SOCIAL MEDIA पत्रकारों के खिलाफ कड़ा कानून जरूरी, संसद में मंत्री ने कहा

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नई दिल्ली, 3 दिसंबर 2025
: केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज लोकसभा में साफ-साफ कहा कि फेक न्यूज़ और AI से बने डीपफेक वीडियो अब सिर्फ अफवाह नहीं, बल्कि देश के लोकतंत्र के लिए सीधा खतरा बन चुके हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कड़े नियमों की जरूरत पर जोर देते हुए चेतावनी दी कि कुछ लोग और समूह सोशल मीडिया का ऐसा इस्तेमाल कर रहे हैं मानो उन्हें न संविधान मानना है, न संसद के बनाए कानून।

ड्राफ्ट नियम भी जारी किए जा चुके हैं

मंत्री ने सदन को बताया कि सरकार ने हाल ही में नए IT नियम लागू किए हैं जिनमें किसी आपत्तिजनक या फेक कंटेंट को शिकायत मिलने के 36 घंटे के अंदर हटाना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही AI-जनित डीपफेक की पहचान और उन पर तुरंत कार्रवाई के लिए अलग से ड्राफ्ट नियम भी जारी किए जा चुके हैं, जिन पर अभी स्टेकहोल्डर्स से विचार-विमर्श चल रहा है।

श्री वैष्णव ने संसदीय समिति की उस रिपोर्ट की भी सराहना की जिसकी अध्यक्षता भाजपा सांसद निशिकांत दुबे कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समिति की सिफारिशें कानूनी ढांचे को और मजबूत करने में बड़ी मदद करेंगी।

अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र की सुरक्षा के बीच संतुलन जरूरी

अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाते हुए मंत्री ने जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया विजन ने तकनीक को आम आदमी तक पहुंचाया है और सोशल मीडिया ने हर नागरिक को आवाज दी है। लेकिन इसी तकनीक का गलत इस्तेमाल समाज में विश्वास की नींव हिला रहा है। इसलिए सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ ऐसे कदम उठा रही है कि एक तरफ फेक न्यूज़ और डीपफेक पर लगाम लगे, दूसरी तरफ लोकतंत्र की बुनियाद मजबूत रहे।

इस विषय से जुड़ी अन्य हालिया खबरें:
- 30 नवंबर 2025: सरकार ने प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों के साथ हाई-लेवल मीटिंग में 36-घंटे नियम का सख्ती से पालन न करने पर बड़ा जुर्माना लगाने की चेतावनी दी।
- 28 नवंबर 2025: मीसा भारती सहित कई नेताओं के डीपफेक वीडियो वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस ने अलग से डीपफेक सेल बनाने का ऐलान किया।
- 25 नवंबर 2025: प्रसार भारती ने सभी न्यूज़ चैनलों को निर्देश जारी किया कि AI-जनित कंटेंट ब्रॉडकास्ट करने से पहले अनिवार्य वॉटरमार्क और डिस्क्लेमर दिखाना होगा।
- 20 नवंबर 2025: IT मंत्रालय ने डीपफेक बनाने-फैलाने वालों के लिए 3 से 7 साल की जेल और 1 करोड़ तक जुर्माने का प्रस्तावित संशोधन कैबिनेट के सामने रखा।
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