INDORE NEWS - डॉ अंशु एवं उत्कर्ष वर्मा की याचिका हाई कोर्ट द्वारा निरस्त, क्रिमिनल केस चलेगा

मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में सरकारी कॉलेज के प्रिंसिपल की बेटी डॉ अंशु वर्मा एवं उत्कर्ष वर्मा खिलाफ दर्ज किया गया क्रिमिनल केस चलता रहेगा। हाईकोर्ट ने इस मामले को रद्द करने के लिए दाखिल की गई याचिका निरस्त कर दी है। जाति प्रमाण पत्र में गड़बड़ी का है। 

कॉलेज प्रिंसिपल के बच्चों ने आरक्षण का फायदा उठाने, जानकारी छुपाई

हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता उत्कर्ष वर्मा एवं डॉक्टर अंशु वर्मा की ओर से सीआरपीसी की धारा 227 के तहत प्रस्तुत किए गए आवेदन की सुनवाई के दौरान स्पष्ट हुआ कि, दोनों पिछड़ा वर्ग से हैं परंतु इनके पिता इंदौर जिले के सरकारी कॉलेज में प्रिंसिपल है, लेकिन ओबीसी आरक्षण का लाभ लेने के लिए इन्होंने अपने पिता की आय घोषित नहीं की। इसके कारण दोनों क्रीमी लेयर में नहीं आए और ओबीसी आरक्षण के पात्र माने गए। जब यह तथ्य स्पष्ट हुआ कि, दोनों के पिता सरकारी कॉलेज में प्रिंसिपल है तो उनके जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिए गए और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया। 

ओबीसी जाति प्रमाण पत्र में आय की जानकारी गलत भरी तो क्या होगा

याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस अनिल वर्मा ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने जाति प्रमाण पत्र के प्रोफॉर्मा में अपनी पारिवारिक आय को चिह्नित करने के लिए सभी प्रासंगिक क्षेत्रों को खाली छोड़ दिया था, जो दर्शाता है कि उनके कार्य प्रथम दृष्टया प्रामाणिक नहीं थे। यह उल्लेखनीय है कि दोनों याचिकाकर्ता उच्च शिक्षित व्यक्ति हैं। इसलिए, यह नहीं माना जा सकता है कि उन्होंने इस तथ्य की सत्यता जाने बिना संबंधित फॉर्म भर दिया है।परिवार के सभी सदस्यों की कुल वार्षिक आय के संबंध में विशिष्ट कॉलम है, लेकिन दोनों गलत आय भर दी। 

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