भोपाल समाचार, 29 जनवरी 2026: हाई कोर्ट ऑफ़ मध्य प्रदेश की ग्वालियर बेंच ने LOAN RECOVERY अथवा व्यक्तिगत उधारी वसूली के मामले में लैंडमार्क जजमेंट दिया है। हाई कोर्ट का कहना है की उधारी वसूली के लिए पैसों की मांग करना या फिर निर्धारित समय पर उधारी नहीं चुकाने पर कानूनी कार्रवाई की धमकी देना, आत्महत्या हेतु उकसाने के अपराध की श्रेणी में नहीं आता है।
हाई कोर्ट के समक्ष क्या मामला प्रस्तुत हुआ
यह आपराधिक पुनरीक्षण याचिका (Criminal Revision) सत्र न्यायाधीश, गुना द्वारा 8 दिसंबर, 2022 को पारित उस आदेश के विरुद्ध दायर की गई थी, जिसमें याचिकाकर्ता रिंकू लोधा के विरुद्ध IPC की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत आरोप (Charges) तय किए गए थे। मामला यह था कि 13.09.2022 को भगवान सिंह नामक व्यक्ति ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस जांच में मृतक के रिश्तेदारों ने आरोप लगाया कि भगवान सिंह ने याचिकाकर्ता से 1 लाख रुपये उधार लिए थे और याचिकाकर्ता उसे पैसे वापस करने के लिए परेशान कर रहा था। घटना वाले दिन याचिकाकर्ता ने मृतक की मोटरसाइकिल भी अपने पास रख ली थी, जिससे परेशान होकर उसने आत्महत्या कर ली। पुलिस ने भी अपनी इन्वेस्टिगेशन में रिंकू को आत्महत्या के लिए जिम्मेदार माना और न्यायालय के समक्ष आरोप पत्र दाखिल किया।
याचिकाकर्ता रिंकू लोधा के वकील का तर्क:
अधिवक्ता श्री मनवर्धन सिंह तोमर ने तर्क दिया कि धारा 306 के तहत अपराध के लिए आवश्यक तत्व (जैसे कि उकसाना या उकसावा) इस मामले में मौजूद नहीं हैं। कर्ज की वापसी की मांग करना या पैसे के संबंध में धमकी देना IPC की धारा 107 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ था और आरोप केवल रिश्तेदारों के बयानों के आधार पर तय किए गए थे।
सरकारी वकील के तर्क:
पुलिस इन्वेस्टिगेशन का समर्थन करते हुए सरकारी वकील श्री विक्रम पिप्पल, (लोक अभियोजक) ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि मृतक की पत्नी और अन्य गवाहों के बयानों से स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता द्वारा पैसे के लिए किए जा रहे उत्पीड़न के कारण ही मृतक ने यह कदम उठाया, इसलिए आरोप तय करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।
न्यायालय की टिप्पणी
उच्च न्यायालय ने विभिन्न कानूनी सिद्धांतों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों (जैसे संजू बनाम मध्य प्रदेश राज्य और गांगुला मोहन रेड्डी मामला) का हवाला देते हुए निम्नलिखित टिप्पणियां कीं:
• उकसावे (Instigation) के लिए अपराधी का आपराधिक इरादा (Mens Rea) होना अनिवार्य है। गुस्से में कहे गए शब्द या केवल पैसे की मांग को उकसावा नहीं माना जा सकता।
• आरोपी का कृत्य ऐसा होना चाहिए जिससे मृतक के पास आत्महत्या के अलावा कोई अन्य विकल्प न बचे।
• न्यायालय ने तार्किक रूप से कहा कि यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या कर लेता है, तो पैसे वसूलने का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा, क्योंकि फिर पैसा कभी वसूल नहीं किया जा सकेगा। इसलिए, केवल पैसा वापस मांगना उकसाने की श्रेणी में नहीं आता।
न्यायालय का निर्णय
न्यायालय ने याचिका को स्वीकार करते हुए यह निर्णय दिया:
1. याचिकाकर्ता का कृत्य IPC की धारा 306 के तहत अपराध की श्रेणी में नहीं आता। निचली अदालत (सत्र न्यायालय, गुना) ने याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप तय करने में गलती की है। तदनुसार, 8 दिसंबर, 2022 का विवादित आदेश रद्द कर दिया गया और याचिकाकर्ता को आरोपों से मुक्त कर दिया गया।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल रिश्तेदारों के बयानों को यदि पूरी तरह सही भी मान लिया जाए, तब भी वे कानूनन "आत्महत्या के लिए उकसाने" का अपराध सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं क्योंकि इसमें मृतक को मजबूर करने का सीधा इरादा (Overt act) शामिल नहीं था।
रिंकू लोधा बनाम मध्य प्रदेश राज्य CRR No. 13 of 2023 मामले का विवरण
याचिकाकर्ता और मामले का विवरण
• याचिकाकर्ता का नाम: रिंकू लोधा।
• प्रतिवादी: मध्य प्रदेश राज्य।
• मामला संख्या: क्रिमिनल रिवीजन नंबर 13/2023।
• न्यायालय: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, ग्वालियर खंडपीठ।
न्यायाधीश और निर्णय की तारीख
• न्यायाधीश का नाम: माननीय न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र यादव।
• निर्णय की तारीख: 19 जनवरी, 2026।
वकीलों के नाम
• याचिकाकर्ता (रिंकू लोधा) के लिए: श्री मनवर्धन सिंह तोमर, अधिवक्ता।
• प्रतिवादी (राज्य) के लिए: श्री विक्रम पिप्पल, लोक अभियोजक (PP)।
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