Madhya Pradesh में आउटसोर्स कर्मचारी का तीन दिवसीय घेरा डालो-डेरा डालो आंदोलन

Bhopal Samachar
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भोपाल
: आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा का कहना है कि, 7 सितंबर से तीन दिवसीय घेरा डालो-डेरा डालो आंदोलन किया जाएगा। पहले दिन 7 सितंबर को धरना, प्रदर्शन और रैली होगी। दूसरे दिन 8 सितंबर को डीपीआई, विकास भवन, एनएचएम, सतपुड़ा, वल्लभ भवन सहित विभिन्न विभागीय कार्यालयों पर धरने होंगे। तीसरे दिन 9 सितंबर को श्रम एवं पंचायत मंत्री प्रह्लाद पटेल, शिक्षा मंत्री उदय प्रताप, स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल, जनजातीय कल्याण मंत्री शाह, आयुष एवं उच्च शिक्षा मंत्री परमार सहित अन्य विभागीय मंत्रियों के बंगलों पर धरना दिया जाएगा।  

समान काम-समान वेतन के कानून को भुला दिया गया है

श्री शर्मा ने कहा कि, नौकरी में सुरक्षा और सम्मानजनक वेतन का सपना देख रहे लाखों युवा श्रमिक कर्मचारियों के साथ लगातार धोखा हो रहा है। सरकार द्वारा लागू आउटसोर्स और अस्थायी नियुक्ति व्यवस्था ने उनके भविष्य को अंधकारमय बना दिया है। समान काम-समान वेतन के कानून को भुला दिया गया है। श्रम कानूनों में संशोधन करके सरकार ने वेतन और काम के घंटे तय करने का अधिकार कंपनियों, ठेकेदारों और अधिकारियों को सौंप दिया है। इतना ही नहीं, श्रमिक कर्मचारी वर्ग से धरना, प्रदर्शन और हड़ताल जैसे लोकतांत्रिक अधिकार छीनकर उन्हें निहत्था कर दिया गया है।  

घेरा डालो-डेरा डालो आंदोलन की तैयारियों की जानकारी देते हुए ऑल डिपार्टमेंट अस्थायी, आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने बताया कि आर्थिक अन्याय का शिकार कर्मचारी आर-पार के संघर्ष की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें 25 से अधिक विभागीय संगठन शामिल होंगे।  

ग्राम पंचायतों और स्कूल-छात्रावासों के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे, सूचना दे दी गई है।  
ग्राम पंचायतों के भवनों की सुरक्षा में तैनात पंचायत चौकीदार, चपरासी, सफाई कर्मी और पंप ऑपरेटर, जो नौकरी में सुरक्षा, सम्मानजनक वेतन और विभागीय संविलियन की मांग को लेकर दशकों से संघर्षरत हैं, आज भी अस्थायी व्यवस्था की मार झेल रहे हैं। गांव-गांव में पंचायत व्यवस्था के आधारस्तंभ होने के बावजूद इन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया और इनसे महज 3-4 हजार रुपये में काम कराया जा रहा है।  

स्कूलों और छात्रावासों के अंशकालिक कर्मचारियों ने हड़ताल कर अपनी मांगें उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। इस दौरान छात्रावासों में भोजन उपलब्ध नहीं होगा, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी स्कूलों के ताले नहीं खोलेंगे और सफाई भी नहीं करेंगे। मध्याह्न भोजन भी प्रभावित रहेगा। इन कर्मचारियों को सरकार मात्र 4-5 हजार रुपये वेतन देती है, जबकि शासन का न्यूनतम वेतन 12,500 रुपये है, जो इन्हें नहीं मिलता।  

युवाओं के साथ दोहरा अन्याय  

राज्य सरकार हर वर्ष नई-नई योजनाएं शुरू करती है, लेकिन उन योजनाओं में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन और भविष्य की कोई चिंता नहीं की जाती। सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन 12,500 से 16,800 रुपये है, लेकिन हकीकत में कर्मचारियों को इसका आधा भी नहीं मिलता। यह वेतन चोरी है, जिसे बंद करना होगा। वेतन चोरी का मुद्दा भी आंदोलन के दौरान प्रमुखता से उठेगा।  

