भोपाल, 14 फरवरी 2026: राज्य शासकीय कर्मचारी अधिकार संरक्षण संघ ने निराकरण में उच्च न्यायालयों एवं विभिन्न न्यायपालिकाओं में शासकीय सेवकों द्वारा शासन विरुद्ध सेवा मामलों के लंबित 65% सेवा मामलों व निरंतर हो रही वृद्धि, वही कागजी बनकर रह गई "राज्य मुकदमा नीति 2018" हेतु सरकार के विभाग एवं कार्यालय प्रमुखों को जिम्मेदार करार दिया है।
संगठन प्रमुख सर्वश्री शील प्रताप सिंह पुंढीर, महासचिव व्यास मुनि चौबे, डॉक्टर देवीसिंह सनोदिया आदि कर्मचारी नेताओं ने जारी संयुक्त बयान में हाल ही में, माननीय उच्च न्यायालय खंडपीठ जबलपुर द्वारा न्यायालयों के समक्ष अत्यधिक संख्या में 65% प्रकरण सेवा मामलों के ही होने पर, लिए गए संज्ञान ओर आपत्ति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि जब सरकारी विभागों द्वारा नीति नियमों व प्रावधानों की अनदेखी द्वारा पूर्णतः ठप्प कर दिए गए "कर्मचारी कल्याण कार्यक्रमों" एवं कर्मचारी हितों की अनदेखी समस्याओं के निराकरण में अपनाए जा रहे उदासीनता पूर्ण रवैया के कारण शासकीय सेवकों का सरकार से भरोसा समाप्त होने का दुष्परिणाम है कि शासकीय सेवक अपने व्यापक हितों व न्यायोचित मामलों को लेकर सरकार से नाउम्मीद एवं विवश होकर न्याय हेतु विभिन्न न्यायपालिकाओं का रुख कर रहे हैं।
फिर भी सरकारी नीतियों एवं सेवको के पक्ष में जारी अनेकों न्यायादेश पालन, नौकरशाही के समक्ष बेबस ओर लाचार है।
नकारात्मक रुख अपनाए प्रतिप्रार्थी बने सरकारी अधिकारी अपनी पूरी ताकत झोंककर सरकारी धन का दुरुपयोग "सेवकों को प्राप्त न्याय को रोकने हेतु" निचली अदालतों से लेकर सर्वोच्च न्यायपालिकाओं तक अपील पे अपील व अनेकों अवमानना प्रकरणों का सामना कर रहे है । जबकि सरकार द्वारा लागू राज्य मुकदमा नीति 2018 के प्रावधानों के विरुद्ध सेवा मामलों का हल विभागीय स्तर पर न किया जाने के कारण ही सेवा मामले न्यायालयों तक पहुंच रहे है ये राज्य नौकरशाही की लापरवाह रवैए का परिणाम है। जिसके संबंध में शीघ्र संगठन राज्य के मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन एवं प्रमुख सचिव विधि एवं विधाई विभाग से भेंट कर लोक सेवकों के न्यायिक हितों का पालन सख्तीपूर्वक कराए जाने की मांग की जाएगी। रिपोर्ट: शोएब सिद्दीकी, प्रदेश प्रवक्ता।

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