राजेश जयंत, लखनऊ, 27 जनवरी 2026: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से प्रशासनिक और सामाजिक विवाद ने नई जोर पकड़ लिया है। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट रहे अलंकार अग्निहोत्री ने 26 जनवरी को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन अब सरकार ने उन्हें उनके सरकारी पद से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी है। इस्तीफे से लेकर सस्पेंशन तक का पूरा घटनाक्रम अब प्रशासन, राजनीति और सामाजिक विमर्श का केंद्र बन गया है।
प्रशासन और सरकार के बीच टकराव
अग्निहोत्री ने कहा कि उन्होंने इस्तीफा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों और प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई घटना के विरोध में दिया। इस्तीफे के बाद उन्होंने दावा किया कि उन्हें बरेली के जिलाधिकारी के सरकारी आवास में बंधक बनाकर रोका गया, उनके साथ अभद्र व्यवहार हुआ और उन्होंने अपनी जान को खतरा महसूस किया। इन आरोपों ने प्रशासन और सरकार के बीच सीधा टकराव खड़ा कर दिया है।
इस्तीफे की पृष्ठभूमि
● अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि यूजीसी के नए नियम सामान्य वर्ग के मेधावी छात्रों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार को बढ़ावा देंगे और शिक्षा में निष्पक्षता को कमजोर करेंगे। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था शिक्षा के मूल तत्त्वों के विरोध में है तथा सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ असमान व्यवहार को बढ़ावा दे सकती है। उन्होंने इस बदलाव का सीधा असर सामाजिक संतुलन और शिक्षा अधिकारों पर पड़ने की बात कही।
● उसी संदर्भ में उन्होंने प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ कथित दुर्व्यवहार का उदाहरण देते हुए इसे सांस्कृतिक और धार्मिक सम्मान पर हमला बताया और कहा कि ऐसे मुद्दों के खिलाफ आवाज उठाना उनका संवैधानिक अधिकार है।
डीएम आवास में बंधक बनाए जाने का दावा
इस्तीफा देने के बाद अग्निहोत्री ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्हें बरेली के जिलाधिकारी के सरकारी आवास में बुलाया गया और करीब एक से दो घंटे तक रोका गया। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्हें इस्तीफा वापस लेने का दबाव डाला गया और अपमानजनक भाषा का उपयोग हुआ। उन्होंने कहा कि इस अनुभव के कारण उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता हुई।
‘ब्राह्मण विरोधी अभियान’ के आरोप
अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में सुनियोजित तरीके से ब्राह्मण समाज और सामान्य वर्ग को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में ब्राह्मण समाज से जुड़े कई लोगों के साथ हिंसा, अत्याचार और कथित भेदभाव की घटनाएं सामने आई हैं, जो एक व्यापक मानसिकता को दर्शाती हैं।
उन्होंने कहा कि यह किसी एक घटना का हिस्सा नहीं बल्कि एक व्यवस्थागत समस्या है और इस पर समाज और सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
बरेली के जिलाधिकारी ने सिटी मजिस्ट्रेट के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने कहा कि किसी तरह का बंधक बनाना या धमकी देना गलत है और अधिकारियों की मौजूदगी में बातचीत सामान्य माहौल में हुई थी। उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान चाय भी पी गई और केवल इस्तीफे के पीछे के कारणों को समझने की कोशिश की गई।
प्रदेश सरकार ने अग्निहोत्री को उनके पद से निलंबित कर दिया है और विभागीय स्तर पर जांच शुरू कर दी है ताकि आरोपों की सत्यता का पता लगाया जा सके और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
कौन हैं अलंकार अग्निहोत्री
अलंकार अग्निहोत्री उत्तर प्रदेश प्रांतीय सिविल सेवा (UP PCS) के एक अधिकारी हैं। प्रशासनिक सेवा में उन्हें तेज, मुखर और वैचारिक अधिकारी के रूप में जाना जाता रहा है। बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के रूप में उनकी तैनाती के दौरान उन्होंने कई संवेदनशील मामलों में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
मामला अब कहां खड़ा है
इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की राजनीति, प्रशासन और सामाजिक विमर्श को झकझोर दिया है। एक ओर सिटी मजिस्ट्रेट के आरोप हैं, दूसरी ओर प्रशासन का तर्क। मामला अब सिर्फ एक अधिकारी के इस्तीफे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षा नीति, समाजिक संतुलन, प्रशासनिक स्वायत्तता और संवैधानिक अधिकारों जैसे बड़े सवालों से जुड़ गया है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना रखता है।

