MP SCHOOL SHIKSHA - शिक्षकों को टारगेट, 10 दिन में कोर्स पूरा करवाएं, अन्यथा कार्रवाई

Bhopal Samachar
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मध्य प्रदेश लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल ने मध्य प्रदेश के योग्य और विद्वान शिक्षकों पर डंडा चला दिया है। एक आदेश जारी किया गया है जिसमें बताया गया है कि कक्षा 10 के जिन स्कूलों में कोई भी शिक्षक अथवा अतिथि शिक्षक नहीं है, उनमें पड़ोस के स्कूल का योग्य और विद्वान शिक्षक संलग्न कर दिया जाए। वह अपनी कक्षा के साथ पड़ोस वाले स्कूल में सप्ताह में दो दिन यानी महीने में सिर्फ 8 दिन पढ़ाएगा। आदेश में लिखा है कि यदि शिक्षक पढ़ाने से मना करें तो उसके खिलाफ कार्रवाई करना। प्रभार वाले स्कूल में भी अटेंडेंस लगाना, और यह सुनिश्चित करना है की परीक्षा से पहले कोर्स पूरा हो जाए। पुराने आदेश में लिखा है कि उसकी अपनी क्लास का रिजल्ट बिगड़ जाए तो उसके खिलाफ कार्रवाई कर देना।

मध्य प्रदेश के सरकारी हाई स्कूलों में अतिथि शिक्षक तक नहीं है 

शिक्षकों एवं अतिथि शिक्षकों के प्रति शत्रुता की भावना रखने वाले मध्य प्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने शिक्षा की व्यवस्था को सुधारने की दिशा में कोई काम नहीं किया। अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने दी। शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण के नाम पर भी क्या किया गया है, रिकॉर्ड अपने आप में प्रमाण है। इस साल भी स्कूल शिक्षा विभाग का सिस्टम फेल हो गया है, लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल में अपर संचालक समग्र शिक्षा अभियान सेकेंडरी एजुकेशन राजीव सिंह तोमर द्वारा समस्त संभागीय संयुक्त संचालक लोक शिक्षण, जिला शिक्षा अधिकारी एवं सभी सरकारी हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य के नाम जारी पत्र दिनांक 6 जनवरी 2025, इस बात को प्रमाणित करता है। राजीव सिंह तोमर ने पत्र में लिखा है कि, आगामी माह में कक्षा 10वी की बोर्ड परीक्षाएं प्रारंभ हो रही है। अतः कक्षा 10वी में अध्ययनरत विद्यार्थियों के शिक्षण सहयोग हेतु तथा परीक्षा परिणाम में वृद्धि हेतु अनुपलब्ध शिक्षकों की व्यवस्था निम्नानुसार की जाए:- 

ऐसी शालाएं जहाँ विषयमान से शिक्षक, अतिथि शिक्षक नहीं है 

एक परिसर एक शाला वाले स्कूलों की प्राथमिक / माध्यमिक शालाओं के स्नातक/ स्नातकोत्तर उपाधि धारी शिक्षकों का उपयोग हाई/हायरसेकेण्डरी में विषय अध्यापन हेतु अनिवार्यतः किया जाये। ऐसे शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाये जहाँ स्कूलों की आपस में साझेदारी हो सकती है। उदाहरण के लिये यदि एक स्कूल में गणित के शिक्षक उपलब्ध है, किन्तु अंग्रेजी के नही है, जबकि निकटस्थ किसी स्कूल में अंग्रेजी के शिक्षक उपलब्ध है किन्तु गणित के नहीं, ऐसी स्थिति में दोनों स्कूलों के विषय शिक्षकों की सेवायें साझा कर ली जायें। विषय शिक्षण की इस साझेदारी व्यवस्था कराने को प्राथमिकता दी जाये। 

जहाँ साझेदारी न हो सके वहाँ भी शिक्षक व्यवस्था अन्य विद्यालयों से विषयमान से पूर्ण की जाये। उपरोक्त व्यवस्था में शिक्षकों को सप्ताह में 04 दिवस अपने विद्यालय में तथा 02 दिवस निकट के विषय शिक्षक विहीन विद्यालय में सेवायें देनी होगी। संबंधित दोनों विद्यालय (शिक्षक की मूल शाला तथा आवंटित शाला दोनों) के लिए इस व्यवस्था को ध्यान में रखकर उचित प्रकार से समय-चक्र निर्धारित करेंगे तथा संबंधित विषय के शिक्षक अपनी मूल शाला एवं आवंटित शाला दोनों स्थानों पर अपने विषय का पठनपाठन पूर्ण करायेंगे। अर्थात मूल शाला भी प्रभावित न हो यह भी सुनिश्चित किया जायेगा। 

मदद मांगने के स्थान पर धमकी दी जा रही है 

स्पष्ट हो चुका है कि लोक शिक्षण संचालनालय की गलती के कारण स्कूलों में शिक्षक नहीं है। इसके बावजूद अपर संचालक राजीव सिंह तोमर ने शिक्षकों से मदद मांगने के स्थान पर धमकी दी है। अपने पत्र में लिखा है कि, जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा इस संबंध में आदेश जारी किये जाएंगे। इन शिक्षकों की उपस्थिति दोनों स्कूलों में ली जावे तथा निर्देश का पालन न करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जावे। इस प्रकार की गई व्यवस्था में प्रयुक्त शिक्षक को नियमानुसार माह में न्यूनतम 10 दिवस की अन्य शाला में उपस्थिति के लिए आवागमन व्यय 'रेमिडयल टीचिंग मद' से रू 1500 प्रतिमाह दिया जायेगा। 

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