Madhya Pradesh से राज्यसभा में कांग्रेस का कौन नेता जाएगा, किस समीकरण को साधा जाएगा

उपदेश अवस्थी, 14 जनवरी 2026
: मध्य प्रदेश से राज्यसभा में सदस्य श्री दिग्विजय सिंह की सीट खाली होने वाली है। अब कैलकुलेशन शुरू हो गए हैं कि, राज्यसभा में दिग्विजय सिंह की जगह मध्य प्रदेश का कौन सा नेता जाएगा। हाई कमान जानना चाहता है कि किस नेता को राज्यसभा का सदस्य बनाने में सबसे ज्यादा फायदा है। कांग्रेस के लिए काम करने वाले पत्रकारों ने नापतोल शुरू कर दी है। चलिए अपन भी पता लगाने की कोशिश करते हैं कि किसी नेता में कितना पोटेंशियल है:- 

राजा साहब की तीसरी पारी की संभावना

कभी राजा साहब तो कभी जमीन पर सोने वाले कांग्रेस के साधारण कार्यकर्ता, कभी मुस्लिम समाज के संरक्षक तो कभी 50000 पुजारी की आवाज उठाने वाले राज्यसभा सदस्य श्री दिग्विजय सिंह का व्यक्तित्व काफी कन्फ्यूजिंग हो गया है। तीसरी पारी के लिए उन्होंने काफी कोशिश की थी। संन्यास की उम्र में भी 6 महीने से पूरे प्रयास कर रहे थे, लेकिन पार्टी हाई कमान पर प्रेशर क्रिएट करने के लिए RSS का एक फोटो ट्वीट करके सब गुड गोबर हो गया। पावर मिलना तो दूर की बात, पार्टी में बने रहने के लाले पड़ गए थे। आखरी में राज्यसभा की सीट पर अपनी दावेदारी छोड़कर, बड़ी मुश्किल से बचे हैं। कुल मिलाकर आप श्री दिग्विजय सिंह को ना तो राज्यसभा की सीट मिलेगी और ना ही कांग्रेस पार्टी में कोई विशेष सम्मान मिलेगा। उन्होंने पार्टी के लिए इतना काम किया इसलिए वह बचे हुए जीवन कांग्रेस पार्टी के नेता बने रहेंगे। उनको पार्टी से निष्कासित नहीं किया गया है लेकिन यह स्पष्ट कर दिया गया है कि पार्टी की गतिविधियों में हस्तक्षेप नहीं करना है। इसलिए राजा साहब की तीसरी पारी की कोई संभावना नहीं है। दूसरी बड़ी दावेदारी छिंदवाड़ा से आती है:- 

कमलनाथ: बस थोड़ा सा सम्मान दिला दो 

कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय नेता, इंदिरा गांधी के तीसरे पुत्र और सोनिया गांधी के सबसे करीबी नेताओं में से एक कमलनाथ की हालत इन दोनों काफी खराब है। उन्होंने राजनीति में इतने पाप नहीं किया जितने कष्ट भोगने पड़ रहे हैं। एक जमाना था कमलनाथ के नाम से लोग चुनाव जीत जाते थे। पिछली बार वह अपने बेटे को तक नहीं जिता पाए। 2019 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, 2026 में मध्य प्रदेश के 230 में से एक विधायक हैं। एक समय था पार्टी का हर डिसीजन कमलनाथ से पूछ कर लिया जाता है। आज हालात यह कि पार्टी के डिजाइन कमलनाथ को बताए तक नहीं जाते। राजनीति में सक्रियता का अंतिम समय चल रहा है। बिना सहारे के वॉक नहीं कर पाते। चाहते हैं कि ऐसे समय में बस थोड़ा सा सम्मान मिल जाए। राज्यसभा की सीट मिल जाएगी तो सम्मान मिल जाएगा। 
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि, स्कूल में संजय गांधी के पीछे-पीछे घूमने वाले महेंद्र नाथ के बेटे को The Kamalnath बनाने वाली पार्टी को बदले में क्या मिलेगा? 

