गणेश उत्सव के दौरान भगवान श्री गणेश को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं और भोग लगाया जाता है परंतु क्या आप जानते हैं कि भगवान श्री गणेश को भोग में सामान्यतः मोदक ही क्यों अर्पित किए जाते हैं, तो चलिए आज 1 मिनट से भी कम समय में यही पता लगाने की कोशिश करते हैं।
मोदक की कहानी - MODAK STORY
"मोदक: शब्द मराठी भाषा से आया है जिसे संस्कृत में मोदकम कहा जाता है और हिंदी में सामान्यतः लड्डू कहा जाता है। यह एक भारतीय मीठा व्यंजन है जो हिंदू और बौद्ध मान्यताओं के अनुसार श्री गणेश और महात्मा बुद्ध के पसंदीदा व्यंजनों में से है, इसीलिए इसका उपयोग प्रार्थना में अक्सर किया जाता है। जिसमें मुख्य रूप से गेहूं या चावल का का आटा या मैदा नारियल, गुड या शक्कर का प्रयोग किया जाता है जिसका उत्पत्ति स्थान भारत ही है। MOMOS की तरह मोदक का भी STEAMED और FRIED VERSION उपलब्ध है।
मोदक से जुड़ी पौराणिक कथा - MYTHOLOGICAL STORY BEHIND MODAK
भगवान श्री गणेश को मोदक क्यों पसंद है इसके पीछे कई कथाएं और मान्यताएं हैं लेकिन एक प्रमुख कथा है कि एक बार देवताओं ने भगवान श्री गणेश और कार्तिकेय की बुद्धिमत्ता की परीक्षा लेने के लिए एक प्रतियोगिता का आयोजन किया था इस प्रतियोगिता के अनुसार तय किया गया था कि जो पूरी दुनिया का चक्कर सबसे पहले लगाकर वापस आएगा वही विजेता होगा तो कार्तिकेय तो अपना वाहन मोर लेकर उसे पर सवार हो गए और पूरी दुनिया का चक्कर लगाने के लिए निकल पड़े पर गणेश जी ने थोड़ा सा लॉजिक लगाया और उन्होंने अपनी सूझबूझ से माता पार्वती और भगवान शिव जो कि स्वयं ब्रह्मांड के प्रतीक है ,उनकी परिक्रमा करके जीत हासिल की उनकी इसी चतुराई से प्रभावित होकर देवताओं ने उन्हें मोदक का भोग अर्पित किया जिसे भगवान श्री गणेश ने अत्यंत प्रसन्नता के साथ ग्रहण किया।