MP karmchari news: हाई कोर्ट में प्रमोशन में आरक्षण मामला, अजाक्स ने पक्ष प्रस्तुत किया

Updesh Awasthee
जबलपुर, 6 जनवरी 2026
: मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन में आरक्षण के मामले में, मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए आरक्षण के नियमों की संवैधानिकता को चुनौती देने वाले प्रकरणों की आज दिनांक 06/01/26 को चीफ जस्टिस श्री संजीव सचदेवा एवं विनय सराफ की खंडपीठ द्वारा दोपहर 12:00 बजे से 1:30 बजे तक अजाक्स संगठन का पक्ष सुना। 

अजाक्स क्या अधिवक्ताओं ने वह गड़बड़ी बताई जो याचिका में लिखी ही नहीं थी

अजाक्स संघ की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. के. एस. चौहान एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया कि प्रमोशन नियम 2025 के नियम 11(1,2,3) सहित अन्य नियम पूर्णतः असंवैधानिक हैं क्योंकि उक्त नियम सर्वप्रथम आरक्षित वर्ग की ग्रेडेशन लिस्ट बनाने का प्रावधान करते हैं तथा आरक्षित वर्ग के कर्मचारी जो मेरिट के आधार पर पदोन्नति हुए हैं उनको भी आरक्षित वर्ग में गणना करने का प्रावधान करता है। अर्थात् एससी एसटी वर्ग के लिए मेरिट पर प्रमोशन से संबंधित कोई भी प्रावधान नियमों में मौजूद नहीं है, जबकि भारत का संविधान एवं सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी के जजमेंट सहित कई फैसले हैं जो स्पष्ट रूप से प्रावधान करते हैं कि सर्वप्रथम अनारक्षित वर्ग में प्रमोशन होंगे तत्पश्चात् आरक्षित वर्ग के एवं जो कर्मचारी मेरिट के आधार पर अनारक्षित में चयनित होंगे उनकी गणना आरक्षित वर्ग में किए जाने का उक्त नियमों में प्रावधान है जो कि पूर्ण रूप से सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के प्रतिकूल है। 

हाईकोर्ट ने कहा अपनी अपनी याचिका एडिट करके लाइए

तब हाई कोर्ट द्वारा पूछा गया कि जब नियमों में इतनी बड़ी त्रुटि है तो आपने चैलेंज क्यों नहीं किया? तो अजाक्स संघ की ओर से कहा गया कि संघ नहीं चाहता है कि न्यायिक प्रक्रिया के कारण प्रमोशन बाधित हो, फिर भी हाई कोर्ट द्वारा अजाक्स संघ को सजेस्ट किया कि आपके द्वारा नियमों के प्रवर्तन करने हेतु दायर याचिका में आवश्यक संशोधन करें, तब अजाक्स संघ की ओर से कहा गया कि उपरोक्त याचिकाओं में उक्त नियम ऑलरेडी चैलेंज हैं जिसे माननीय न्यायालय स्वविवेक से सुप्रीम कोर्ट के मार्गदर्शी सिद्धांतों के अनुरूप नियमों में असंवैधानिकता को दूर करने हेतु सरकार को निर्देशित कर सकती है।

अजाक्स संघ की ओर से आगे अपने तर्क में कोर्ट को अवगत कराया गया कि प्रमोशन के नियमों में क्रीमीलेयर न तो सिद्धांत के रूप से और न ही व्यवहारिक रूप से लागू किया जा सकता है और न ही उक्त संबंध में कोई संवैधानिक प्रावधान है। अजाक्स संघ की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया कि मध्य प्रदेश के समस्त विभागों में मौजूद कर्मचारियों के प्रस्तुत डाटा के मुताबिक आरक्षित वर्ग का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है, याचिकाकर्ताओं ने जो डाटा पेश किया है उसमें उन सभी आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों की गणना कर ली गई है जो मेरिट के आधार पर अनारक्षित पदों के विरुद्ध पदोन्नति हुए हैं।

अधिवक्ता श्री रामेश्वर सिंह ठाकुर का कहना है कि, वास्तविक रूप से देखा जाए तो एससी एसटी की कुल आबादी मध्य प्रदेश में 36% है जिनका उच्च पदों पर प्रतिनिधित्व 7 से 18 प्रतिशत ही है। अजाक्स संघ द्वारा दायर याचिका में उक्त असंवैधानिक नियमों में आवश्यक संशोधन करने हेतु संशोधन याचिका दाखिल की जाएगी। अजाक्स संघ की शेष बहस आगामी 13 जनवरी 2026 को होगी। अजाक्स संघ एवं एससी एसटी कर्मचारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉक्टर के. एस. चौहान, वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह, पुष्पेंद्र कुमार शाह, उदय कुमार ने पक्ष रखा।

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