LIC मैनेजर की पहलगाम आतंकी हमले में हुई हत्या की कहानी, पत्नी सरकारी स्कूल शिक्षक

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मध्य प्रदेश के इंदौर में शासकीय स्कूल में महिला शिक्षक के पति एवं भारतीय जीवन बीमा निगम अलीराजपुर ब्रांच के मैनेजर सुशील नथानियल, उन लोगों में शामिल है जिन्हें पहलगाम में आतंकवादियों ने बिना किसी कारण के मार दिया। सुशील खुद आतंकवाद का शिकार हो गए परंतु बड़ी चतुराई के साथ अपनी पत्नी और दोनों संतानों को आतंकवादियों के टारगेट से बचा लिया। वह एक बहादुर इंसान थे। उनके दादाजी ने द्वितीय विश्व युद्ध में लड़ाई लड़ी थी। 

परिवार के साथ यादें संजोने के लिए कश्मीर गए थे

सुशील के छोटे भाई की पत्नी जैमा विकास ने बताया कि पूरा परिवार बाहर रहता है। कुछ दिन साथ रह सकें, इसलिए वे साथ घूमने गए थे। कल हमले के बाद बेटे ऑस्टिन का फोन आया तो कहा, "आतंकियों ने पापा से बोला- कौन से धर्म के हो?" तब हम सब चुपचाप खड़े रहे। फिर आतंकी ने कहा, "कलमा पढ़ सकते हो?" ये सुनकर पापा ने हम सबको वहां से जाने के लिए कहा।

जैसे ही ईसाई कहा, उसने गोली मार दी

फिर आतंकी ने पापा को घुटनों के बल पर बैठने को कहा। पापा वैसे नहीं बैठ सके जैसे कलमा पढ़ने के लिए बैठा जाता है। तब आतंकवादी ने पापा से पूछा, "कौन से धर्म के हो?" पापा ने जैसे ही ईसाई कहा, उसने पापा को गोली मार दी। एक गोली कुछ दूर खड़ी बहन आकांक्षा के पैर में भी लगी। फायरिंग के बाद आतंकी वहां से भाग गए। हम पापा के पास पहुंचे, तब तक उनकी जान जा चुकी थी। 

सुशील ने अपनी जान देकर परिवार को बचाया 

आपराधिक मामलों की विशेषज्ञ इंस्पेक्टर रमेश कबीर ने बताया कि, सुशील की कहानी से स्पष्ट होता है कि वह पहली बार में ही समझ गए थे। सामने आतंकवादी खड़े हैं और जिंदा बचना मुश्किल है। सुशील ने बड़ी चतुराई के साथ आतंकवादियों को अपनी बातों में उलझाया और परिवार को आतंकवादियों के टारगेट से दूर कर दिया। यह घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि सुशील ने अपनी जान देकर अपने परिवार की जान बचाई।

सुशील के दादाजी ने द्वितीय विश्व युद्ध में लड़ाई लड़ी थी

सुशील की जोबट (आलीराजपुर) की रहने वाली बुआ इंदु डावर ने बताया कि सुशील के दादाजी सेकेंड वर्ल्ड वॉर में सैनिक थे। पहले हम सब लोग साथ में रहते थे। लेकिन जैसे-जैसे नौकरियां लगती गईं, सब यहां से जाते गए। सुशील के पिता 87 साल के हैं। पिता को कम सुनाई देता है, इस वजह से सुशील हमेशा उनके साथ रहते थे। सुशील हमेशा कहते थे, "जीवन में आए हैं तो कुछ अच्छा करके जाना चाहिए।" वह अपना काम मेहनत व लगन से करते थे। 

कलेक्टर ने कहा- शव को एयरलिफ्ट कर इंदौर लाएंगे

कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा- हम श्रीनगर के स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हैं। परिवार के दूसरे सदस्य ठीक हैं। उन्हें प्राथमिक चिकित्सा दी गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव भी लगातार अपडेट ले रहे हैं। शव को एयरलिफ्ट करके इंदौर लाया जाएगा।

आलीराजपुर में एलआईसी में मैनेजर थे सुशील, पत्नी इंदौर में टीचर

सुशील आलीराजपुर के एलआईसी की सैटेलाइट ब्रांच में पदस्थ थे। वे चार दिन पहले ही 21 साल के बेटे ऑस्टिन, बेटी आकांक्षा (30) और पत्नी जेनिफर के साथ कश्मीर गए थे। जेनिफर खातीपुरा के सरकारी स्कूल में टीचर हैं। बेटी आकांक्षा सूरत में बैंक ऑफ बड़ौदा में कार्यरत हैं। वहीं, बेटा ऑस्टिन बैडमिंटन प्लेयर है। परिवार मूल रूप से जोबट का रहने वाला है। 

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