इंडस्ट्रियल डिमांड के बावजूद MP SISF में आधे से ज्यादा पद रिक्त - MP employment news

Bhopal Samachar
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मध्य प्रदेश में पद रिक्त होने के बावजूद वैकेंसी ओपन नहीं करने का कारण, बजट नहीं बल्कि कुछ और है। MP SISF की भारी इंडस्ट्रियल डिमांड है। एक भी कर्मचारी सरकार पर बोझ नहीं है। अभी जितने सैनिक हैं उनका 4X भी भर्ती कर दिया जाए तो डिमांड पूरी नहीं होगी इसके बावजूद वैकेंसी ओपन नहीं की जा रही है। 

मंत्री और अधिकारी, MP SISF की तरफ कोई देखने को तैयार नहीं है

मध्य प्रदेश में राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल (एसआइएसएफ) की दो बटालियन अलग-अलग समय में बनाई गई थीं। एसआइएसएफ की प्रत्येक की क्षमता 1200 की है, लेकिन उनमें आधे पद अभी भी रिक्त हैं। रिक्त पदों पर भर्ती के लिए अभियान तो दूर की बात कोई प्रयास तक नहीं किया जा रहे हैं। जबकि डिमांड के हिसाब से देखा जाए तो दोनों बटालियन की फुल टीम 1200+1200=2400 भी डिमांड के हिसाब से कम है। हर एजेंसी जो सिक्योरिटी की मांग करती है, वह प्रत्येक सैनिक के बदले में सरकार को पेमेंट भी करती है। यानी कोई भी कर्मचारी सरकार के ऊपर बोझ नहीं होता बल्कि यह एक ऐसी सिक्योरिटी एजेंसी है, जो सरकार के लिए एक छोटा सा सोर्स आफ इनकम हो सकती है और युवाओं को रोजगार देने का एक बड़ा माध्यम भी।

MP SISF की डिमांड कौन करता है

सबसे अधिक मांग बिजली कंपनियों में हैं। एडीजी एसआइएसएफ अनिल कुमार ने बताया कि सरकारी एजेंसियों के अतिरिक्त निजी कंपनियां भी एसआइएसएफ से सुरक्षा की मांग करती हैं, लेकिन बल कम होने से उपलब्ध नहीं करा पाते। निजी कंपनियों को सुरक्षा और ईमानदारी के लिहाज से निजी सुरक्षाकर्मियों की तुलना में सरकारी होने से एसआइएसफ पर अधिक विश्वास रहता है। 

MP SISF की डिमांड है तो फिर भर्ती क्यों नहीं करते

सरकार ने बटालियन तो बने लेकिन भर्ती के लिए कोई पॉलिसी नहीं बनाई। MP SISF पूरी तरह से इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी एजेंसी है लेकिन इसमें SAF (विशेष सशस्त्र बल) के सैनिकों को ट्रांसफर किया जाता है। वह भी उनकी इच्छा के अनुसार। यानी कोई नियम यहां तक की निर्देश भी नहीं है। अब हालात यह है कि, MP POLICE के लिए परीक्षा देने वाला SAF की वर्दी पसंद नहीं करता। कोई क्यों MP SISF में जाएगा, जबकि यदि MP SISF की भर्ती अलग कर दी जाए तो उम्मीदवार का पहले से माइंडसेट रहेगा उसे सिक्योरिटी गार्ड बनना है। तब उसे कोई प्रॉब्लम नहीं होगी। 

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