भोपाल, 6 जनवरी 2026: मध्यप्रदेश की ग्राम पंचायतों में कार्यरत चौकीदार, पंप ऑपरेटर, भृत्य और सफाईकर्मी राजधानी भोपाल में एकजुट होकर ग्रामीण विकास एवं पंचायत संचालनालय, विकास भवन का ऐतिहासिक घेराव किया। प्रदेशभर से आए हजारों कर्मचारियों ने “न्यूनतम वेतन दो या मौत दो” के नारे के साथ अपनी वर्षों पुरानी उपेक्षित मांगों को जोरदार तरीके से प्रस्तुत किया।
विकास भवन घेराव का नेतृत्व संगठन के संरक्षक डा. अमित सिंह, वासुदेव शर्मा, अध्यक्ष राजभान रावत, निगम मंडल अध्यक्ष अनिल वाजपेई, आउटसोर्स कर्मचारी नेता आशीष सिसोदिया, चौकीदार संघ के कार्यकारी अध्यक्ष नत्थू लाल कुशवाह ने किया। ग्राम पंचायत के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के घेराव में पूर्व मंत्री पी सी शर्मा ने पहुंचकर समर्थन दिया और सरकार से न्यूनतम वेतन दिए जाने की मांग की। घेराव में राजू कुडापे, कृष्णा मांजरीवार, अर्जुन, साहू, प्रजापति, अनिल यादव सहित जिला एवं ब्लाक के पदाधिकारी बडी संख्या में शामिल हुए। सभा के उपरांत प्रतिनिधिमंडल ने आयुक्त, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें वेतन, सेवा-शर्तों, दर्जे एवं सुरक्षा संबंधी कई वैधानिक मुद्दों को शामिल किया गया।
सरकार श्रमिकों को मुगलकाल में धकेल रही: वासुदेव शर्मा
आउटसोर्स अस्थायी कर्मचारी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने कहा कि सरकार अपने ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का शोषण कर रही है, उनसे 2-5 हजार में काम करा रही है, यह मुगलकाल जैसी स्थिति है, जब श्रमिकों से मुफ्त में काम कराकर महल, किले, मीनारें बनवाई जाती थीं, इस तरह मप्र सरकार ने श्रमिक कर्मचारी वर्ग को मुगलिया हुकूमत के दौर में धरेल दिया है, जिसके खिलाफ संघर्ष जारी है। “न्यूनतम वेतन न देना, श्रम कानूनों को कमजोर करना और नौकरियों को ठेके पर देना" सरकार मजदूरों को अधिकारविहीन बना रही है। यह मुगलकाल जैसी परिस्थिति है। हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे।” शर्मा ने कहा कि शासन के आदेश पर नियुक्त हुए इन कर्मचारियों को ग्राम पंचायतें मात्र 2-3 हजार रूपए वेतन देती हैं जबकि सरकार का आदेश निर्देश न्यूनतम वेतन देने का है, जो 12,500 रूपए है, इस तरह इन कर्मचारियों के वेतन से 8-9 हजार रूपए महीने की चोरी हो रही है, जिसे रूकवाने और पूरा वेतन दिलाने की मांग रखी।
प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने घेराव को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार पूरी तरह ग्रामीण गरीबों, श्रमिकों का रोजगार खत्म कर उन्हें अधिकारविहीन बना रही है, न्यूनतम वेतन नहीं देना, मनरेगा को खत्म करना, श्रम कानूनों को बदलना, चौथे, तृतीय दर्जे की नौकरियां ठेके पर देना सरकार के निर्णय गरीब मजदूर विरोधी हैं, ऐसा मुगलकाल में था, जब श्रमिकों के लिए कोई अधिकार नहीं थे, अब केंद्र राज्य सरकार श्रमिकों से सभी अधिकार छीनकर मुगलकाल में पहुंचा रही है। इसके खिलाफ संघर्ष करना हर गरीब मजदूर की जिम्मेदारी हो जाती है। विकास भवन के घेराव में प्रदेश के हजारों ग्राम पंचायत चौकीदार, पंप आपरेटर, भृत्य, सफाईकर्मी शामिल होंगे।
