BREAKING NEWS VIDEO, बागेश्वर वाले मोदी सरकार से असंतुष्ट, बोले हमको बांटा ना जाए

Updesh Awasthee
बागेश्वर सनातन मठ, मुंबई (महाराष्ट्र), 28 जनवरी 2026
: भारत के सबसे लोकप्रिय युवा धार्मिक नेता, बागेश्वर धाम वाले श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने आज UGC मामले में अपना असंतोष भरे मंच से लाखों लोगों के समर्थन के साथ सरकार के समक्ष प्रस्तुत करते हुए अपील की, कि हमको बांटा ना जाए। उल्लेखनीय है कि UGC ने स्वर्ण जाति के विद्यार्थियों को जन्मजात अपराधी घोषित कर दिया है। 

UGC विवाद - एक डॉक्यूमेंट से पूरा भारत डिवाइड हो गया

UGC विवाद का मतलब है विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जनवरी 2026 में जारी किए गए नए नियमों से जुड़ा विवाद। ये नियम "Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026" कहलाते हैं। इनका घोषित उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों (कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज) में जातिगत भेदभाव (caste-based discrimination) को रोकना और समानता (equity) को बढ़ावा देना है, परंतु नियम कुछ इस प्रकार से बनाए गए हैं जो कैंपस में स्वर्ण जाति के विद्यार्थियों को प्रताड़ित करने का कारण बन सकते हैं। यह नियम बिल्कुल पुराने दहेज एक्ट जैसे हैं। ये नियम 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित हुए और 15 जनवरी से लागू हो गए। ये 2012 के पुराने दिशानिर्देशों की जगह लेते हैं, जो सिर्फ सलाहकारी थे, लेकिन अब ये अनिवार्य हैं। 

मुख्य प्रावधान क्या हैं? 

  • हर उच्च शिक्षा संस्थान में Equal Opportunity Centre (EOC) और Equity Committee बनाना जरूरी।
  • Equity Squads और 24x7 हेल्पलाइन की व्यवस्था।
  • शिकायतों पर तुरंत जांच और रिपोर्ट UGC को भेजना।
  • समिति में SC, ST, OBC, महिलाओं, दिव्यांगों के प्रतिनिधि अनिवार्य।
  • गैर-अनुपालन पर UGC दंड दे सकता है, जैसे फंडिंग रोकना या डिग्री प्रोग्राम बंद करना।
ये नियम रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का बहाना लेकर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में सवर्ण जाति के विद्यार्थियों को प्रताड़ित करने के लिए बनाए गए हैं। (2025 में कोर्ट ने सख्त नियम बनाने को कहा था)।

विवाद क्यों मचा है? 

मुख्य कारण - जातिगत भेदभाव की परिभाषा सिर्फ SC, ST और OBC के खिलाफ भेदभाव को कवर करती है। सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) के लोग कह रहे हैं कि ये एकतरफा है और सवर्णों को भेदभाव से सुरक्षा क्यों नहीं दी गई जबकि स्वर्ण को भी उनकी जाति के नाम से प्रताड़ित किया जाता है।
झूठी शिकायतों पर कोई सजा या सुरक्षा का प्रावधान नहीं। विरोध करने वाले कहते हैं कि इससे व्यक्तिगत दुश्मनी या बदले की भावना से शिकायतें बढ़ सकती हैं, और सामान्य छात्र/शिक्षक परेशान हो सकते हैं।
Equity Committee में Equity नहीं - समानता स्थापित करने के लिए हर कॉलेज में जो समिति बनाई जाएगी उसमें सवर्णों का प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। जब कमेटी में ही समानता नहीं होगी तो फिर ऐसी कमेटी जातिगत सामान्य कैसे ला सकती है। 
संविधान का उल्लंघन - UGC का यह नियम भारतीय संविधान के आर्टिकल 14 का उल्लंघन है, जो भारत के प्रत्येक नागरिक को समानता का अधिकार देता है।

कई लोग कह रहे हैं कि ये नियम कैंपस को जाति युद्ध का मैदान बना सकते हैं, जबकि शिक्षा की गुणवत्ता और रैंकिंग सुधार पर फोकस होना चाहिए। लखनऊ, दिल्ली आदि में विद्यार्थी सड़कों पर उतर आए हैं। सोशल मीडिया पर #ShameonUGC ट्रेंड कर रहा है, कुछ BJP युवा नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उत्तर प्रदेश में भारतीय प्रशासनिक सेवा की एक अधिकारी ने UGC मुद्दे की तरफ ध्यान खींचने के लिए इस्तीफा दे दिया। 

बागेश्वर वाले श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने क्या कहा 

क्या क्षत्रिय, क्या ब्राह्मण, क्या वैश्य हम इस भारत में एक प्रार्थना करना चाह रहे। वर्तमान में एक विषय बहुत चल रहा है। यूजीसी। असमानता भारत में नहीं होनी चाहिए। भारत में समानता ही होनी चाहिए। हम सब एक हैं। भारत में ना कोई अगड़ा हो ना पिछड़ा हो। भारत में केवल भारतीय हो। यही हमारी भारत से प्रार्थना है। भारत सरकार से भी प्रार्थना है कि भैया, भारतीयों को बांटा ना जाए, जोड़ा जाए।
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