MP NEWS - कांग्रेस का खुला प्रचार करने वाले कर्मचारी नेताओं की मंत्रालय परिक्रमा शुरू

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में कांग्रेस पार्टी का खुला प्रचार करने वाले कर्मचारी नेताओं का 3 दिसंबर को ब्लड प्रेशर लो हो गया था। सब ने एक दूसरे को मोटिवेट किया और मंगलवार से कर्मचारी नेताओं की मंत्रालय परिक्रमा शुरू हो गई है। मंगलवार को मंत्रालय में एक दर्जन से ज्यादा कर्मचारी नेता हाथ में गुलदस्ता लेकर यहां भाग घूमते हुए नजर आए। 

मध्य प्रदेश के कर्मचारी नेता एक बार फिर दिग्विजय सिंह से नाराज

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के लिए काम करने वाले कर्मचारी नेता, एक बार फिर दिग्विजय सिंह से नाराज हो गए हैं। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि उन्होंने किसी भी कांग्रेस कार्यकर्ता से ज्यादा मेहनत की। सुनिश्चित किया कि सभी कर्मचारी कांग्रेस पार्टी को वोट देंगे। ओल्ड पेंशन स्कीम और महंगाई भत्ता आदि के नाम पर कर्मचारियों को सरकार के खिलाफ किया। सफलता में मिली और 230 में से 190 विधानसभा सीटों पर कर्मचारियों ने कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशियों को जिताया, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह ने अपनी पोजीशन बचाने के लिए, कर्मचारी नेताओं की पोजीशन दांव पर लगा दी। सारा डाटा खोल कर रख दिया। पूरी पब्लिक को बता दिया कि कर्मचारियों ने इस चुनाव में कांग्रेस को जिताया था। 

2003 में नॉरेटिव सेट हुआ था, 20 साल चला

मध्य प्रदेश में सन 2003 में ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन हुआ था। तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह, अपनी जीत को लेकर इतने अस्वस्थ थे कि उन्होंने ऐलान कर दिया था कि यदि वह चुनाव हार गए तो 10 साल के लिए राजनीति से संन्यास ले लेंगे। इस चुनाव में उन्हें शर्मनाक शिकस्त मिली। उसके बाद मध्य प्रदेश के कर्मचारी नेताओं ने कई सालों तक बार-बार दोहराया कि कर्मचारियों की नाराजगी के कारण मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ है। अपनी बात को सही साबित करने के लिए डाक मत पत्रों के आंकड़ों का सहारा लिया गया। 

मंत्रालय का रास्ता कर्मचारियों के मोहल्ले से होकर नहीं गुजरता

तब से लेकर अब तक (पूरे 20 साल) मध्य प्रदेश में यह माना जाता रहा है कि, कर्मचारी जिस पार्टी अथवा प्रत्याशी को वोट देते हैं जनता भी उसी पार्टी और प्रत्याशी को वोट देती है क्योंकि कर्मचारी जनता से सीधे जुड़े होते हैं और राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ता मक्कार हो गए हैं। 20 साल बाद सन 2023 में यह मान्यता बदल गई। कर्मचारियों ने 190 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी को जिताया परंतु जनता ने कर्मचारियों के कहने पर वोट नहीं दिया बल्कि बिल्कुल उल्टा 163 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी को जिता दिया। 

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