JYOTISH: यदि चंद्र ग्रहण के दौरान कोई गलती हो गई है तो क्या करें, कुंभ राशि वालों के लिए विशेष प्रायश्चित

चंद्र ग्रहण संपन्न हो चुका है। भारत सहित पूरे एशिया, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका में खग्रास चंद्र ग्रहण था। अर्थात इन क्षेत्रों में ग्रहण अपनी पूरी शक्ति पर था। सौरमंडल की प्रत्येक घटना मनुष्य को प्रभावित करती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्र ग्रहण के दौरान कुंभ सहित कुछ राशि वालों के लिए सावधानी के शास्त्रीय निर्देश थे। यदि किसी कारणवश चंद्र ग्रहण के दौरान कोई गलती हो गई है तो क्या कर सकते हैं और कुंभ राशि वालों के लिए विशेष प्रायश्चित क्या हो सकता है। ज्योतिष "आचार्य कमलांश" बता रहे हैं।

चंद्र ग्रहण के बाद घर को पवित्र करने का तरीका

याज्ञवल्क्य स्मृति और गरुड़, स्कंद एवं पद्म पुराण के अनुसार ग्रहण काल में यदि कोई नियम टूट गया है तो दोष लगता है परंतु भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। यदि आपने ग्रहण काल में कोई सामान्य त्रुटि (भोजन कर लेना इत्यादि) की है तो ग्रहण के बाद पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और अपने घर को गंगाजल से पवित्र करें। ऐसा करने से नेगेटिव पावर कमजोर हो जाएगी। “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ चंद्राय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। यदि आपकी राशि के लिए चंद्र ग्रहण हानिकारक था तो चंद्रमा बीज मंत्र  "ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः" का जाप करें। एवं प्रार्थना में क्षमा याचना करें।

सभी लोग चंद्र ग्रहण के बाद निर्धन व्यक्तियों को सफेद वस्त्र, चावल, चीनी, दूध या चांदी का दान करें।अन्नदान विशेष प्रभावी माना गया है। 

कुंभ राशि वालों के लिए विशेष प्रायश्चित

शनिदेव की शांति के लिए शनिवार को तिल-तेल का दीपक पीपल के नीचे जलाएं। चंद्र देव की शांति के लिए सोमवार को शिवलिंग पर दूध, शहद और जल चढ़ाएं।

चंद्र ग्रहण ग्रहण समाप्ति के बाद के मंत्र और पाठ

चंद्र ग्रहण की समाप्ति के बाद नीचे दिए गए मित्रों का पाठ करेंगे तो सभी प्रकार के शुभ, लाभ और समृद्धि के लिए सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होगी।

गंगाजल स्नान मंत्र
ॐ गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥
(स्नान के समय)

शांति मंत्र
ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः।
पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः॥
वनस्पतयः शान्तिर्विश्वे देवा शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः।
सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि॥
(मानसिक और पारिवारिक शांति के लिए)

महामृत्युंजय मंत्र (सर्वदोष निवारण हेतु)
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
(ग्रहण दोष, रोग और भय दूर करने हेतु 108 बार जाप करें)

अनुशंसित पाठ
शिव चालीसा या विष्णु सहस्रनाम (यदि समय और श्रद्धा हो)
अध्याय 12, 15 या 18 – श्रीमद्भगवद्गीता (संक्षिप्त पाठ का फल भी बड़ा बताया गया है)

विशेष दान के साथ मंत्र
तिल दान के समय: “ॐ शं शनैश्चराय नमः” 
चावल या दूध दान के समय: “ॐ चन्द्राय नमः” 

डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल याज्ञवल्क्य स्मृति और गरुड़, स्कंद एवं पद्म पुराण में आस्था रखने वाले लोगों के लिए है। इन सभी उपाय को प्रमाणित करने के लिए आधुनिक वैज्ञानिकों ने कोई प्रयोग नहीं किया है।
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