BHOPAL NEWS - आइटी कोर्ट ने SBI को ऐसा सबक सिखाया कि नजीर बन गई, खाताधारक को न्याय मिला


भारतीय स्टेट बैंक की सिक्योरिटी में गड़बड़ी के कारण ठगी का शिकार हुए एक खाताधारक को अपने हक का पैसा वापस प्राप्त करने में 5 साल लग गए। बैंक की हेकड़ी देखिए, कोर्ट द्वारा आदेश दिए जाने के बावजूद बैंक ने खाताधारक को पैसे नहीं दिए थे। फिर कोर्ट ने भी ऐसा सबक सिखाया कि नजीर बन गई। आप पूरे देश भर में कोई भी बैंक कोर्ट के आदेश के पालन में आनाकानी नहीं कर पाएगा। 

SBI ने दावा किया गलती उपभोक्ता की है

शहडोल निवासी बालेंद्र प्रसाद सोनी जुलाई, 2019 में एटीएम पर गए लेकिन रुपये नहीं निकले। उन्होंने कार्ड घर में ही रखा था। कुछ दिन बाद उनके खाते से तीन बार में 80 हजार रुपये निकल गए। ट्रांजेक्शन एटीएम से किया गया था। बालेंद्र सोनी ने बैंक शाखा के अलावा साइबर सेल भोपाल में भी शिकायत दर्ज कराई। बैंक ने तर्क दिया कि रुपये बालेंद्र सोनी के डेबिट कार्ड से एटीएम के माध्यम से निकले हैं, गलती उपभोक्ता की है। 

कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज मांगे, बैंक की गलती साबित

कोर्ट ने बैंक को निर्देश दिया कि वह एटीएम का सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत कर सिद्ध करे कि रुपये किसने निकाले हैं। बैंक बालेंद्र सोनी के कार्ड से रुपये निकाला जाना सिद्ध नहीं कर पाई। अधिकारी एटीएम की सीसीटीवी रिकार्डिंग भी पेश नहीं कर पाए। आइटी कोर्ट ने पाया कि एटीएम कार्ड का क्लोन बनाकर किसी ठग ने रुपये निकाले हैं। 24 मार्च, 2023 को कोर्ट ने निर्णय दिया कि बैंक पीड़ित को 80 हजार रुपये ब्याज सहित चुकाए।

SBI ने कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया

बैंक को आदेश के 30 दिनों में उसका पालन करना था लेकिन बैंक ने रुपये नहीं चुकाए। जून, 2023 में बालेंद्र सोनी ने फिर कोर्ट में याचिका लगाई। अक्टूबर, 2023 में कोर्ट ने सुनवाई करते हुए बैंक को फटकार लगाई और कोर्ट का समय बरबाद करने के लिए कुल छह हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया फिर भी बैंक ने आदेश का पालन नहीं किया। 

IT COURT BHOPAL ने SBI को ऐसा सबक सिखाया...

आखिरकार पांच मार्च, 2024 को कोर्ट ने पीड़ित को राशि नहीं चुकाने तक डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट को निलंबित करने के आदेश दे दिए। ऐसा होते ही बैंक प्रबंधन ने दो दिन में राशि लौटा दी। पीड़ित के वकील और साइबर ला के जानकार यशदीप चतुर्वेदी बताते हैं कि बैंक रोजमर्रा के कई कामों के लिए डिजिटल सिग्नेचर का उपयोग करते हैं। संबंधित शाखा के डिजिटल सिग्नेचर ब्लाक होने से कई कामों सहित बड़े लेनदेन रुक जाते इसलिए बैंक ने तुरंत कोर्ट का आदेश मान लिया।

बैंक खाता में धोखाधड़ी के लिए स्पेशल कोर्ट

यशदीप चतुर्वेदी के अनुसार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम- 2000 के तहत प्रदेश में आइटी कोर्ट (कोर्ट आफ एडीजुडिकेटिंग आफिसर) शुरू की गई है। दरअसल, खाताधारकों की राशि और बैंक संबंधी जानकारियां इलेक्ट्रानिक रूप में बैंक के सर्वर और कंप्यूटर संसाधनों पर स्टोर होती है। इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम-2000 के अनुसार बैंक की होती है। बैंक संबंधी इलेक्ट्रानिक धोखाधड़ी या गड़बड़ी के मामले इस कोर्ट में सुने जाते हैं।

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