Winter Olympics खतरे में, खेलने के लिए बर्फ नहीं बची, जानिए 70 साल में इटली कितनी बदल गई

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निशांत सक्सेना, 22 जनवरी 2026
: आज हम बात करेंगे उस संकट की जो न केवल खेल जगत को प्रभावित कर रहा है, बल्कि हमारी बदलती धरती की एक चिंताजनक तस्वीर भी पेश कर रहा है। आज हम जानेंगे कि 70 साल में इतनी की हालत कितनी बदल गई और क्यों विंटर ओलंपिक्स के लिए इटली में बर्फ नहीं बची।

2026 विंटर ओलंपिक: बर्फ़ और गर्मी के बीच एक महासंग्राम

फ़रवरी 2026 में जब इटली के मिलान और कॉर्टीना द’आम्पेज़ो में विंटर ओलंपिक का आगाज़ होगा, तो दुनिया की नज़रें सिर्फ़ पदकों पर नहीं, बल्कि वहां की बदलती जलवायु पर भी होंगी। सूत्रों के अनुसार, यह आयोजन अब केवल एथलीटों की प्रतिस्पर्धा नहीं रह गया है, बल्कि यह बर्फ़ और बढ़ती गर्मी के बीच एक सीधा मुक़ाबला बन चुका है।

यहाँ कुछ चौंकाने वाले तथ्य हैं जो सामने आए हैं:

• बढ़ता तापमान और घटती बर्फ़: कॉर्टीना द’आम्पेज़ो, जिसने 1956 में भी खेलों की मेज़बानी की थी, आज वैसा नहीं रहा। पिछले 70 वर्षों में यहाँ फ़रवरी का औसत तापमान 3.6 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। पहले जहाँ तापमान माइनस 7 डिग्री रहता था, अब वह शून्य के करीब पहुँच गया है, जिससे बर्फ़ की गहराई में 15 सेंटीमीटर की कमी आई है।

• कृत्रिम बर्फ़ का सहारा: प्राकृतिक बर्फ़ की कमी के कारण, इटली को 2026 के खेलों के लिए 30 लाख क्यूबिक यार्ड से ज़्यादा कृत्रिम बर्फ़ तैयार करनी पड़ेगी। यह न केवल लागत बढ़ाता है, बल्कि गीली और असमान सतह के कारण खिलाड़ियों की सुरक्षा और चोट लगने के जोखिम को भी बढ़ा देता है।

• एक वैश्विक संकट: यह समस्या सिर्फ़ इटली तक सीमित नहीं है। 1950 के बाद से विंटर ओलंपिक की मेज़बानी करने वाले 19 शहर औसतन 2.7 डिग्री सेल्सियस ज़्यादा गर्म हो चुके हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि 2050 तक दुनिया के केवल एक-चौथाई शहर ही विंटर पैरालंपिक की मेज़बानी के लिए उपयुक्त बचेंगे।

खिलाड़ियों पर असर और भविष्य की चेतावनी

इस जलवायु संकट ने खिलाड़ियों की तैयारी को भी प्रभावित किया है। एथलीट अब "बर्फ़ की तलाश" में एक देश से दूसरे देश भटकने को मजबूर हैं, क्योंकि यूरोप और अमेरिका में स्की सीज़न छोटे होते जा रहे हैं। हाल के वर्षों में कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएँ केवल इसलिए रद्द करनी पड़ीं क्योंकि वहां पर्याप्त बर्फ़ नहीं थी।

हालाँकि अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति का लक्ष्य है कि 2030 तक खेल "क्लाइमेट पॉज़िटिव" हों, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त यह है कि अगर वैश्विक तापमान इसी तरह बढ़ता रहा, तो भविष्य में विंटर ओलंपिक का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है। सदी के अंत तक शायद हमें बिना बर्फ़ के विंटर ओलंपिक देखने पड़ें।

2026 के ये खेल हमारे लिए एक चेतावनी हैं कि हम जलवायु संकट को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं।
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