WhatsApp group में बदनाम करने वाले पर 60000 का जुर्माना, दिल्ली की शिवालिक सोसायटी का मामला

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व्हाट्सएप ग्रुप में एक रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर और उनके बेटे को बदनाम करने के मामले में आरएन यादव को दोषी घोषित करते हुए दिल्ली की एक कोर्ट ने ₹60000 का जुर्माना लगाया है। न्यायालय की निर्णय के साथ, एक बार फिर यह स्थापित हो गया कि व्हाट्सएप ग्रुप कोई निजी समूह नहीं है बल्कि एक पब्लिक डोमेन है और यहां पर की जाने वाली बातचीत को सार्वजनिक मंच पर की गई बातचीत माना जाता है।

शिवालिक अपार्टमेंट्स दिल्ली रेजिडेंशियल सोसायटी के चुनाव का विवाद

दिल्ली की द्वारका कोर्ट में रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर कर्नल बी.एस. चौधरी और उनके सुपुत्र श्री जसबीर चौधरी द्वारा सन 2022 में याचिका प्रस्तुत की गई थी। इसमें बताया गया था कि, "शिवालिक फ्रेंड्स फोरम" नामक व्हाट्सएप ग्रुप में यादव द्वारा चौधरी परिवार के खिलाफ मानहानि कारक पोस्ट किए थे। यह व्हाट्सएप ग्रुप शिवालिक अपार्टमेंट्स के रहवासियों के लिए बनाया गया था। रेजिडेंशियल सोसायटी के चुनाव के दौरान यादव ने चौधरी परिवार पर आरोप लगाया था। कोर्ट में आरोप प्रत्यारोप के दौरान बताया गया कि, यादव ने चुनाव में लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से चौधरी परिवार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए "उनके आचरण का खुलासा" करते हुए कई आरोप लगाए थे। न्यायालय ने माना कि व्हाट्सएप ग्रुप में जो मैसेज पोस्ट किए गए वह चौधरी परिवार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए पर्याप्त थे क्योंकि उन्होंने भारतीय सेना में कर्नल और विशेष मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के रूप में सेवा की है और समाज में उनकी उच्च प्रतिष्ठा है।

यादव ने चौधरी परिवार पर - प्रबंधन समिति के साथ सहयोग न करने, समाज की बेहतरी के लिए काम न करने, अपनी सुविधा के लिए समाज की संपत्ति को अपने घर के पास स्थानांतरित करने, खुद और अपने बेटे द्वारा अपने घर के पास खेलने वाले बच्चों के साथ दुर्व्यवहार करने और ठेकेदार को धमकाने जैसे आरोप लगाए थे।

व्हाट्सएप ग्रुप एक पब्लिक डोमेन
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि, चूंकि ये संदेश एक ऐसे ग्रुप में भेजे गए थे जिसमें आवासीय सोसायटी के अन्य सदस्य शामिल थे, इसलिए यह 'सार्वजनिक डोमेन' में प्रकाशन के बराबर था।

अधिकार प्रतिष्ठा और संविधान का अनुच्छेद 21:

अदालत ने यह भी कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिष्ठा का एक आंतरिक अधिकार प्राप्त है, जिसे भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का एक अभिन्न अंग के रूप में मान्यता दी गई है।इसलिए, किसी को भी दूसरे व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

वाद की मांग:
  • चौधरी परिवार ने अदालत से ₹1 लाख के हर्जाने और उनके पक्ष में स्थायी निषेधाज्ञा की मांग की थी। उन्होंने उसी व्हाट्सएप ग्रुप पर एक माफी की भी मांग की थी।

अदालत का फैसला और आदेश:

द्वारका कोर्ट के सिविल जज निशांत बंगर ने अभियुक्त आर.एन. यादव को कर्नल बी.एस. चौधरी (सेवानिवृत्त) और उनके बेटे जसबीर चौधरी को बदनाम करने का दोषी पाया।
• अदालत ने आर.एन. यादव को चौधरी परिवार को ₹60,000 का हर्जाना देने का निर्देश दिया।
• आरएन यादव को उसी व्हाट्सएप ग्रुप पर बिना शर्त माफी मांगने का भी आदेश दिया गया।
• अदालत ने आरएन यादव को पिता-पुत्र की जोड़ी के खिलाफ कोई भी झूठी या मानहानिकारक पोस्ट करने से रोकते हुए स्थायी निषेधाज्ञा भी जारी की।
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