गोवर्धन पूजा का सही शुभ मुहूर्त टाइम - Correct auspicious time of Govardhan Puja

गोवर्धन पूजा को लेकर कुछ लोगों में कंफ्यूजन की स्थिति अभी भी बनी हुई है। कई लोगों ने दीपावली के दूसरे दिन यानी आज 13 नवंबर को गोवर्धन पूजा का आयोजन कर लिया। इसलिए एक बार फिर बताना जरूरी है कि गोवर्धन पूजा का सही शुभ मुहूर्त टाइम क्या है। 

गोवर्धन पूजा 14 नवंबर को क्यों मनाई जाएगी 

कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजा की जाती है। सामान्यतः यह दिन दीपावली के दूसरे दिन होता है परंतु ऐसा अनिवार्य नहीं है। तिथि का परिवर्तन ना तो रात्रि 12:00 बजे होता और ना ही सूर्योदय के साथ होता है। तिथि परिवर्तन, विज्ञान का वह लेवल है जहां तक आधुनिक विज्ञान को पहुंचने में अभी काफी समय है। तिथि त्यौहार को लेकर भारत में वैष्णव और शैव संप्रदाय के बीच मत भिन्नता है। शैव संप्रदाय के लोग जब भी तिथि परिवर्तन होता है तब त्यौहार मनाते हैं, जबकि वैष्णव संप्रदाय के लोग जिस तिथि में सूर्य का उदय होता है, उस दिन को त्यौहार मनाते हैं। गोवर्धन पूजा की परंपरा भगवान श्री कृष्ण ने प्रारंभ की है। भगवान श्री कृष्णा, श्री हरि विष्णु का अवतार हैं इसलिए यह त्यौहार वैष्णव संप्रदाय की मान्यता के अनुसार मनाया जाता है। 

Govardhan Puja 2023 muhurat time 

भारतीय पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि दिनांक 13 नवंबर दिन सोमवार को दोपहर 2:56 बजे से प्रारंभ हो रही है एवं 14 नवंबर मंगलवार को दोपहर 2:36 बजे तक रहेगी। इस प्रकार प्रतिपदा तिथि का सूर्योदय दिनांक 14 नवंबर मंगलवार को होगा। यही कारण है कि वैष्णव संप्रदाय की मान्यता के अनुसार गोवर्धन पूजा 14 नवंबर 2023 को की जाएगी। ड्रिक पंचांग के अनुसार गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त दिनांक 14 नवंबर 2023 दिन मंगलवार को अनुराधा नक्षत्र , प्रातः 6:43 बजे से 8:52 बजे तक रहेगा। इस दिन शोभना नाम का एक विशेष योग भी पढ़ रहा है जो, मनुष्यों के लिए मंगलकारी है। 

गोवर्धन पूजा की पूजा विधि क्या है?

गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर पूजा की जाती है। गोवर्धन पूजा को प्रकृति की पूजा भी कहा जाता है, यह परंपरा भगवान श्री कृष्ण ने प्रारंभ की है। यह पर्यावरण के प्रति अपने संकल्प को दोहराने का दिन है। 
  • गोवर्धन पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करें।
  • फिर शुभ मुहूर्त में गाय के गोबर से गिरिराज गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं और साथ ही पशुधन यानी गाय, बछड़े आदि की आकृति भी बनाएं।
  • इसके बाद धूप-दीप आदि से विधिवत पूजा करें।
  • भगवान कृष्ण को दुग्ध से स्नान कराने के बाद उनका पूजन करें।
  • इसके बाद अन्नकूट का भोग लगाएं। 

गोवर्धन पूजा का महत्व क्या है?

द्वापर युग में भगवान श्री हरि विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने कलयुग में मनुष्य के समक्ष आने वाली चुनौतियों और उनसे निपटने के उपाय बताए हैं। गोवर्धन पूजा उन्हें उपाय में से एक है। इस दिन हम प्रकृति की पूजा करते हैं। यह संकल्प लेते हैं की प्रकृति में प्रदूषण नहीं फैलाएंगे और कार्बन डाइऑक्साइड आदि जहरीले गैसों को नष्ट करने के लिए नियमित रूप से यज्ञ हवन इत्यादि वर्ष भर तक करते रहेंगे। इसी संकल्प के चलते भारत में लाखों लोग प्रतिदिन गायत्री हवन एवं अग्निहोत्र करते हैं। भारत के पर्यावरण प्रेमियों के लिए यह सबसे बड़ा दिन है। 

गोवर्धन पूजा के लिए सामग्री क्या चाहिए?

गोबर, मिट्टी, होली, चावल, दूध, दही, खीर, बताशे, जल, पान, पुष्प, दीपक, धन एवं अन्नकूट के लिए 56 भोग। 

अतिरिक्त सामग्री जिन्हें आप गोवर्धन पूजा के लिए खरीद सकते हैं:

गोबर के उपले
गोबर के दीपक
गोबर की मूर्तियाँ
गोबर के खिलौने 

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