IPC 229 - नकली जूरी के सदस्य और जज बनना कितना गंभीर अपराध कितनी सजा,पढ़िए

Legal general knowledge and law study notes 

जूरी प्रणाली एक ऐसी व्यवस्था थी जिसमें सदस्यों का एक समूह होता है एवं एक निर्धारक अर्थात जज होता है जो किसी बात का फैसला सुनाता है जूरी के सभी सदस्य आपना मत देते हैं एवं उस मत के अनुसार निर्धारक आपना फैसला सुनाता हैI अगर कोई व्यक्ति नकली जूरी का सदस्य बनता है या निर्धारक तो उसे कानून में क्या दण्ड मिलेगा जानिए।

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 229 की परिभाषा

जो कोई व्यक्ति किसी मामले मे जानबूझकर कर किसी जूरी के सदस्य का या असेसर (निर्धारक) का नकली रूप धारण करेगा और जूरी में अपना मत देगा या अवैध तरीके से निर्धारक बनकर मामले में फैसला सुनाएगा, वह व्यक्ति भारतीय दण्ड संहिता की धारा 229 के अंतर्गत दोषी होगा।

Indian Penal Code, 1860 section 229 Punishment 

इस धारा के अपराध असंज्ञेय एवं जमानतीय होते हैं इनकी सुनवाई प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा की जा सकती है सजा:- इस धारा के अपराध के लिए अधिकतम दो वर्ष की कारावास या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जा सकता है।
विशेष नोट:- भारत मे सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार अभी जूरी प्रणाली खत्म कर दी गई है। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) :- लेखक ✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं विधिक सलाहकार होशंगाबाद) 9827737665 

इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com

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