अंशुल मित्तल, ग्वालियर | थाटीपुर क्षेत्र में बनी एक अवैध इमारत का मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। जिसके तारतम्य में निगम कमिश्नर को हाईकोर्ट ने अवमानना नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता की अपील पर सुनवाई करते हुए 25 जून को आदेश जारी किया था जिसमें अवैध निर्माण हटाने के लिए नगर निगम को चार सप्ताह का समय दिया गया था। क्षेत्र के भवन अधिकारी, राकेश कश्यप ने हाईकोर्ट के आदेश को दरकिनार कर दिया था।
पूरा मामला एक नजर में
मामला जोन 10 वार्ड 22 का है जहां राहुल शर्मा ने निगम अफसरों से सांठ-गांठ कर एक ही प्लॉट पर कई भवन निर्माण मंजूरी हासिल कर ली। यह सभी भवन अनुज्ञा रेजिडेंशियल उपयोग के लिए जारी की गई थी लेकिन यहां 25 फ्लैट की मल्टी स्टोरी और कई कमर्शियल दुकाने अवैध तरीके से बना दी गईं। अवैध बिल्डिंग बनाने के दौरान पड़ोस में रहने वाली श्रीमती राधा तोमर के मकान को बुरी तरह क्षतिग्रस्त किया गया, जिससे उनके मकान में गहरी दरारें आ गई और परिवार को जान का संकट गहरा गया। राधा तोमर ने कई लिखित शिकायत है निगम अफसरों को दीं। शिकायतों पर निगम अफसरों ने कोई संज्ञान नहीं लिया, इसके बाद राधा तोमर ने न्यायालय की शरण ली। हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना के मामले में पिटीशनर राधा तोमर की ओर से, एडवोकेट पालेंद्र सिंह दांगी ने न्यायालय में पैरवी की। इसके बाद 28 अगस्त 2025 को, निगमायुक्त संघ प्रिय के विरुद्ध हाईकोर्ट से अवमानना नोटिस जारी किया गया।
भवन अधिकारी ने सरकारी जमीन भी लगवाई ठिकाने
भवन अधिकारी राकेश कश्यप का यह इकलौता कारनामा नहीं है। वार्ड क्रमांक 28 में, थाटीपुर थाने के पास, ग्राम मेहरा, सरकारी सर्वे नंबर 307 की जमीन को भी इनके द्वारा ठिकाने लगा दिया गया था। जिसके लिए उनके सहयोगियों ने पटवारी पंकज भार्गव के फर्जी हस्ताक्षर कर, नजरी नक्शा तैयार किया और ऐसे ही कुछ अन्य कूटरचित दस्तावेजों को आधार बनाकर भवन अधिकारी राकेश कश्यप ने भवन निर्माण मंजूरी जारी कर दी।
कमिश्नर तक पहुंचा था पूरा मामला, कृपा के चलते नहीं हुई कार्रवाई
गौरतलब है कि जिस पटवारी पंकज भार्गव के फर्जी हस्ताक्षर कर कूटरचित दस्तावेज बनाए गए वह पटवारी ग्वालियर नगर निगम मुख्यालय में ही पदस्थ हैं। यदि भवन अधिकारी राकेश कश्यप पर अफसरों की विशेष कृपा नहीं होती तो, दूध का दूध और पानी का पानी किया जाना बेहद आसान था। इसके अलावा वार्ड 28 की इस मंजूरी के आर्किटेक्ट राघवेंद्र कुशवाहा ने भी लिखित शिकायत देते हुए इस मंजूरी को फर्जी बताया था।
निगम अफसरों की यह सांठ-गांठ और फर्जीवाड़े की कार्यप्रणाली जहां एक तरफ आमजन के लिए सरदर्द बनी हुई है वहीं कई बार हाईकोर्ट में भी नगर निगम की छीछालेदर हो चुकी है। लेकिन नगर निगम के अफसर विभाग को नरक निगम बनने पर आमादा हैं।
इनका कहना है
राहुल शर्मा द्वारा वार्ड 22 में अवैध रूप से बिल्डिंग का निर्माण किया गया। जिस कारण मेरे क्लाइंट का मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। बीते दिनों न्यायालय ने नगर निगम को आदेश दिया था कि अवैध निर्माण हटाए जाए लेकिन नगर निगम ने उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना की जिसके बाद हाईकोर्ट ने नगर निगम कमिश्नर को अवमानना नोटिस जारी किया है। एड. पालेंद्र सिंह दांगी, अधिवक्ता उच्च न्यायालय, ग्वालियर खंडपीठ