भोपाल समाचार, 30 जनवरी 2026: केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी काफी Manipulative पॉलिटिशियन हैं। पाञ्चजन्य के कार्यक्रम में अटल जी को इस प्रकार से "मेरे अपने" कह रहे हैं जैसे, पारिवारिक रिश्ता था, जयविलास पैलेस के लिए काम करते थे।
— Adhiraj Awasthi (@AdhirajOnline) January 30, 2026जबकि वास्तविकता यह है कि अटल जी और राजमाता, पार्टी के दो ध्रुव थे। जब जिसको मौका मिला उसने दूसरे को मजा चखाया। अटल जी के कारण पार्टी के संविधान में राजमाता का एजेंडा सेट नहीं हो पाया था और राजमाता के कारण अटल जी को ग्वालियर छोड़ना पड़ा। यदि राजनीति की यह कहानी आपको नहीं पता तो पढ़िए...
राजमाता ने अटल जी के खिलाफ पर्चे बंटवाए थे
जब भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हो रही थी तब विचारधारा को लेकर राजमाता विजयाराजे सिंधिया और श्री अटल बिहारी वाजपेई के विचारों में काफी अंतर था। राजमाता ने खुले मैदान में मोर्चाबंदी कर दी थी और बाद में अटल जी ने अपने वीडियो का इस्तेमाल करके राजमाता की मुहिम पर पानी फेर दिया था। भरोसा नहीं होता तो बीबीसी की यह विवेचना खुद देख लीजिए:-
राजमाता के कारण अटल जी, ग्वालियर का चुनाव हार गए थे
1984 में राजमाता ने आग्रह करके अटल जी को ग्वालियर से चुनाव लड़ने के लिए बुलाया। फिर अंतिम क्षणों में अचानक उनके पुत्र माधवराव सिंधिया ने अटल जी के खिलाफ पर्चा भर दिया। इस बात को लेकर राजमाता और माधवराव के बीच तनाव की खबरें आती रही, और चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में राजमाता ने भारतीय जनता पार्टी के मंच से अटल जी के समर्थन में भाषण दिया। जाते समय जनता का हाथ जोड़कर अभिवादन करने के स्थान पर हाथ का पंजा (माधवराव सिंधिया का चुनाव चिन्ह) दिखाते हुए सिर्फ इतना कहा कि, यह हमारी प्रतिष्ठा का प्रश्न है। जनता समझ गई, और अटल जी ग्वालियर से चुनाव हार गए। इसके बाद अटल जी फिर कभी ग्वालियर नहीं लौटे।

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