Madhya Pradesh के सभी जिलों में पशु कल्याण सम‍ित‍ियों का गठन करें: श्री लखन पटेल, पशुपालन मंत्री

भोपाल, 6 जनवरी, 2026
: मध्य प्रदेश के सभी जिलों में पशु कल्याण सम‍ित‍ियों के गठन हेतु मध्य प्रदेश सरकार के पशुपालन मंत्री श्री लखन पटेल द्वारा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। श्री पटेल आज मंत्रालय स्थित अपने कक्ष में मध्‍यप्रदेश राज्‍य पशु कल्‍याण सलाहकार मंडल के सदस्‍यों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। 

कामधेनु और स्वावलंबी गौशाला के क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा

बैठक के दौरान राज्‍यमंत्री श्री पटेल ने विभाग द्वारा संचालित डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना एवं स्वावलंबी गोशाला निवास नीति-2025 के क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने योजनाओं के प्रभावी संचालन, गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा पशुपालकों को अधिकाधिक लाभ पहुंचाने के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव श्री उमाकांत उमराव, संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग डॉ. पी.एस. पटेल सहित मध्‍यप्रदेश राज्‍य पशु कल्‍याण सलाहकार मंडल के सदस्‍य उपस्‍थि‍त रहे। 

प्रदेश का कुल दुग्ध उत्पादन 22.60 मिलियन मीट्रिक टन

बैठक में प्रमुख सचिव श्री उमाकांत उमराव ने जानकारी दी कि 20वीं पशु संगणना के अनुसार प्रदेश में कुल 187.52 लाख गौवंशीय पशु हैं, जो देश में तीसरे स्थान पर है। प्रदेश में देश के कुल गौवंश का 9.73 प्रतिशत हिस्सा है। इसी प्रकार प्रदेश में 103.07 लाख भैंसवंशीय पशु हैं, जो देश में चौथे स्थान पर है तथा देश के कुल भैंसवंश का 9.38 प्रतिशत मध्यप्रदेश में है। प्रदेश का कुल दुग्ध उत्पादन 22.60 मिलियन मीट्रिक टन है, जिसमें प्रदेश का देश में तीसरा स्थान है। प्रदेश में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन दुग्ध उपलब्धता 707 ग्राम है, जो कि राष्ट्रीय औसत 485 ग्राम से अधिक है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम अंतर्गत प्रदेश के गौ-भैंसवंशीय पशुओं में एफएमडी (खुरपका-मुंहपका) टीकाकरण किया गया है। साथ ही प्रदेश के 3 लाख 83 हजार पशुपालकों को किसान क्रेडिट कार्ड प्रदान किए गए हैं।

दूसरे चरण में अब तक 6 लाख से अधिक पशुपालकों से की गई भेंट

प्रमुख सचिव श्री उमराव ने बताया कि प्रदेश में किसानों को पशु स्वास्थ्य, पशु पोषण एवं नस्ल सुधार की जानकारी देने के लिए दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। अभियान का पहला चरण 3 से 9 अक्टूबर 2025 के बीच संचालित किया गया था, जबकि दूसरा चरण 17 दिसंबर 2025 से प्रारंभ हुआ है। अब तक 6 लाख 20 हजार पशुपालकों के घर जाकर उन्हें पशु पोषण, नस्ल सुधार एवं पशु स्वास्थ्य के विषय में जागरूक किया जा चुका है। 

प्रदेश में तीन चरणों में क्षीरधारा ग्राम योजना का किया जाएगा क्र‍ियान्‍वयन

प्रदेश के कई ग्रामों में संस्थागत एवं व्यक्तिगत प्रयासों से नस्ल सुधार कार्यक्रम प्रभावी रूप से क्रियान्वित हो रहे हैं, जिससे पशुपालक उन्नत पशुपालन कर अधिक दुग्ध उत्पादन कर रहे हैं। ऐसे ग्रामों को आदर्श उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करने तथा अन्य ग्रामों को प्रेरित करने के उद्देश्य से क्षीरधारा ग्राम योजना लागू की जाएगी। इस योजना के माध्यम से दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने, उन्नत पशुपालन को प्रोत्साहित करने तथा पशु स्वास्थ्य एवं पोषण सुनिश्चित करते हुए ग्राम स्तर पर समग्र दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए पशुपालकों को जागरूक किया जाएगा। योजना को तीन वर्षों में चरणबद्ध रूप से क्रियान्वित किया जाएगा। इसके अंतर्गत जिलों के समस्त ग्रामों को पशुपालन के स्तर, उन्नत पशुपालकों की उपलब्धता, नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य, टीकाकरण एवं टैगिंग की स्थिति के आधार पर वर्गीकृत किया जाएगा।
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