के झुंड ने अचानक बच्चों पर हमला कर दिया
कंचनबाई मेघवाल के ऊपर के तीन बच्चों (एक बेटा, दो बेटियाँ) की भी जिम्मेदारी थी। दिनांक 2 फरवरी 2026 को रानपुर गांव, Madavada पंचायत के आंगनवाड़ी केंद्र के पास दोपहर के समय जब लगभग 20 बच्चे खेल रहे थे, तभी पास के पेड़ पर जमा एक बड़ा मधुमक्खियों के झुंड ने अचानक बच्चों पर हमला कर दिया। यह बेहद खतरनाक स्थिति थी। बच्चे चीख पुकार करने लगे। हम सब जानते हैं कि ऐसी स्थिति में कुछ बच्चों की मृत्यु निश्चित थी लेकिन कंचन बाई एक जांबाज सिपाही की तरह मधुमक्खियों के हमले का सामना करने के लिए आई। उसने तिरपाल और चटाई के माध्यम से बच्चों को मधुमक्खियों से बचाने का काम किया।
मधुमक्खियों के सैकड़ो डंक कंचन के शरीर में घुस चुके थे
बच्चों को सुरक्षित करने की प्रक्रिया के दौरान मधुमक्खियों ने कंचन पर हमला कर दिया। वह लगातार मधुमक्खियों का हमला सहन करती रही लेकिन उसने बच्चों को सुरक्षित किया। कंचन के इस प्रयास के कारण एक भी बच्चा घायल नहीं हुआ लेकिन मधुमक्खियों के सैकड़ो डंक कंचन के शरीर में घुस चुके थे। जब ग्रामीण और पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे, तब तक कंचन बाई गंभीर हालत में जमीन पर गिर चुकी थीं। डायल 112 के आरक्षक कालूनाथ और राजेश राठौर ने उन्हें तुरंत सरवानिया स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की कोशिश की, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
वीरांगना कंचन बाई अमर रहे
कंचन बाई मेघवाल की कहानी केवल एक समाचार नहीं है। यह मानवता, मातृत्व और आत्म-बलिदान की मिसाल है। उनकी वीरता ने यह दिखाया कि सच्ची बहादुरी वह है जो दूसरों की जान सुरक्षित करने के लिए अपनी खुद की जान न्योछावर कर दे। मध्य प्रदेश के 30 लाख सुधी नागरिकों का भोपाल समाचार परिवार, वीरांगना कंचन बाई की शहादत को प्रणाम करता है।

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