ग्राम पंचायतों में कार्यरत चौकीदार, पंप आपरेटर्स, सफाईकर्मी, भृत्यों की बैठकों में बोलते हुए वासुदेव शर्मा ने कहा कि आप लोग 15-18 साल से पंचायतों में काम कर रहे हैं लेकिन अब तक आपको न्यूनतम वेतन का अधिकार भी नहीं मिला है, आपसे 2, 3, 4 हजार रूपए महीने में काम कराया जा रहा है, जो गलत है और अन्याय भी, इसे समाप्त कराना हम सभी की जिम्मेदारी है। वासुदेव शर्मा ने कहा कि सरकार मजदूरों से वे सभी कानूनी अधिकार छीन लेना चाहती है, जो उसने लंबे संघर्षों से हासिल किए हैं। श्रम कानूनों को खत्म कर न्यूनतम वेतन का अधिकार छीनना, चौथे, तीसरे दर्जे की नौकरियां खत्म करना, अब ग्रामीण गरीबों श्रमिकों से रोजगार की गारंटी देने वाली मनरेगा को छीनकर कामगारों को अधिकार विहीन बनाकर मुगलकाल जैसे शोषण में धकेल रही है।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
1. न्यूनतम वेतन का पूर्ण भुगतान
सरकार द्वारा निर्धारित ₹12,500 मासिक न्यूनतम वेतन कर्मचारियों को तत्काल दिया जाए। वर्तमान में पंचायतें मात्र ₹2,000–₹3,000 दे रही हैं, जो प्रतिमाह ₹8,000–₹9,000 की सीधी वेतन चोरी है।
2. चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा
ग्राम पंचायतों में कार्यरत सभी कर्मचारियों को चतुर्थ श्रेणी का पदनाम देकर नियमितीकरण,भविष्य निधि (EPF),ईएसआई,अवकाश नियम,वार्षिक वेतनवृद्धि जैसी समस्त वैधानिक सुविधाएँ लागू की जाएँ।
3. सेवा-शर्तों का नियमन
नियुक्ति से लेकर सेवानिवृत्ति तक की प्रक्रिया स्पष्ट रूप से विनियमित की जाए।
भर्ती, स्थानांतरण, समयपालन, कर्तव्य और अनुशासन संबंधी स्पष्ट सेवा नियम बनाए जाएँ।
4. कार्यस्थल पर सुरक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा,कर्मचारियों को दुर्घटना बीमा,जीवन बीमा,स्वास्थ्य सुरक्षा,समय पर वेतन भुगतान की सुविधाएँ तत्काल प्रदान की जाएँ।
5. मनरेगा एवं ग्रामीण कार्यों में श्रमिकों के अधिकार बहाल
6. मनरेगा को कमजोर करने वाली नीतियों पर रोक लगाई जाए और ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार की निरंतरता दी जाए।
पंचायत व्यवस्था की रीढ़ हैं पर अधिकार शून्य: डॉ. अमित सिंह
पंचायत चौकीदार संघ के संयोजक डॉ. अमित सिंह ने कहा:
“पेयजल, सुरक्षा, स्वच्छता, भवन संचालन—ग्राम पंचायत की पूरी जिम्मेदारी हम निभाते हैं। पर मानदेय और स्थायित्व दोनों नहीं। आज का आंदोलन पूरे प्रदेश की आवाज है।”
हमारी लड़ाई अब निर्णायक चरण में: राजभान रावत
संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजभान रावत ने कहा:
“आज हजारों कर्मचारियों ने अपने हक की आवाज सरकार तक पहुंचाई है। यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो हम जल्द ही चरणबद्ध और व्यापक आंदोलन की घोषणा करेंगे।”
