भोपाल, 16 नवंबर 2025: मध्य प्रदेश में विकलांगता के फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर सरकारी नौकरी और एडमिशन के हजारों मामले सामने आ चुके हैं। इस मामले में मध्य प्रदेश इतना बदनाम हो गया है कि देश भर के उम्मीदवार मध्य प्रदेश में विकलांगता के फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर सरकारी नौकरी और मेडिकल कॉलेज में एडमिशन प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे ही एक मामले में बिहार के एक युवक और मुंबई की एक युवती को गिरफ्तार किया गया। अब उन दोनों के पिता और फर्जी सर्टिफिकेट दिलाने वाले एजेंट को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।
भोपाल में बिहार का हिमांशु कुमार और मुंबई की क्रिस्टल डी. कोस्टा गिरफ्तार
पुलिस के मुताबिक, दस्तावेजों की जांच के दौरान सहरसा (बिहार) के छात्र हिमांशु कुमार और मुंबई की छात्रा क्रिस्टल डी. कोस्टा द्वारा जमा किए गए BHU के PH सर्टिफिकेट फर्जी साबित हुए। दोनों छात्रों को पहले ही गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। अब इस मामले में उनके परिवारों का भी हाथ सामने आया है। हिमांशु के पिता डॉ. शैलेंद्र कुमार, जो सहरसा के निवासी हैं, सुपौल में एक नेत्र चिकित्सालय और सहरसा में एक क्लिनिक चलाते हैं। वहीं, क्रिस्टल के पिता क्लाइव डी. कोस्टा मुंबई में रहते हैं।
पूरे देश में एजेंट सक्रिय है
इन दोनों पिताओं के साथ गिरफ्तार दो एजेंटों ने कथित रूप से फर्जी प्रमाण-पत्र तैयार कराए और एडमिशन प्रक्रिया में पूरी मदद की थी। पुलिस का कहना है कि यह रैकेट छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा था, जो शिक्षा व्यवस्था की मजबूती के लिए एक चेतावनी है। जांच जारी है, और जल्द ही बाकी सदस्यों को भी पकड़ लिया जाएगा। ऐसे मामलों से सतर्क रहना ही सही दिशा है, ताकि मेहनत का असली फल मिल सके। मध्य प्रदेश में फर्जी सर्टिफिकेट की सफलता की दर का अनुमान आप केवल इस बात से लगा सकते हैं कि पूरे भारत में इस काम के लिए एजेंट सक्रिय है। एक तरफ मुंबई जैसी भारत की सबसे बड़ी मेट्रो सिटी में तो दूसरी तरफ बिहार के सहरसा जैसे इलाकों तक इनका नेटवर्क फैला हुआ है।
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