Google AI - मोगली की तरह आप भी पशु पक्षियों से बात कर पाएंगे, पहला प्रयोग सफल

Bhopal Samachar
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) की मदद से जल्द ही इंसान वह सब कुछ करने लगेंगे, जो दादी और नानी की कहानियों में हुआ करता था। बहुत जल्द हम इंसान धरती के जानवरों, हवा में उड़ने वाले पक्षियों और पानी में रहने वाली मछलियों से बात कर सकेंगे, बिल्कुल वैसे ही जैसे जंगल बुक का मोगली करता था।

डॉल्फिन के साथ पहला प्रयोग सफल

गूगल के इंजीनियर एक ऐसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) प्रोग्राम पर काम कर रहे हैं, जो इंसानों और जीव-जंतुओं के बीच कम्युनिकेशन (Communication) का माध्यम हो सकता है। इस प्रोजेक्ट में उन्हें पहली सफलता मिल चुकी है। उन्होंने डॉल्फिन को एक संदेश भेजा और डॉल्फिन ने प्रतिक्रिया दी। सामान्य तौर पर, हम अपने पालतू पशुओं से कम्युनिकेशन (Communication) करते हैं, उन्हें कोई आदेश देते हैं और वे उसका पालन करते हैं। लेकिन यह बहुत सीमित कम्युनिकेशन है, जो प्रशिक्षण के बाद आता है। गूगल के इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) प्रोजेक्ट के सफल होने पर आप अपने पालतू पशु से पूछ सकेंगे कि आज का दिन कैसा रहा। वह आपको बता सकेगा कि उसे आज क्या खाने का मन है। जरा सोचिए, कैसा लगेगा जब एक चिड़िया आपको बताएगी कि उसने बगीचे में एक नया फूल खिलते देखा है। 

कबूतर जासूसी करेगा, सांप टारगेट बताएगा

पुराने जमाने में कबूतर संदेश लाने और ले जाने का काम करते थे। इस प्रोजेक्ट के सफल होने पर कबूतर जासूसी (Spying) कर सकेंगे। वे पापा को बता देंगे कि उनका बेटा आज कॉलेज के क्लासरूम में नहीं, बल्कि किसी दूसरे कमरे में था। कारगिल जैसे युद्ध में एक सूचना के लिए हमें अपने सिपाहियों की जान की बाजी नहीं लगानी पड़ेगी। कोई सांप पहाड़ पर चढ़कर जाएगा और लौटकर बता देगा कि किस लोकेशन पर बंकर बना है और उसके अंदर कितने पाकिस्तानी सिपाही हैं। 

इस प्रोजेक्ट का नाम CHAT (Cetacean Hearing and Telemetry) है जो जॉर्जिया टेक में स्टार्नर की टीम द्वारा विकसित किया गया है। यह अकेला प्रोजेक्ट नहीं है जो इस दिशा में काम कर रहा है। CETI (Cetacean Translation Initiative) प्रोजेक्ट के तहत कौवों और स्पर्म व्हेल से बातचीत करने का प्रयास किया जा रहा है।

क्या पशु पक्षियों के पास भाषा होती है

हालांकि, भाषा विशेषज्ञ जूलॉजिस्ट एरिक केर्शेनबाउम का कहना है कि यह लगभग असंभव है, क्योंकि पशु पक्षियों के पास भाषा (Language) नहीं है। वे आपके संकेतों को समझ सकते हैं और आपको संकेत दे सकते हैं, लेकिन आपसे बातचीत नहीं कर सकते। वे आपके सवालों का जवाब नहीं दे सकते और न ही इंसानों की तरह गपशप कर सकते हैं। इस पृथ्वी पर, हम इंसानों के अलावा किसी भी जीवित प्राणी के पास भाषा (Language) नहीं है। पशु-पक्षी आपस में संकेतों के माध्यम से ही कम्युनिकेशन (Communication) करते हैं। हमारे विज्ञान के पास अभी तक ऐसी कोई जानकारी नहीं है, जो प्रमाणित करती हो कि जानवर या पक्षी इंसानों की तरह आपस में बात कर सकते हैं। 

क्या मानव इतिहास में ऐसा पहले कभी हुआ है 

हम इंसानों के पास फिलहाल जो प्रमाणित इतिहास उपलब्ध है उसमें ऐसा कभी नहीं हुआ है परंतु मानव सभ्यता की कुछ प्राचीन कथाओं में इस प्रकार का उल्लेख मिलता है- 
  • रामायण में जटायु पक्षी और भालू-वानरों के साथ श्री राम एवं लक्ष्मण के संवाद का प्रसंग आता है। 
  • बाइबल में भी एक कहानी है जब एक जानवर अपने मालिक से बात करता है। 
  • ईडन गार्डन में एक सांप ने इंसानों से बात की थी। 
  • ग्रीक में उल्लू को बुद्धि का प्रतीक माना गया है, और यह भी बताया गया है कि कुछ विशेष पक्षी एवं जानवर, देवताओं का संदेश लेकर मनुष्य के पास आते थे। 
  • इसके अलावा हजारों पौराणिक कथाएं हैं जिसमें मनुष्य और पशु पक्षियों के बीच में संवाद के प्रसंग है। 

इस प्रोजेक्ट का अंत जो भी हो, यह कल्पना अपने आप में रोमांचकारी है। हम भी जंगल बुक के मोगली की तरह अपनी भाषा में पशु-पक्षियों से बात कर पाएंगे। भालू हमें आयुर्वेद (Ayurveda) सिखाएगा और हम हाथियों से इतिहास (History) पूछ सकेंगे। 

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