Wildlife प्रेमियों के लिए गुड न्यूज़, दुर्लभ Caracal सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ

Bhopal Samachar
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Wildlife प्रेमियों के लिए गुड न्यूज़ है। मध्य प्रदेश के गांधी सागर वन्य प्राणी अभ्यारण में दुर्लभ प्रजाति का जानवर "स्याहगोश" देखा गया है। Biodiversity की दृष्टि से यह बहुत महत्वपूर्ण बात है। पढ़िए इस विषय पर पत्रकार राजेश जयंत की रिपोर्ट:- 

Gandhi Sagar Wildlife Sanctuary: Rare species, Syahgosh

मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में स्थित गांधी सागर वन्य प्राणी अभयारण्य एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में यहाँ दुर्लभ प्रजाति के स्याहगोश (caracal) की उपस्थिति camera trap के जरिए दर्ज की गई है।Caracal एक जंगली बिल्ली है, जो अफ्रीका, मध्य पूर्व और मध्य एशिया में पाई जाती है। यह मध्यम आकार की होती है और इसके विशिष्ट लक्षण हैं - लंबे, काले, गुच्छेदार कान और लाल-भूरे रंग का कोट। Caracal को desert lynx भी कहा जाता है। भारत में यह प्रजाति अब endangered मानी जाती है और इसकी मौजूदगी बेहद दुर्लभ है। स्याहगोश एक शर्मीला, तेज दौड़ने वाला और मुख्यतः रात्रिचर मांसाहारी वन्य प्राणी है, जो आमतौर पर शुष्क, झाड़ीदार और पथरीले इलाकों में पाया जाता है।  

Safe haven for rare species 

गांधी सागर अभयारण्य के वन अधिकारियों ने बताया कि camera trap में एक वयस्क नर caracal की तस्वीर आना biodiversity के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। यह इस बात का प्रमाण है कि अभयारण्य में संरक्षित आवासों की गुणवत्ता और conservation के प्रति प्रतिबद्धता बरकरार है। यहाँ का शुष्क और अर्द्ध-शुष्क ecosystem इतना समृद्ध और संतुलित है कि यह दुर्लभ प्रजातियों को भी सुरक्षित आश्रय दे सकता है।  

मध्यप्रदेश में कई वर्षों बाद संरक्षित क्षेत्र में caracal की पुष्टि होना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। यह उपलब्धि न केवल wildlife शोध के लिए अहम है, बल्कि wildlife conservation प्रयासों की सफलता का भी प्रतीक है। 

Caracal की lifestyle

Caracal की lifestyle भी काफी रोचक है। यह मुख्यतः रात में शिकार करता है और अपनी तेज रफ्तार के लिए जाना जाता है। इसके कानों के ऊपर काले रंग के बालों की लंबी झुंड होती है, जिससे इसकी पहचान आसान होती है। यह प्रजाति आमतौर पर छोटे स्तनधारियों, पक्षियों और सरीसृपों का शिकार करती है। स्याहगोश का फिर से मिलना यह दर्शाता है कि यदि प्रकृति को सही conservation मिले, तो endangered प्रजातियाँ भी सुरक्षित रह सकती हैं।
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