जीतू पटवारी और उमंग सिंघार के बारे में विचार करना ही गलत बात है क्योंकि दोनों युवा नेता की 2019 के विधानसभा चुनाव में सीएम कैंडिडेट के दावेदार हैं। हालात बिलकुल वैसी ही है जैसी कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच थी।

सज्जन सिंह वर्मा: दावेदारी तो है पर दमदारी नहीं है

सज्जन सिंह वर्मा कांग्रेस पार्टी के बड़े नेता हैं। अच्छी नॉलेज है और सब्जेक्ट को ठीक प्रकार से प्रेजेंट भी कर पाते हैं। फैशन थोड़े पुराने जमाने का है लेकिन जेनजी के साथ सेल्फी को बुरा नहीं मानते। कमलनाथ की छत्रछाया में राजनीति किया करते थे लेकिन आजकल अपनी आइडेंटिटी बना रहे हैं। दावेदारी तो ठीक-ठाक है परंतु कोई दमदारी नहीं है। सज्जन सिंह वर्मा वैसे भी विधायक हैं और 2019 की कथित कांग्रेस सरकार में मंत्री बनने वाले हैं। 

अजय सिंह राहुल: कुछ तो पोटेंशियल है

अजय सिंह राहुल, कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता अर्जुन सिंह के बेटे हैं और यही चिंता की बात भी है कि 70 वर्ष की आयु में भी उनकी पहचान उनके पिता से होती है। परिवारवाद की दृष्टि से देखें तो अजय सिंह राहुल की दावेदारी बनती है। कुछ पुराने पॉलिटिकल वादों की दृष्टि से देखें तो अजय सिंह, दिग्विजय सिंह के उत्तराधिकारी होते हैं। मध्य प्रदेश में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे हैं और शिवराज सिंह चौहान जैसे मुख्यमंत्री की कुर्सी हिला देने वाले काम भी कर चुके हैं। कुल मिलाकर अजय सिंह राहुल में जितना नेगेटिव है उतना पॉजिटिव भी है। सबसे बड़ा पोटेंशियल यह है कि एक इलाके पर आज भी उनका प्रभाव है। यदि राज्यसभा में भेजा तो यह प्रभाव बढ़ जाएगा। 2019 के चुनाव में जहां से वोट कम मिले थे, 2019 के चुनाव में वहां कांग्रेस का वोट प्रतिशत बढ़ जाएगा। 

डॉ गोविंद सिंह: बस एक नाम है

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में पूर्व गृहमंत्री डॉ गोविंद सिंह का नाम भी आता है। बड़े अच्छे नेता हैं। धुले हुए सफेद कपड़े पहनते हैं तो फोटो भी अच्छे आते हैं, लेकिन प्रॉब्लम यह है कि, डॉ गोविंद सिंह ने खुद कभी सपने में राष्ट्रीय राजनीति नहीं देखी। राहुल गांधी के पीछे हाथ बांध के खड़े रहेंगे, ऐसे गुण भी नहीं है। इसलिए बस पॉलिटिकल गॉसिप के लिए एक नाम ठीक-ठाक है। 

फूल सिंह बरैया: डबल मुनाफा वाली स्कीम

फूल सिंह बरैया काफी बढ़िया नाम है। दिग्विजय सिंह के नजदीकी हैं। हाल ही में दोनों ने पार्टनरशिप में भोपाल चैप्टर की सेकंड सीरीज शुरू की है। यदि फूल सिंह बरैया राज्यसभा के सदस्य बन जाते हैं तो दिग्विजय सिंह को अपना बंगला नहीं छोड़ना पड़ेगा। फूल सिंह बढ़िया बड़े सम्मान के साथ अपना बंगला दिग्विजय सिंह के चरणों में समर्पित कर देंगे और भारत यात्रा पर निकल जाएंगे। श्री बरैया जातिवाद की दमदार पॉलिटिक्स करते हैं। जब भाषण देना शुरू करते हैं तो ऐसा लगता है जैसे देश अभी तक आजाद नहीं हुआ है, बरैया आज़ादी दिलाएंगे। कांग्रेस पार्टी को खास तौर पर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति का सपोर्ट नहीं मिलता। इसके कारण कांग्रेस पार्टी हर बार सत्ता से दूर हो जाती है। फूल सिंह बरैया को यदि राज्यसभा भेज दिया तो मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों में पार्टी को फायदा होगा। उत्तर प्रदेश में ज्यादा फायदा होगा क्योंकि, फूल सिंह बरैया को अपनी प्रिय बहन मायावती से बदला लेने का मौका मिल जाएगा। 

