भोपाल, 2 जनवरी 2026: भारतीय वन सेवा के अधिकारी श्री मयंक गुर्जर के खिलाफ चार्ज शीट जारी कर दी गई है। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की इंटरनल इंक्वारी में श्री गुर्जर सुनहरे सागवान की कटाई कांड में दोषी पाए गए हैं। श्री मयंक गुर्जर के भाई श्री शशांक सिंह गुर्जर मध्य प्रदेश पुलिस में डीएसपी है। श्री गुर्जर ग्राम हुराई, जिला मुरैना के रहने वाले हैं।
सुनहरा सागौन: नर्मदापुरम के वन क्षेत्रों में 6275 हरे-भरे बड़े पेड़ काटे गए
यह नर्मदापुरम जिले के जंगलों में हुई सुनहरे सागवान की बड़े पैमाने पर अवैध कटाई का मामला है। श्री मयंक गुर्जर IFS इस इलाके के डीएफओ हैं। यह मामला इतना गंभीर है कि दो दशकों में जंगलों में अवैध कटाई का सबसे बड़ा केस माना जा रहा है। जांच से पता चला है कि मार्च 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच नर्मदापुरम के वन क्षेत्रों में 6275 हरे-भरे बड़े पेड़ काटे गए। इनमें सबसे कीमती गोल्डन टीक यानी सुनहरा सागौन के 1200 से ज्यादा पेड़ इटारसी की छीपाखापा बीट में काटे गए। यह क्षेत्र रेलवे जंक्शन और हाईवे से अच्छी तरह जुड़ा होने की वजह से तस्करों के लिए आसान रास्ता बन गया। अवैध लकड़ी को लीगल माल में मिलाकर या फर्नीचर बनाकर देशभर में सप्लाई की जा रही थी।
CCF अशोक कुमार को भी नोटिस जारी
वन विभाग अब जिम्मेदार अफसरों और कर्मचारियों से 2.82 करोड़ रुपये की वसूली करेगा। जल्द ही वन अमले की मिलीभगत पर विभागीय जांच शुरू होगी। संरक्षण शाखा के प्रभारी PCCF बिभाष ठाकुर ने बताया कि यह प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जा रहा है। वहीं, वन बल प्रमुख विजय कुमार अंबाड़े ने नर्मदापुरम के CCF अशोक कुमार को भी नोटिस जारी किया है। उन पर डीएफओ मयंक गुर्जर को बचाने के आरोप लगे हैं, जिसके चलते अनुशासनहीनता और काम में बाधा डालने का जवाब मांगा गया है।
पिपरिया विधायक ठाकुरदास नागवंशी ने खुलासा किया था
यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब विधानसभा के शीत सत्र में पिपरिया विधायक ठाकुरदास नागवंशी ने सवाल उठाया। सरकार ने माना कि इतने पेड़ काटे गए, लेकिन ऊपरी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतें आने के बाद भोपाल से उड़नदस्ता भेजकर जांच कराई गई, जिसमें ठूंठ मिले और मामले की गंभीरता सामने आई।
यह मामला, खुलासा करता है कि किस प्रकार फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के अधिकारी, अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फॉरेस्ट एरिया का संरक्षण करने के स्थान पर माफिया के लिए काम कर रहे हैं या फिर शायद खुद ही माफिया बन बैठे। लेकिन यह भी खुलासा करता है कि, शहरी इलाकों में अतिक्रमण बचाने के लिए पेड़ों की कटाई के खिलाफ प्रायोजित प्रदर्शन करने वाले पर्यावरण प्रेमी, सुनहरे सागवान जैसे महत्वपूर्ण और मूल्यवान पेड़ की कटाई पर चुप बने रहते हैं। कैसे इटारसी और होशंगाबाद के विधायक कोई सवाल नहीं उठाते। एक प्रकार का सिंडिकेट बन गया है। जिसमें माफिया, अधिकारी, जनप्रतिनिधि और पर्यावरण प्रेमी शामिल हैं।
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