उपदेश अवस्थी, 16 जनवरी 2026: किसानों को नकली बीज की बिक्री, भारत में बड़े पैमाने पर होने वाला अपराध है लेकिन इसको सामान्य विवाद माना जाता है और दर्ज नहीं किया जाता। Seeds Act, 1966 के तहत सरकार ने केवल ₹500 जुर्माना काप्रावधान किया है। इसलिए प्रचारित किया जाता है कि नकली बीज की बिक्री करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कोई कानून ही नहीं है, लेकिन मैं आपको बताता हूं, भारतीय न्याय संहिता सहित तीन कानून हैं, जो किसान को मुआवजा और नकली बीज विक्रेता को 7 साल जेल की सजा दिला सकते हैं।
भारत में किसी को भी नकली बीज की समस्या के बारे में बताने की जरूरत नहीं है। जरूर यह बताने की है कि इतने गंभीर मामले पर सरकार कभी गंभीर नहीं रही। नकली बीज किस की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देता है। अक्सर नकली बीज के कारण किसान अपना लोन नहीं चुका पाता और आत्महत्या करने को मजबूर हो जाता है। नकली बीज के कारण फसल नहीं हुई और फसल नहीं होने के कारण लड़की की शादी टल गई, बच्चों की पढ़ाई रुक गई, एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करने के बाद भी एडमिशन नहीं ले पाए, ऐसे लाखों नहीं करोड़ मामले हैं। लेकिन नकली बीज बनाने वाली कंपनियों और कृषि विभाग के अधिकारियों के अपवित्र गठबंधन ने किसानों को शुरू से इतना हतोत्साहित करके रखा हुआ है कि, वह इस बारे में विचार तक नहीं करता। अब समझ में उन लोगों की जो जागरुक है और जानते हैं, जिम्मेदारी है कि इस मामले में किसानों को पूरी जानकारी दें। उन्हें बताएं कि केवल Seeds Act, 1966 नहीं बल्कि भारतीय न्याय संहिता और उपभोक्ता फोरम भी किसान के अधिकारों की रक्षा करते हैं।
Seeds Act, 1966 क्या है
जैसा के नाम से स्पष्ट है यह कानून नकली बीज के कारोबार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए 1966 में बनाया गया था। किसानों के मामले में हर साल बड़े आंदोलन होते हैं लेकिन किसानों के नेताओं ने भी कभी Seeds Act, 1966 में कठोर प्रावधान करने की मांग प्रमुखता से नहीं की। Seeds Act, 1966 के तहत बिना रजिस्ट्रेशन के, अमानक, मिलावटी या किसी झूठे नाम से बीज बिक्री करना अपराध है। बीज निरीक्षक को सैंपल लेने और सीज़ करने का अधिकार अधिकार है। अपराधी पाए जाने पर 6 महीने जेल अथवा ₹500 तक जुर्माना का प्रावधान है। दूसरी बार पकड़े जाने पर 1 साल जेल अथवा ₹1000 तक जमाने का प्रावधान है।
सरकार ने बड़ी चतुराई के साथ में "अथवा" लगाकर नकली बीज बेचने की अपराध को बिना हेलमेट वाले ट्रैफिक चालान से भी कमजोर कर दिया। यदि 6 महीने जेल अथवा ₹500 तक जुर्माना के स्थान पर 6 महीने जेल और ₹500 जुर्माना होता तो यह कानून थोड़ा दमदार होता।
सरकार कितनी सतर्क है, आंकड़ों से सुनिए
हमने केंद्रीय वेबसाइटों, सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, हिंदी और अंग्रेजी भाषा में लोकल न्यूज वेबसाइट्स और ChatGPT AI इत्यादि कई सोर्स का उपयोग करके यह जानने का प्रयास किया कि साल 2025 में Seeds Act, 1966 के तहत बीज निरीक्षक के द्वारा कुल कितने सैंपल कलेक्ट किए गए। एवं कितने विक्रेताओं के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। आंसर बिल्कुल वही है जो आप सोच रहे हैं, लोकल से लेकर दिल्ली तक, किसानों के लिए काम करने वाले नेताओं से लेकर विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों तक, किसी के भी सोशल मीडिया पर इस बारे में हमको कोई जानकारी नहीं मिली। पूरा साल बीत गया और किसी ने इस कानून पर चर्चा तक नहीं की।
अब भारत सरकार Seeds Bill, 2025 ने तैयार किया है और एक बार फिर इसके बारे में चर्चा शुरू हो गई है। Seeds Bill, 2025 में क्या प्रावधान है और यह किसने की किस प्रकार से रक्षा करेगा यह तो ड्राफ्ट के सामने आने के बाद ही पता चलेगा लेकिन आज अपन को यह पता चल गया कि एक कानून है जिसके तहत मामला दर्ज करवाया जा सकता है। सजा कम हो या ज्यादा लेकिन मामला दर्ज करवाना चाहिए।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम
नकली बीच के मामले में किसान, एक ग्राहक होता है। इसलिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत किसान, को भी संरक्षण मिलता है। इसके तहत किसान बीज विक्रेता के खिलाफ, मुआवजा प्राप्त करने के लिए दावा कर सकता है। इसके लिए किसी वकील की जरूरत नहीं होती। किसान स्वयं या उसके परिवार का कोई भी सदस्य जो शिक्षित है, मामले में वकील की तरह प्रस्तुत हो सकता है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत बीज खरीदने के लिए जो मूल्य चुकाए है वह तो वापस मिलेगा ही, नकली बीज होने के कारण खेती में जो नुकसान हुआ है, उसका मुआवजा भी मिलेगा। यह मामला सालों साल तक भी नहीं चलता। फटाफट फैसला होता है।
भारतीय न्याय संहिता
किसान, नकली बीज बेचने वाले के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 316 धोखाधड़ी, धारा 336 जालसाजी, धारा 338 फर्जी डॉक्यूमेंट और धारा 61 आपराधिक साजिश के तहत मामला दर्ज करवाया जा सकता है। इन धाराओं में नकली बीज बेचने का अपराध करने वाले व्यापारी को 7 साल जेल का प्रावधान है। यदि पुलिस मामला दर्ज करने से इंकार करें तो कृपया सादा कागज पर आवेदन दें और शिकायत की पावती प्राप्त करें। एक महीने के बाद अपने जिले के न्यायालय में प्राइवेट पिटीशन लगा दें। बाकी सारा काम कोर्ट कर देगी।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल किसानों को एजुकेशन के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। विभिन्न राज्यों में इस विषय पर राज्य सरकारों के अपने कानून भी हो सकते हैं। कृपया किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने से पहले लीगल एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।
लेखक : श्री उपदेश अवस्थी, भोपाल; पत्रकार एवं विधि सलाहकार हैं।
