मध्य प्रदेश में 5000 से ज्यादा फर्जी कर्मचारी पकड़े गए, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई

Updesh Awasthee
भोपाल, 10 नवंबर 2025
: मध्य प्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत संचालित नगर निगम और नगर पालिकाओं में पिछले कुछ दिनों में 5000 से ज्यादा फर्जी कर्मचारी पकड़े गए हैं, लेकिन इन कर्मचारियों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। बस इतना हुआ है कि अगले महीने से इनको सैलरी नहीं मिलेगी। 

Aadhar Enabled Biometric Attendance System का असर

नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने Aadhar Enabled Biometric Attendance System को पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। कहा कि फर्जी वेतन भुगतान और डीजल चोरी जैसी अनैतिक गतिविधियां रोकने में मदद मिल रही है। आयुक्त भोंडवे ने बताया कि बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली से कर्मचारियों की उपस्थिति, समयपालन और कार्यकुशलता की रियलटाइम मानिटरिंग के साथ उनमें अनुशासन और उत्तरदायित्व की भावना को बल मिल रहा है। 

5000 कर्मचारियों के नाम ड्यूटी लिस्ट से हटाए गए

संकेत भोंडवे ने बताया कि इस प्रणाली के लागू होने से फर्जी वेतन भुगतान की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है। अब तक 5000 से अधिक गैरहाजिर या फर्जी नामों को ड्यूटी सूची से हटाया जा चुका है, जिससे आर्थिक बचत हो रही है। AEBAS (आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली) से शहरी विकास विभाग के प्रमुख व्यय मद वेतन, ऊर्जा और डीजल में व्यापक सुधार हो रहा है। डीजल चोरी पर भी रोक लग रही है। यह विभाग का तीसरा सबसे बड़ा व्यय मद रहा है।

कौन थे यह 5000 कर्मचारी और FIR क्यों नहीं की गई

दरअसल, यह सभी 5000 कर्मचारी या तो खुद किसी पार्टी के कार्यकर्ता है या फिर किसी बड़े नेता के रिश्तेदार हैं। इनको नगर निगम और नगर पालिकाओं से हर महीने नियमित रूप से वेतन मिलता है, जबकि यह नौकरी नहीं करते। मध्य प्रदेश के प्रत्येक नगर निगम और नगर पालिका में ऐसे कर्मचारी सालों से दर्ज थे। यह एक ऐसा भ्रष्टाचार है जिसे भाजपा और कांग्रेस पार्टी के नेता मिलकर कर रहे थे। आधार आधारित बायोमैट्रिक अटेंडेंस सिस्टम के कारण पोल खुल गई और मामला सामने आ गया लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई, क्योंकि यदि कोई कार्रवाई की गई तो दोनों पार्टियों नाराज हो जाएंगी।

मोबाइल नहीं होने पर सुपरवाइजर्स दर्ज करेंगे उपस्थिति

भोंडवे ने बताया कि यह पहल भविष्य में विकसित होने वाली e-HRMS (Electronic Human Resource Management System) प्रणाली की आधारशिला भी बनेगी, इससे संपूर्ण मानव संसाधन प्रबंधन को डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाएगा। साथ ही समय की पाबंदी और कार्य कुशलता के अलावा फर्जी वेतन से करोड़ों रुपये बचाएंगे। जिनके पास आधुनिक क्षमतापूर्ण मोबाइल नहीं है ऐसे स्वच्छताकर्मी की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए सुपरवाइजर्स को टैबलेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
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