आउटसोर्स प्रथा ने ठेकेदारों को मालामाल कर दिया है

आउटसोर्स प्रथा ने प्रदेश में ठेकेदारों को मालामाल कर दिया है। कर्मचारियों का हक का पैसा काटकर ठेकेदार अपनी जेबें भर रहे हैं। ठेका कंपनियां वेतन का बड़ा हिस्सा हड़प लेती हैं और कर्मचारियों को महज कुछ हजार रुपये थमा देती हैं। यह पूरी प्रक्रिया सरकारी संरक्षण में चल रही है, जबकि विभागीय कार्य स्थायी प्रकृति के हैं।  

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी  
माननीय सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि सरकारी विभागों में स्थायी कार्यों के लिए स्थायी कर्मचारियों की भर्ती अनिवार्य है। ठेका और आउटसोर्स के जरिए लंबे समय तक कार्य लेना असंवैधानिक है और यह कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों का हनन है। अदालत के इस फैसले ने प्रदेश के युवाओं में उम्मीद जगाई है। अब सरकार को कार्यरत अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारियों को लघु कैडर बनाकर विभाग में संविलियन कर नौकरियों को नियमित करना चाहिए।  

20 साल से रुकी नियमित भर्तियां, चपरासी तक की भर्ती नहीं  

मध्यप्रदेश इकलौता ऐसा राज्य है, जहां पिछले 20 वर्षों से तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की नियमित भर्तियां बंद हैं। सबसे अधिक नौकरियां इन्हीं श्रेणियों में निकलती थीं, जो गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए थीं। इन्हें खत्म कर आउटसोर्स और अस्थायी प्रथा लागू कर दी गई है।  

विधानसभा में भी उठा मुद्दा  

विधानसभा के मानसून सत्र में पहली बार विपक्ष के कई विधायकों ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और वाकआउट तक किया। यह साफ संकेत है कि सरकार के खिलाफ कर्मचारियों का आक्रोश अब सड़कों पर उतरेगा।  

7 सितंबर के प्रदर्शन में कौन-कौन शामिल होगा

अन्याय और शोषण के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई छिड़ने जा रही है। 7 सितंबर को भोपाल के नीलम पार्क में सुबह 11 बजे से महाआंदोलन शुरू होगा। इसमें कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. अमित सिंह, पंचायत चतुर्थ श्रेणी अध्यक्ष राजभान रावत, यशवंत गेडाम, अंशकालिक अध्यक्ष उमाशंकर पाठक, आदिम जाति अंशकालिक अध्यक्ष मनोज उईके, नरेश प्रजापति, स्वच्छाग्राही अध्यक्ष पवन परमार, राजस्व सर्वेयर अध्यक्ष वीरेंद्र गोस्वामी, युवा आउटसोर्स दीपक सिंह, डायल-100 अध्यक्ष विक्रम राजोरिया, पशु चिकित्सा अध्यक्ष राजेश धौलपुरे, जन स्वास्थ्य अध्यक्ष बृजेश पांडे, मनरेगा मेठ अध्यक्ष संजय झारिया आदि नेताओं की अगुआई में 25 हजार से अधिक पंचायत चौकीदार, अंशकालिक, स्वच्छाग्राही, राजस्व सर्वेयर, कंप्यूटर ऑपरेटर, बिजली विभाग, अस्पताल-मेडिकल कॉलेजों के आउटसोर्स कर्मी, टेलीमेडिसिन, योग प्रशिक्षक, आयुष विभाग, निर्वाचन विभाग के आउटसोर्स और अंशकालिक कर्मचारी तथा मनरेगा मेठ संगठन शामिल होंगे।  
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