अरुण यादव और कांतिलाल भूरिया, दोनों कांग्रेस के बड़े नेता हैं। यदि राज्यसभा के दावेदारों की बात करेंगे तो इन दोनों का नाम भी लिखा जाना चाहिए, लेकिन बस इतने से काम बन जाता है। दोनों नेताओं का ईगो शांत हो जाता है। वैसे भी आप दोनों में कोई पोटेंशियल नहीं है। इनको पावरफुल कर देने से पार्टी को कुछ नहीं मिलने वाला। इनके पास जो कुछ भी था वह पार्टी को मिल चुका है और इनको जो कुछ भी दिया जाना था, वह सब कुछ दिया जा चुका है। अब बस इतना शेष रह गया है कि इन दोनों नेताओं को जिंदगी भर पार्टी की रॉयल्टी चुकाना है। 

आरिफ मसूद: पार्टी के लिए बंपर धमाका ऑफर 

आरिफ मसूद वैसे तो भोपाल की एक विधानसभा के विधायक हैं लेकिन इस जरा से नेता और विधायक में गजब का पोटेंशियल है। असदुद्दीन ओवैसी की परफेक्ट काट है। वंदे मातरम नहीं कहते लेकिन देश के लिए खून की आखिरी बूंद भी समर्पित करने की कसम खाते हैं। एक तरफ कट्टर मुसलमान के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होते हैं और दूसरी तरफ अपने परिसर में करवा चौथ मनाते हैं। उनकी विधानसभा का ऐसा कोई मंदिर नहीं होगा जिसके साथ आरिफ मसूद का फोटो ना हो। यह और बातें की हर फोटो में भगवान की तरफ पीठ दिखाकर खड़े होते हैं। भगवान को कभी प्रणाम नहीं करते लेकिन सोशल मीडिया पर हिंदू देवी देवताओं के साथ सेल्फी वायरल करते हैं। 

कुल मिलाकर परफेक्ट मटेरियल हैं। कांग्रेस को एक तरफ मुसलमान का पक्का वोट मिलेगा और दूसरी तरफ एक देशभक्त मुसलमान, भारतीय जनता पार्टी से सीधा मुकाबला करते हुए दिखाई देगा। वर्तमान में कांग्रेस पार्टी के पास ऐसा कोई मुसलमान नेता नहीं है जो देश के मुसलमान को कांग्रेस के लिए वोट करने घर से निकाल सके। आरिफ मसूद को बचपन से पता है, अपने समाज को वोट के लिए घर से निकालने हेतु क्या-क्या करना होता है। 

निष्कर्ष: फाइनल तो कांग्रेस पार्टी का हाई कमान ही करेगा और पैमाना भी केवल एक ही होगा। जो व्यक्ति हाई कमान के लिए फायदेमंद हो, जो व्यक्ति राहुल गांधी को सपोर्ट कर सके, और जो व्यक्ति राहुल गांधी को आगे बढ़ाने के लिए अपना सब कुछ स्वाहा कर देने के लिए तैयार हो जाए। उसी व्यक्ति को राज्यसभा में भेजा जाएगा। इस पैमाने पर चुनाव हो जाने के बाद फिर बाकी सारे समीकरण सेट कर लिए जाएंगे। कांग्रेस पार्टी के प्रति निष्ठा रखने वाले पत्रकार अपने व्यक्तिगत परिचय और अनुभव के आधार पर लिस्ट जारी कर रहे हैं। इसलिए मैंने सोचा मध्य प्रदेश की सबसे ऊंची छत पर खड़े होकर देखते हैं, किसका कद कितना बड़ा है, और कौन राहुल गांधी के लिए सब कुछ समर्पित करने को खड़ा है।
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