केंद्रीय कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट से झटका, central government employees news

Updesh Awasthee
नई दिल्ली, 5 फरवरी 2026
: केंद्रीय कर्मचारियों को आज सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय कर्मचारियों की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें राज्य सरकार की एंटी करप्शन ब्यूरो की कार्रवाई को अनाधिकृत और गलत बताया गया था। 

केंद्रीय कर्मचारी बनाम राजस्थान एसीबी मामला

मामला राजस्थान का है, आपको तो याद भी होगा। राजस्थान एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने एक केंद्रीय कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया था। यह मामला राजस्थान के हाईकोर्ट तक पहुंचा था। केंद्रीय कर्मचारियों का कहना था कि एंटी करप्शन ब्यूरो, राज्य सरकार के अधीन काम करता है और उसको केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है। केंद्रीय कर्मचारियों पर कार्रवाई के लिए CBI इत्यादि एजेंसियां पहले से सक्रिय हैं। मामला क्षेत्राधिकार का है। तब राजस्थान हाई कोर्ट ने अपने जजमेंट में कहा था कि किसी भी राज्य की कोई भी एजेंसी उसे राज्य में पदस्थ केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच और FIR दर्ज कर सकती है। इसके लिए स्टेट गवर्नमेंट की एजेंसी को CBI से किसी भी प्रकार की अनुमति या समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता नहीं है। 

केंद्रीय कर्मचारियों की रिश्वतखोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट का लैंडमार्क जजमेंट

राजस्थान हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस एस.सी. शर्मा की खंडपीठ ने सभी पक्षों की सुनवाई के बाद आज इस मामले में फाइनल डिसीजन दिया है। सुप्रीम कोर्ट के विद्वान न्यायाधीशों ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 17-ए का संरक्षण रिश्वत के मामलों में नहीं दिया जा सकता।“धारा 17-A एक विशेष उद्देश्य से लाई गई है। यह उन अपराधों पर लागू होती है जो लोक सेवक द्वारा अपने आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में लिए गए निर्णय या दी गई सिफारिशों से संबंधित हों। अवैध रिश्वत की मांग के मामलों में धारा 17-A किसी भी तरह से लागू नहीं हो सकती।”

भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्य सरकार की एजेंसी को बड़ी पावर मिली

याचिकाकर्ता केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ राजस्थान में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 7 ए के तहत मामला दर्ज किया गया था। कर्मचारी की दलील थी कि केंद्र सरकार की अनुमति के बिना उसके खिलाफ ना तो कोई जांच हो सकती है और ना ही कोई मामला दर्ज किया जा सकता है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17 ए के तहत ऐसा प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया की रिश्वत के मामले में धारा 171 के तहत संरक्षण नहीं दिया जा सकता। किसी भी राज्य की पुलिस केंद्र सरकार के किसी भी कर्मचारी के खिलाफ स्वतंत्रता पूर्वक जांच भी कर सकती है और मामला भी दर्ज कर सकती है। 

पब्लिक केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ कहीं पर भी शिकायत कर सकती है
इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट ने, राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले को सही माना और केंद्रीय कर्मचारियों की याचिका को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब पूरे देश में, राज्य सरकार की एजेंसी, सुप्रीम कोर्ट के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती हैं और लोग अपने राज्य सरकार की एजेंसी से भी केंद्रीय कर्मचारियों की शिकायत कर सकते हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने वाली राज्य सरकार की एजेंसी (लोकायुक्त अथवा एंटी करप्शन ब्यूरो, जिस राज्य में जो भी नाम हो) केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत लेने से मन नहीं कर सकती। 
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