IPC 105-2 - यदि अपराधी किसी को लूट कर भाग रहा है तो क्या उसे रोकने गोली मार सकते हैं

Legal general knowledge and law study notes  

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 105 का नियम क्रमांक 02 कहता है कि लूट के मामले में निजी प्रतिरक्षा का अधिकार तब तक बना रहता है जब तक कि हिंसा के प्रयोग का खतरा बना हुआ है, लेकिन खतरा टलते ही यह अधिकार समाप्त हो जाता है, अर्थात जैसे ही लूट करने वाला स्वयं को बचाकर भाग निकलता है उसके विरुद्ध प्रतिरक्षा का अधिकार भी समाप्त हो जाता है।

महत्वपूर्ण निर्णय - रोजसा हुसैन बनाम कानोंली वाद:-

इस मामले में परिवादी एक डकैत था, खतरनाक हथियार लेकर वह किसान के खेत में गया और उसने वहां किसान के बच्चों के पास से कपास लूट ली। बच्चों से इसकी सूचना मिलने पर किसान अपने साथियों सहित हथियार लेकर फसल की रक्षा करने हेतु खेत पर पहुंच गया। किसान एवं लुटेरे के बीच मे झड़प हुई जिसमें लुटेरे के दो साथी मारे गए। न्यायालय ने विनिश्चित किया कि किसान को धारा 105 के अंतर्गत निजी प्रतिरक्षा का अधिकार बच्चों से कपास लुटा जाने के समय से लेकर उसके खेत में पहुचने तथा परिवादी के भूमि पर काबिज बने रहने तक प्राप्त था। अतः किसान का बचाव स्वीकार किया गया। किस को ऐसा अपराध के लिए क्षमा कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय नंबर 2 - अशोक कुमार बनाम राज्य 

एसएलपी (क्रिमिनल) संख्या 3512/2023 तारीख: 2023-11-14 , सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया कि भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 105(2) के तहत "व्यक्तिगत प्रतिरक्षा" का अधिकार केवल तभी लागू होता है जब अपराधी को अपराध करते हुए पकड़ा जाए। यदि अपराध पहले ही हो चुका है, तो यह अधिकार लागू नहीं होगा।

इस मामले में, याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि प्रतिवादी ने उसके घर में घुसकर हमला किया और उसकी पत्नी को चोट पहुंचाई। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसने प्रतिवादी को अपराध करते हुए पकड़ा और उसे आत्मरक्षा में पीटा।

न्यायालय का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता ने प्रतिवादी को अपराध करते हुए नहीं पकड़ा था। प्रतिवादी पहले ही अपराध कर चुका था और भाग रहा था। इसलिए, याचिकाकर्ता को धारा 105(2) के तहत "व्यक्तिगत प्रतिरक्षा" का अधिकार नहीं था।

अन्य महत्वपूर्ण निर्णय:
  1. राजेश कुमार बनाम राज्य (2022) 10 SCC 722
  2. राजू बनाम राज्य (2021) 9 SCC 678
  3. मनोज कुमार बनाम राज्य (2020) 8 SCC 543 
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:- लेखक ✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं विधिक सलाहकार होशंगाबाद), इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com

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