भोपाल समाचार, 29 जनवरी 2026: यदि कलेक्टर कार्यालय से मिली सूचना को पढ़ेंगे तो यह एक रूटीन है। इसमें न्यूज़ जैसा कुछ भी नहीं है लेकिन यदि ध्यान से पढ़ेंगे और कैलकुलेशन करेंगे तो समझ में आएगा कि जेपी हॉस्पिटल के सिविल सर्जन डॉ. संजय जैन इतने आउट ऑफ कंट्रोल हो गए कि उनको समझाने के लिए भोपाल के कलेक्टर और वह भी श्री कौशलेंद्र विक्रम सिंह जैसे IAS को खुद जेपी हॉस्पिटल जाना पड़ा।
सबसे पहले, कलेक्टर कार्यालय से मिली सूचना
जनसंपर्क अधिकारी श्री विजय/अरुण शर्मा ने गुरुवार को 11:44 बजे बताया कि, कलेक्टर श्री कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बुधवार (एक दिन पहले) देर शाम जयप्रकाश जिला अस्पताल पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाओं को औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. मनीष शर्मा, सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. संजय जैन, आरएमओ डॉ. प्रमेंद्र शर्मा उपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान साफ - सफाई व्यवस्था, ओपीडी, आईपीडी और आकस्मिक चिकित्सा में चिकित्सकों एवं स्टाफ की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम 2 बार निरीक्षण करने के लिए सिविल सर्जन को निर्देशित किया। श्री सिंह ने कहा कि पंजीयन से लेकर परामर्श, जांचों और दवा वितरण तक मरीजों को असुविधा न हो, इसके लिए सभी अस्पताल स्टाफ को निर्देशित किया जाए।
अब अपना कैलकुलेशन
1. कोई भी कलेक्टर अपने जिले के अस्पताल का निरीक्षण करने जा सकते हैं, जाते हैं और जाना भी चाहिए लेकिन यदि श्री कौशलेंद्र विक्रम सिंह IAS ऐसा करें तो ध्यान देना पड़ता है। जो अधिकारी जनसुनवाई और टाइम लिमिट की मीटिंग में नहीं जाता, वह अस्पताल की साफ सफाई देखने जाएगा, बात समझ में नहीं आती।
2. बुधवार शाम को निरीक्षण किया, कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की, सब कुछ अच्छा था और सफाई की तारीफ भी की तो फिर प्रेस को सूचना देने में इतनी देर (12 घंटे से भी ज्यादा) कैसे हो गई। क्या बुधवार की शाम छापामार कार्रवाई में कुछ पकड़ लिया गया था, और गुरुवार की सुबह तक सब कुछ सामान्य हो गया। यदि सामान्य नहीं होता तो प्रेस को कुछ और बताया जाता।
3. सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. संजय जैन को लेकर काफी शिकायत है सोशल मीडिया पर चल रही है। शिकायतों में डॉक्टर संजय जैन का नाम नहीं लिखा है लेकिन जेपी अस्पताल में अव्यवस्थाएं, एक्सपायर हो चुकी दवाइयां का वितरण, डॉक्टर का मरीज के साथ दुर्व्यवहार, ऐसे कई मामले प्रकाश में आ चुके हैं। इनमें से दवाई कांड काफी गंभीर है।
कलेक्टर की छापामार कार्रवाई का कारण इसके अलावा भी कुछ और हो सकता है, लेकिन इतना पक्का है कि जो प्रेस को बताया गया है, वह तो नहीं है।
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