भोपाल समाचार, लीगल न्यूज डिपार्मेंट, 5 जनवरी 2026: भारत के विभिन्न राज्यों में पिछले कुछ दिनों में राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण जनता की सेवा से संबंधित कामों में लापरवाही हुई और इसके कारण लोगों की मृत्यु हुई है। ऐसी घटनाओं के बाद विरोध प्रदर्शन के दौरान लोग हमेशा नेताओं से इस्तीफा मांगते हैं। दरअसल इस प्रकार विपक्ष का नेता, सत्ता पक्ष के नेता को बचा रहा होता है। भारतीय न्याय संहिता के अनुसार ऐसे जनप्रतिनिधि के खिलाफ FIR दर्ज की जानी चाहिए जिसमें 5 साल जेल की सजा का प्रावधान है।
कानून के समक्ष समानता और उत्तरदायित्व
भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई जनप्रतिनिधि या अधिकारी गंभीर लापरवाही बरतता है जिससे किसी की मृत्यु हो जाती है, तो उनके विरुद्ध निश्चित रूप से कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसका विवरण निम्नलिखित है:
1. कानून के समक्ष समानता और उत्तरदायित्व
संहिता की धारा 1(3) यह स्पष्ट करती है कि प्रत्येक व्यक्ति भारत के भीतर किए गए ऐसे किसी भी कार्य या चूक (omission) के लिए दंड का पात्र होगा, जो इस संहिता के प्रावधानों के प्रतिकूल हो। इसमें किसी भी पद या ओहदे के आधार पर छूट का उल्लेख नहीं है।
2. Public Servant की परिभाषा
नेता (मंत्री, विधायक, महापौर) और अधिकारी इस संहिता के तहत 'सार्वजनिक सेवक' की श्रेणी में आते हैं। धारा 2(28) के अनुसार, सरकार की सेवा या वेतन पाने वाले व्यक्ति, या स्थानीय प्राधिकरण (जैसे महापौर) के तहत सार्वजनिक कर्तव्य निभाने वाले व्यक्ति "लोक सेवक" (public servant) कहलाते हैं।
3. लापरवाही से मृत्यु के लिए विशिष्ट प्रावधान
यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा किए गए लापरवाहीपूर्ण कार्य (rash or negligent act) के कारण होती है, तो धारा 106(1) के तहत कार्रवाई की जाती है। इसके तहत ऐसा अपराध आता है जो आपराधिक मानव वध (culpable homicide) की श्रेणी में नहीं आता, लेकिन लापरवाही के कारण मौत का कारण बनता है।
दंड का प्रावधान
इसके लिए पांच वर्ष तक का कारावास और जुर्माना निर्धारित किया गया है। पुरानी संहिता (IPC) की तुलना में, नई संहिता (BNS) ने लापरवाही से हुई मृत्यु के लिए सजा को दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दिया है।
निष्कर्ष: भारतीय न्याय संहिता के तहत, नेता या अधिकारी कानून से ऊपर नहीं हैं। यदि उनकी उपेक्षा या लापरवाही प्रत्यक्ष रूप से किसी की मृत्यु का कारण बनती है, तो उन पर धारा 106(1) के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है और दोष सिद्ध होने पर उन्हें पांच साल तक की जेल हो सकती है।
एक Analogy के रूप में इसे ऐसे समझा जा सकता है: जैसे एक सरकारी लाल बत्ती वाहन का ड्राइवर, ड्राइविंग सीट पर बैठकर, ड्राइविंग करना बंद कर दे, इसके कारण दुर्घटना हो जाए और किसी की मृत्यु हो जाए। तब वह यह नहीं कह सकता कि, मैं तो ड्राइविंग ही नहीं कर रहा था इसलिए मैं जिम्मेदार नहीं हूं। या फिर उसे इस बात के लिए कोई राहत नहीं दी जाएगी कि वह एक सरकारी लाल बत्ती वाहन का ड्राइवर मात्र है, वाहन का मालिक नहीं है। लेखक - उपदेश अवस्थी (पत्रकार एवं विधि सलाहकार)।
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