लीगल न्यूज डेस्क, 23 दिसंबर 2025: मद्रास हाई कोर्ट ने श्रीमद्भगवद्गीता को लेकर जो फैसला दिया है, वह पूरे देश भर की मीडिया हेडलाइंस में दिखाई दे रहा है और सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गया है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने श्रीमद्भगवद्गीता को एक धार्मिक ग्रंथ कहा था लेकिन मद्रास हाई कोर्ट ने श्रीमद्भगवद्गीता खुद धार्मिक ग्रंथ मानने से इनकार कर दिया और इसकी विस्तार से व्याख्या की।
पूरा मामला क्या है?
कोयंबटूर बेस्ड ये ट्रस्ट वेदांत, संस्कृत, हठ योग और ancient manuscripts के preservation का काम करता है। ट्रस्ट ने 2021 में foreign contribution regulation act यानी FCRA के तहत registration के लिए apply किया था। लेकिन home ministry ने application को लंबा खींचा और आखिर में reject कर दिया। वजह बताई गई कि ट्रस्ट ने बिना permission के foreign funds लिए और transfer किए, प्लस उनकी activities religious nature की हैं क्योंकि भगवद गीता का प्रचार करते हैं। ट्रस्ट ने इसे challenge करते हुए मद्रास हाईकोर्ट में petition दाखिल की।
कोर्ट ने ministry के order को रद्द कर दिया और कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता moral science है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के पुराने judgment का हवाला देते हुए कहा कि, यह एक धार्मिक किताब नहीं बल्कि भारत का national scripture है। योग पर कोर्ट ने अमेरिकी court के decision का जिक्र किया कि ये body flexibility, pain relief और stress reduction का secular way है। spirituality और religion को अलग-अलग बताया। सबसे महत्वपूर्ण, natural justice का violation पाया क्योंकि ministry ने proper notice नहीं दिया और application पर years तक decision नहीं लिया, जो good governance के खिलाफ है। संविधान के article 51A का mention करते हुए कहा कि cultural heritage preserve करना citizens का duty है।
अंत में कोर्ट ने home ministry को निर्देश दिए कि case को fresh consider करें और अगर कोई नई notice issue करना हो तो clear और specific grounds पर करें।
ये फैसला भारतीय संस्कृति और philosophy को promote करने वाले organizations के लिए राहत की बात है, क्योंकि अब उन्हें religious tag लगाकर foreign funding से वंचित करना मुश्किल होगा।
इस फैसले पर काफी discussion हो रही है। 19 दिसंबर 2025 को judgment आया और 22-23 दिसंबर को major news outlets जैसे The Print, Bar and Bench, Live Law, Indian Express और Swarajya ने cover किया। कुछ sources में इसे द्रविड़ियन politics के context में भी देखा जा रहा है, क्योंकि ये गीता को भारतीय civilization का gem बताता है। कोई और related recent news नहीं मिली, लेकिन ये judgment FCRA cases में cultural activities को religious से अलग करने का important precedent सेट कर सकता है। रिपोर्ट: राजेश्वरी बंदेवार।
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