ग्वालियर, 19 जनवरी 2026: जरूरत से ज्यादा मार्केटिंग कई बार राजनीति में Rivalry की स्थिति बना देती है। ग्वालियर व्यापार मेला में, ऑटोमोबाइल सेक्टर में, 50% टैक्स छूट के मामले में ऐसा ही हो रहा है। मेला के व्यापारियों ने टैक्स में छूट की घोषणा के बाद केवल सिंधिया का आभार व्यक्त किया। औपचारिकता पूरी करने के लिए एक बार मुख्यमंत्री का नाम लिया और परिवहन मंत्री का तो जिक्र तक नहीं किया। इसलिए परिवहन डिपार्टमेंट ने नोटिफिकेशन रोक दिया। व्यापारियों को समझना चाहिए, परिवहन विभाग के मंत्री अब गोविंद सिंह राजपूत नहीं है। मध्य प्रदेश का परिवार विभाग श्रीमंत महाराज साहब के अधीन नहीं आता है। प्रोटोकॉल तो पूरा करना चाहिए।
ग्वालियर मेला को महीना पूरा होने वाला है, टैक्स छूट मसला बना हुआ है
ग्वालियर व्यापार मेला को एक महीना पूरा होने वाला है लेकिन टैक्स छूट का मामला अब तक मसला बना हुआ है। प्रारंभ से लेकर लेकर अब तक ग्वालियर मेला के व्यापारियों द्वारा जो कुछ भी किया गया है, जिस प्रकार के समाचार और वीडियो वायरल हो रहे हैं। उनसे एक बात समझ में आती है कि ग्वालियर मेला व्यापारियों के लिए सिंधिया ही सरकार है। व्यापारियों ने टैक्स छूट के लिए ना तो परिवहन मंत्री से निवेदन किया नहीं मुख्यमंत्री से। केवल सिंधिया से निवेदन किया। जबकि सिंधिया, ना तो ग्वालियर के सांसद है और ना ही किसी भी प्रकार की वैधानिक अधिकारिकता रखते हैं। फिर भी ग्वालियर मेला के व्यापारियों को लगता है कि मध्य प्रदेश शासन और परिवहन विभाग भी सिंधिया के अधीन है। वह औपचारिकता के लिए भी मध्य प्रदेश शासन को महत्व देते हुए दिखाई नहीं देते हैं। पिछली बार जब कैबिनेट में मंत्री परिषद ने टैक्स छूट को मंजूरी दी तो सोशल मीडिया पर सिंधिया के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
अब टैक्स छूट का नोटिफिकेशन जय विलास पैलेस के कंप्यूटर से तो निकलना नहीं है। मध्य प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, अपने आप में एक पॉवरफुल लीडर है और अपनी पहचान एवं आत्मसम्मान रखते हैं। शायद वह स्वयं को सिंधिया के अधीन नहीं मानते। शायद यही कारण है कि नोटिफिकेशन अटका हुआ है और सिर्फ 8500 वाहनों की बुकिंग मात्रा पाई है। बहुत सारे लोगों ने बुकिंग भी नहीं की है। ग्वालियर व्यापार मेला का ऑटोमोबाइल सेक्टर प्रभावित हो रहा है। यदि कहीं नोटिफिकेशन में बाबू ने कोई गड़बड़ी कर दी तो पूरा मेला धरा रह जाएगा।
सिंधिया समर्थकों को समझना चाहिए, समय बदल गया है। उनकी पॉलिटिक्स का आदि और अंत कुछ भी हो लेकिन मध्य प्रदेश की पॉलिटिक्स जय विलास पैलेस से निर्धारित नहीं होती। राजनीति में जो भी क्रिया होती है, उसकी प्रतिक्रिया भी होती है। हर सिक्के का दूसरा पहलू होता है और कई बार तो हर सिक्के के चार-पांच पहलू हो जाते हैं। जब प्रद्युमन सिंह तोमर कहते हैं कि ग्वालियर नरक बन गया है तो एक्चुअल में वह प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट का अपमान कर रहे होते हैं। सरकारी मामलों में सिंधिया के प्रति आभार व्यक्त करते समय संतुलन जरूरी है। लेखक - उपदेश अवस्थी।
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