समाचार का शीर्षक आपका ध्यान आकर्षित करने के लिए है, क्योंकि आपको बताना है कि, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बार फिर क्राइम और क्रिमिनल्स काफी पावरफुल हो गए हैं। कोई अपने नाम के साथ मछली और कोई अपने नाम के साथ बकरी लग रहा है। इस तरह के नाम रखे जा रहे हैं कि लोग कंफ्यूज हो जाए। लेटेस्ट न्यूज़ मिली है कि मछली परिवार से संबंधित एक व्यक्ति द्वारा, जिसके नाम के साथ बकरी लगाया जाता है। खिलाड़ियों के लिए जारी होने वाले कम से कम 1 लाख कारतूस का अवैध उपयोग किया गया है। कहा जा रहा है कि, इन कारतूसों का उपयोग शिकार के लिए किया गया है।
भोपाल में बड़ा कारतूस घोटाला
भोपाल में बड़ा कारतूस घोटाला सामने आया है। यहां शूटिंग अकादमी से जुड़े खिलाड़ियों के नाम पर हर साल लगभग 31 लाख कारतूस आवंटित किए जाते हैं परंतु इसके बाद इनका कोई हिसाब किताब नहीं होता। खिलाड़ियों ने आवंटित कारतूस का क्या किया, कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता। पुलिस डिपार्टमेंट में क्रिमिनल से लड़ते हुए फायरिंग करने के बाद पुलिस अधिकारी को प्रत्येक चलाई गई गोली का हिसाब, सबूत और खाली खोखा जमा करवाना पड़ता है। लेकिन खेल के मैदान में तसल्ली से खेलने वाले खिलाड़ियों से, कारतूस का कोई हिसाब नहीं मांगा जाता है। यह पॉलिसी ही घोटाला है। इस घोटाले में एक तरफ शिकारी तो दूसरी तरफ सरकार शामिल है।
अपने लाइसेंस पर बंदूक खरीदी और ब्लैकमेलर मछली को दे दी
पुलिस और प्रशासन की जांच में पता चला है कि परवलिया इलाके में एक बकरी फार्म के अंदर आर्यन शूटिंग अकादमी का संचालन किया जा रहा था। "बकरी फार्म" तो इसलिए बनाया था ताकि कोई जांच पड़ताल ना करें। इस शूटिंग अकादमी के संचालक सैयद शारिक बुखारी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। सैयद शारिक बुखारी की फैमिली में चार लोगों के पास शूटिंग लाइसेंस है। 2017 में सैयद शारिक बुखारी ने एक विदेशी सेमी ऑटोमेटिक बंदूक खरीदी थी। 2022 में उसने विदेशी बंदूक को अवैध रूप से शाहिद मछली को दे दिया। पुलिस ने बताया कि इस बंदूक का उपयोग शाहिद मछली ने लोगों को डराने और शिकार करने के लिए किया।
भोपाल कारतूस घोटाले की जांच की तो कई तोप खराब हो जाएंगी
भोपाल में बड़ी-बड़ी पॉलीटिकल तोप स्थापित है। सूत्रों का कहना है कि यदि भोपाल कारतूस घोटाले की जांच की तो कई सारी तोप खराब हो जाएंगी। क्योंकि इस घोटाला में भी वह सब कुछ हुआ है जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती:-
- जो खिलाड़ी बीमार था उसके नाम से कारतूस आवंटित हो गए।
- जो खिलाड़ी बूढ़ा हो गया है और अब बंदूक नहीं उठा पाता, उसके नाम से कारतूस आवंटित हो रहे हैं।
- कई खिलाड़ी जब भोपाल में नहीं थे, सरकारी रिकॉर्ड में कारतूस रिसीव कर रहे थे।
चलते-चलते यह बताना भी जरूरी है कि पहले खेल मंत्रालय श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया के पास था और अब श्री विश्वास कैलाश सारंग के पास है। वही विश्वास सारंग जिनका फोटो शारिक मछली के साथ वायरल हुआ था।