MP हाईकोर्ट का अहम फैसला: जनशिक्षक पद पर प्रतिनियुक्ति निरस्त करने के आदेश पर रोक

जबलपुर, 10 जनवरी 2026:
शिक्षा क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए एक राहत भरी खबर आई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जनशिक्षक पद पर तैनात नरेंद्र प्रताप त्रिपाठी की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके पक्ष में आदेश जारी किया है। कोर्ट ने उनकी प्रतिनियुक्ति निरस्त करने के आदेश पर रोक लगा दी है और अभ्यावेदन के निराकरण तक उन्हें उसी पद पर काम जारी रखने की इजाजत दी है। यह फैसला न सिर्फ याचिकाकर्ता के लिए बल्कि ऐसे कई शिक्षकों के लिए उम्मीद की किरण बन सकता है जो सरकारी आदेशों से प्रभावित हो रहे हैं।

याचिकाकर्ता नरेंद्र प्रताप त्रिपाठी वर्तमान में जन शिक्षा केंद्र, शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बरगी बरखेड़ा, जिला जबलपुर में जनशिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। उनके अधिवक्ता सत्येंद्र ज्योतिषी ने कोर्ट को बताया कि 11 दिसंबर 2025 को कार्यालय कलेक्टर, जिला शिक्षा केंद्र जबलपुर ने एक आदेश जारी कर उनकी प्रतिनियुक्ति निरस्त कर दी थी और उन्हें मूल विभाग जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में वापस भेज दिया था। लेकिन त्रिपाठी को इस पद पर नियुक्त हुए अभी चार साल पूरे नहीं हुए हैं। उनकी प्रतिनियुक्ति 7 जून 2023 को अध्यापक पद से शासकीय कन्या विद्यालय बरखेड़ा से जनशिक्षक पद पर शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बरगी, तहसील मझोली में की गई थी।

अधिवक्ता ने यह भी जोड़ा कि जहां त्रिपाठी कार्यरत थे, वहां आज भी जनशिक्षक का पद खाली है और किसी अन्य की नियुक्ति नहीं हुई है। मिड सेशन चल रहा है, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है और त्रिपाठी ने इस संबंध में अभ्यावेदन भी प्रस्तुत किया है, लेकिन उसका निराकरण अभी तक नहीं हुआ। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए माननीय न्यायाधीश जस्टिस विशाल धगत ने प्रकरण की गंभीरता को देखा और जिला परियोजना कोऑर्डिनेटर जबलपुर समेत अन्य अधिकारियों को आदेश दिया कि याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन का निराकरण जल्द से जल्द करें। तब तक त्रिपाठी जनशिक्षक पद पर बरगी में काम करते रहेंगे।

इस केस में याचिकाकर्ता का पक्ष अधिवक्ता सत्येंद्र ज्योतिषी और अभिषेक मिश्रा ने मजबूती से रखा। यह फैसला शिक्षकों की job security और administrative decisions के बीच balance को highlight करता है, जहां employees की personal और professional life को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में कोर्ट का intervention जरूरी हो जाता है ताकि न्याय मिल सके और शिक्षा जैसा sensitive क्षेत्र प्रभावित न हो।

अगर हम संबंधित अन्य समाचारों की बात करें तो हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारियों से जुड़े कई मामलों में फैसले दिए हैं, जैसे प्रोबेशन पीरियड में पूरा वेतन देने का अधिकार, जो लगभग 70 हजार employees को लाभ पहुंचा सकता है। हालांकि इस स्पेसिफिक केस पर X प्लेटफॉर्म पर पिछले 24 घंटों में कोई प्रमुख प्रतिक्रियाएं नहीं दिखीं, लेकिन शिक्षा और सरकारी नौकरियों से जुड़े मुद्दों पर यूजर्स अक्सर अपनी राय शेयर करते हैं।

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